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बालकाण्ड प्रश्नोत्तरी — 321 प्रश्न

शास्त्रों और पुराणों पर आधारित बालकाण्ड विषय के प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर — कुल 321 प्रश्न

रामचरितमानस — बालकाण्ड

राजा जनक ने निराश होकर क्या कहा?

जनक ने निराश होकर कहा — पृथ्वी वीरविहीन हो गयी, कोई धनुष नहीं तोड़ सका। कुछ अभिमानी राजा हँसे, कुछ ने कहा विवाह कठिन है। जनक की इस वाणी से लक्ष्मणजी को बड़ा क्रोध आया।

बालकाण्डजनक निराशावीरविहीन
रामचरितमानस — बालकाण्ड

'भूप सहस दस एकहिं बारा। लगे उठावन टरइ न टारा' — इसका अर्थ?

अर्थ — दस हज़ार राजा एक साथ उठाने लगे पर धनुष टस-से-मस नहीं हुआ। शिवजी का धनुष इतना भारी और दिव्य कि कोई हिला तक नहीं सका। इसके बाद जनक ने निराश वाणी कही।

बालकाण्डदोहा अर्थदस हज़ार राजा
रामचरितमानस — बालकाण्ड

सभी राजाओं ने धनुष उठाने का प्रयास किया — क्या हुआ?

दस हज़ार राजा एक साथ मिलकर भी धनुष हिला नहीं सके — 'भूप सहस दस एकहिं बारा। लगे उठावन टरइ न टारा॥' रामजी को देखकर सब हार गये — जैसे चन्द्रमा उदय हो तो तारे फीके पड़ जायें।

बालकाण्डराजाधनुष
रामचरितमानस — बालकाण्ड

शिवजी का धनुष (पिनाक) कहाँ से आया — किसने दिया?

शिव का धनुष (पिनाक) जनक वंश में पूर्वजों से चला आया। पुराणों अनुसार दक्ष यज्ञ विध्वंस के बाद देवताओं से जनक कुल में आया। मानस में विस्तृत उत्पत्ति नहीं — 'संकर चापु जहाजु' कहा गया।

बालकाण्डपिनाकशिव धनुष
रामचरितमानस — बालकाण्ड

राजा जनक ने सीताजी के विवाह के लिये क्या शर्त रखी थी?

जो शिवजी का धनुष (पिनाक) उठाकर तोड़ दे, उसी से सीताजी का विवाह। यह जनक की प्रतिज्ञा थी। धनुष अत्यन्त भारी — हज़ारों राजा मिलकर भी हिला नहीं सके।

बालकाण्डजनक प्रतिज्ञाधनुष शर्त
रामचरितमानस — बालकाण्ड

सीताजी ने वरदान पाकर लक्ष्मणजी और रामजी के बारे में क्या सोचा?

पार्वती वरदान और नारद भविष्यवाणी के अनुसार सीताजी ने मन ही मन रामजी को अपना वर मान लिया। सखी ने कहा — पहले राजकुमार देख लो। रामजी को साँवला, सलोना, अनुपम सुन्दर पाया। जन्म-जन्मान्तर का शाश्वत प्रेम जागा।

बालकाण्डसीतावरदान
रामचरितमानस — बालकाण्ड

जनकपुर की स्त्रियों ने श्रीरामजी के लिये सीताजी से विवाह की कामना क्यों की?

रामजी को सीताजी का सबसे योग्य वर माना — अनुपम सौन्दर्य, दोनों एक दूसरे के योग्य, विधाता का उचित फल। स्त्रियों ने कहा — 'जोगु जानकिहि यह बरु अहई' — यह विवाह हो तो सब कृतार्थ होंगे।

बालकाण्डविवाह कामनास्त्रियाँ
रामचरितमानस — बालकाण्ड

जनकपुर में श्रीरामजी को देखकर नगरवासियों ने क्या-क्या कहा?

नगरवासी मुग्ध हुए — (1) जानकी के योग्य वर, (2) विधाता मिलायें तो सब कृतार्थ, (3) शंकर धनुष कठोर — चिन्ता, (4) रूप में अपार शक्ति, (5) इनका दर्शन पूर्वजन्म के पुण्य से ही मिलता है।

बालकाण्डनगरवासीराम छबि
रामचरितमानस — बालकाण्ड

श्रीराम-लक्ष्मण ने जनकपुर में किन-किन स्थानों का भ्रमण किया?

नगर भ्रमण (गलियाँ-बाज़ार), राजा का सुन्दर बाग (पुष्पवाटिका), बाग का मणि-सीढ़ियों वाला सरोवर, लता-मण्डप। 'बागु तड़ागु बिलोकि प्रभु हरषे बंधु समेत' — बाग-सरोवर देखकर भाई सहित हर्षित हुए।

बालकाण्डजनकपुर भ्रमणबाग
रामचरितमानस — बालकाण्ड

'प्रेम बिबस सीता पहिं आई' — कौन प्रेमविह्वल होकर सीताजी के पास आई?

एक चतुर-सयानी प्रिय सखी — जिसने सीताजी को रामजी के बारे में बताया। उसके वचन सीताजी को प्रिय लगे, नेत्र अकुलाये। उसी सखी को आगे कर सीताजी चलीं। 'प्रीति पुरातन लखइ न कोई' — जन