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रामचरितमानस — बालकाण्ड⏱ 1 मिनट पठन

पार्वतीजी की तपस्या से तीनों लोकों में क्या प्रभाव

पार्वतीजी का शरीर तप से क्षीण हो गया, तब आकाश से ब्रह्मवाणी हुई — 'अब मिलिहहिं त्रिपुरारि' — अब शिवजी मिलेंगे।

संक्षिप्त उत्तर

पार्वतीजी का शरीर तप से क्षीण हो गया, तब आकाश से ब्रह्मवाणी हुई — 'अब मिलिहहिं त्रिपुरारि' — अब शिवजी मिलेंगे। ब्रह्माजी ने कहा कि ऐसा कठोर तप किसी ने नहीं किया। सप्तर्षि जब मिलें तब इस वाणी को प्रमाण जानना।

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विस्तृत उत्तर

पार्वतीजी की तपस्या इतनी भीषण थी कि तीनों लोकों में हलचल मच गयी। उनका शरीर तपसे क्षीण हो गया और देखकर ब्रह्माजी की गम्भीर आकाशवाणी हुई।

चौपाई — 'देखि उमहि तप खीन सरीरा। ब्रह्मगिरा भै गगन गभीरा॥'

इसका अर्थ — तपसे उमाका शरीर क्षीण देखकर आकाशसे गम्भीर ब्रह्मवाणी हुई।

ब्रह्मवाणी ने कहा — 'भयउ मनोरथ सुफल तव सुनु गिरिराजकुमारि। परिहरु दुसह कलेस सब अब मिलिहहिं त्रिपुरारि॥'

अर्थ — हे पर्वतराजकी कुमारी! सुन, तेरा मनोरथ सफल हुआ। तू सारे असह्य क्लेशोंको त्याग दे। अब तुझे त्रिपुरारि (शिवजी) मिलेंगे।

आगे कहा — 'अस तपु काहुँ न कीन्ह भवानी। भए अनेक धीर मुनि ग्यानी॥' अर्थ — हे भवानी! धीर, मुनि और ज्ञानी बहुत हुए हैं, पर ऐसा (कठोर) तप किसीने नहीं किया।

ब्रह्मवाणी ने यह भी कहा कि जब पिता बुलाने आयें तब हठ छोड़कर घर चली जाना, और जब सप्तर्षि मिलें तब इस वाणी को ठीक समझना।

उत्तर को थोड़ा और स्पष्ट करें

पार्वतीजी की तपस्या से तीनों लोकों में क्या प्रभाव पड़ा को संदर्भ सहित समझें

पार्वतीजी की तपस्या से तीनों लोकों में क्या प्रभाव पड़ा का सबसे सीधा सार यह है: पार्वतीजी का शरीर तप से क्षीण हो गया, तब आकाश से ब्रह्मवाणी हुई — 'अब मिलिहहिं त्रिपुरारि' — अब शिवजी मिलेंगे। ब्रह्माजी ने कहा कि ऐसा कठोर तप...

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रामचरितमानस — बालकाण्ड प्रश्नोत्तर
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