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गरुड़ पुराण प्रश्नोत्तरी — 591 प्रश्न

शास्त्रों और पुराणों पर आधारित गरुड़ पुराण विषय के प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर — कुल 591 प्रश्न

दान एवं पुण्य

कृष्णा गाय दान से वैतरणी पार होती है — इसका विस्तार क्या है?

गरुड़ पुराण के आठवें अध्याय के अनुसार कृष्णा (काली) गाय का दान — जिसे 'वैतरणी गाय दान' कहते हैं — यमलोक-मार्ग पर वैतरणी नदी को पार कराता है। दान की गई गाय नदी के तट पर प्रकट होती है और जीव उसकी पूँछ पकड़कर पार होता है।

कृष्णा गायवैतरणी दानगोदान
यमलोक एवं न्याय

यमराज धनी और निर्धन से भेद नहीं करते — ऐसा क्यों?

गरुड़ पुराण के तीसरे अध्याय में चित्रगुप्त कहते हैं — यमराज मूर्ख-पंडित, दरिद्र-धनवान, सबल-निर्बल — सभी से समान व्यवहार करते हैं क्योंकि यमलोक में केवल कर्म देखे जाते हैं, धन या पद नहीं।

यमराजनिष्पक्षताधनी निर्धन
नरक एवं परलोक

अवीचि नरक में सबसे कठोर दंड किसे मिलता है?

गरुड़ पुराण के अनुसार अवीचि नरक में झूठ बोलने वाले, झूठी कसम खाने वाले और झूठी गवाही देने वाले जाते हैं। इस नरक में पापी को ऊँचे पहाड़ से बार-बार गिराया जाता है — यह दंड अत्यंत कठोर और निरंतर है।

अवीचि नरकनरक दंडझूठ
यमलोक एवं न्याय

सूर्य, चंद्र, वायु, अग्नि और आकाश मनुष्य के कर्म क्यों जानते हैं?

गरुड़ पुराण के तृतीय अध्याय के अनुसार सूर्य, चंद्र, वायु, अग्नि, आकाश, भूमि, जल, हृदय और दोनों संध्याएँ — ये सभी मनुष्य के कर्मों के नित्य साक्षी हैं। साथ ही यमराज के गुप्तचर श्रवण भी सभी कर्म जानते हैं।

सूर्यचंद्रकर्म साक्षी
दान एवं पुण्य

मनुष्यों और पशुओं के लिए जलहीन स्थान में जल न देने का क्या पछतावा होता है?

गरुड़ पुराण के अनुसार जलहीन स्थान में जल न देने का पछतावा यममार्ग पर तब होता है जब पापी खुद प्यास से तड़पता है और यमदूत जल के बदले उबलता तेल पिलाते हैं। यह उसी कर्म का प्रतिफल है।

जल दानजलहीनपछतावा
पाप एवं दंड

ब्रह्महत्यारा, गाय-हत्यारा और कन्या-हत्यारा — तीनों चांडाल योनि में क्यों जाते हैं?

गरुड़ पुराण के पाँचवें अध्याय के अनुसार ये तीनों — ब्राह्मण, गाय और कन्या — धर्म के स्तंभ हैं। इन तीनों की हत्या समान गुरुता के पाप हैं, इसलिए तीनों हत्यारों को नरकभोग के बाद समान रूप से चांडाल योनि का दंड मिलता है।

ब्रह्महत्यागोहत्याकन्या हत्या
अंत्येष्टि एवं मृत्यु संस्कार

गरुड़ पुराण के दसवें अध्याय में मृत्यु के तुरंत बाद कौन से कर्म बताए गए हैं?

गरुड़ पुराण के दसवें अध्याय में बताया गया है कि मृत्यु के तुरंत बाद मुंडन, शव-स्नान, छह स्थानों पर पिंडदान, दाह संस्कार (सूर्यास्त पूर्व), गंगा में अस्थि-विसर्जन और दशगात्र-कर्म प्रारंभ करने का विधान है।

दसवाँ अध्यायमृत्यु संस्कारपिंडदान
यमलोक एवं न्याय

यममार्ग पर रक्त की वृष्टि और शस्त्र की वृष्टि का वर्णन क्या है?

गरुड़ पुराण के दूसरे अध्याय के अनुसार यममार्ग पर पापियों पर रक्त, शस्त्र, अंगार, शिला और गर्म जल की वृष्टि होती है — यह उनके पाप-कर्मों का ही प्रतिफल है जो विभिन्न यातनाओं के रूप में लौटता है।

यममार्गरक्त वृष्टिशस्त्र वृष्टि
यमलोक एवं न्याय

यमराज का भैंसे पर बैठना क्यों बताया गया है?

गरुड़ पुराण और अन्य पुराणों में यमराज भैंसे पर बैठे वर्णित हैं। भैंसा मृत्यु की अटल, निरपेक्ष और स्थूल शक्ति का प्रतीक है। काले रंग का भैंसा दक्षिण दिशा, यमलोक और अंधकार का प्रतीक है।

यमराजभैंसावाहन
यमलोक एवं न्याय

यममार्ग में पापी काले सर्पों और बिच्छुओं से क्यों घिरा होता है?

गरुड़ पुराण के दूसरे अध्याय के अनुसार पापी के अपने पाप-कर्म ही यममार्ग में काले सर्पों, बिच्छुओं और हिंसक पशुओं का रूप धारण करते हैं। जिसने जितना कष्ट दिया, उसे उतनी ही पीड़ा के रूप में यह यातना मिलती है।

यममार्गकाले सर्पबिच्छू
पाप एवं दंड

ऋण लेकर न लौटाने वाले की क्या गति होती है?

गरुड़ पुराण के अनुसार ऋण लेकर न लौटाने वाला वैतरणी नदी में गिरता है। यमलोक में उसका मांस काटकर ऋणदाता को दिया जाता है और उसे रौरव नरक की यातना भोगनी पड़ती है।

ऋणकर्जवैतरणी
दान एवं पुण्य

मृत्युकाल में गाय दान से क्या विशेष लाभ होता है?

गरुड़ पुराण के अनुसार मृत्युकाल में किया गया गोदान वैतरणी नदी पार कराने वाला होता है — वह गाय यमलोक के मार्ग में प्रकट होती है और जीव उसकी पूँछ पकड़कर उस भयानक नदी से बिना कष्ट पार हो जाता है।

गोदानमृत्युकालवैतरणी
तंत्र एवं विद्या

गारुड़ी विद्या और सर्पविष नाश का क्या संबंध है?

गारुड़ी विद्या गरुड़ पुराण में वर्णित वह मंत्र-विद्या है जिसके द्वारा गरुड़ की शक्ति का आवाहन करके सर्पविष नष्ट किया जाता है। महर्षि कश्यप इसके प्रसिद्ध ज्ञाता थे। गरुड़ पुराण में इसे स्वयं आयुर्वेद-तंत्र का अंग बताया गया है।

गारुड़ी विद्यासर्पविषगरुड़ पुराण
नरक एवं परलोक

दंदशूक नरक में सर्पों के काटने की सजा किसे मिलती है?

दंदशूक नरक में उन लोगों को भेजा जाता है जो निर्दोष व्यक्तियों को सताते और पीड़ित करते हैं। यहाँ पाँच-सात मुख वाले महाविषधर सर्प बार-बार डसते हैं।

दंदशूक नरकसर्पनरक दंड
नरक एवं परलोक

पापी एक नरक से दूसरे नरक में क्यों जाते रहते हैं?

गरुड़ पुराण के अनुसार जिसने अनेक पाप किए हैं, उसे हर पाप के लिए अलग नरक भोगना पड़ता है। एक नरक समाप्त होने पर अगले पाप का फल अगले नरक में मिलता है — यह क्रम पाप-क्षय होने तक चलता है।

नरकपापीएक से दूसरा नरक
श्राद्ध एवं पितृकर्म

श्राद्ध में अर्घ्य देने की विधि क्या है?

श्राद्ध में अर्घ्य (तर्पण) की विधि में दक्षिण मुख, अपसव्य स्थिति में, तांबे-चाँदी के पात्र में जल-तिल-कुश मिलाकर पितरों का नाम-गोत्र लेते हुए जल छोड़ा जाता है। अपराह्न का समय श्रेष्ठ माना गया है।

अर्घ्यश्राद्ध विधितर्पण
पूजा एवं उपासना

वैष्णव पंजर क्या है?

वैष्णव पंजर गरुड़ पुराण के पूर्वखण्ड में वर्णित भगवान विष्णु का एक रक्षा-कवच (स्तोत्र) है, जिसमें विष्णु के नामों के माध्यम से शरीर के प्रत्येक अंग की सुरक्षा की जाती है। यह न्यास-विधि पर आधारित उपासना है।

वैष्णव पंजरविष्णु पंजर स्तोत्रगरुड़ पुराण
पाप एवं दंड

वाद-विवाद में ब्राह्मण को पराजित करने वाला ब्रह्मराक्षस क्यों बनता है?

गरुड़ पुराण के पाँचवें अध्याय के अनुसार अहंकार या दुर्भाव से ब्राह्मण को वाद-विवाद में पराजित करने वाला जलविहीन वन में ब्रह्मराक्षस बनता है। यह ब्रह्मतेज के अपमान का दंड है।

ब्रह्मराक्षसब्राह्मणवाद-विवाद
पाप एवं दंड

स्त्री हत्या और गर्भपात करने वाला पुलिन्द (भील) क्यों होता है?

गरुड़ पुराण के पाँचवें अध्याय के अनुसार स्त्री-हत्यारा और गर्भपात कराने वाला नरकभोग के बाद पुलिन्द (भील) योनि में जन्म लेता है और रोगग्रस्त रहता है। इसके पहले तप्तसूर्मि नरक में गर्म सुइयों से दंडित किया जाता है।

स्त्री हत्यागर्भपातपुलिन्द
धर्म एवं कर्तव्य

गायों और ब्राह्मणों के लिए प्रयास न करने का क्या पछतावा होता है?

गरुड़ पुराण के अनुसार गाय और ब्राह्मण की उपेक्षा करने वाले को यमलोक में भयानक पछतावा होता है। यमदूत कोसते हैं, नरक की यातना मिलती है और अगले जन्म में दरिद्रता, अंधत्व और नीच योनियाँ प्राप्त होती हैं।

गायब्राह्मणपछतावा
नरक एवं परलोक

विषान्न देकर मारने वाले को वैतरणी में कौन सा दंड मिलता है?

गरुड़ पुराण के अनुसार विष मिला भोजन देकर मारने वाले को 'रक्षकभोजन' नरक में स्वयं विषयुक्त भोजन खिलाया जाता है। वैतरणी में उसे विषधर सर्प डसते हैं — जैसा पाप, वैसा दंड।

विषान्नहत्यावैतरणी
पाप एवं दंड

महापापी की पहचान क्या है?

गरुड़ पुराण के अनुसार महापापी की पहचान उसके शरीर के चिह्नों से होती है — ब्रह्महत्यारा क्षय रोगी, गोघाती कुबड़ा, मद्यपान करने वाले के दाँत काले, गुरु-अपमानकर्ता मिरगी का रोगी और परस्त्रीगामी नपुंसक होता है।

महापापीपाप चिह्नगरुड़ पुराण
नरक एवं परलोक

गोघाती को वैतरणी में डुबोने का वर्णन क्या है?

गरुड़ पुराण के अनुसार गोघाती को विशेष रूप से वैतरणी नदी में फेंका जाता है जहाँ घड़ियाल, विषधर सर्प और गिद्ध उसे नोचते हैं। इसके अलावा 'महावीचि' नरक में रक्त के गड्ढे में डाला जाता है और काँटे चुभाए जाते हैं।

गोघातीगौहत्यावैतरणी
नरक एवं परलोक

ब्राह्मण होकर मद्य पीने वाले को कौन सा नरक मिलता है?

गरुड़ पुराण के अनुसार मद्यपान करने वाला ब्राह्मण विशेष रूप से वैतरणी नरक में डाला जाता है। इसके अलावा 'विलेपक' नरक में उसे जलती आग में फेंका जाता है और अगले जन्म में उसके दाँत काले होते हैं तथा वह भेड़िये-कुत्ते की योनि पाता है।

ब्राह्मणमद्यपाननरक

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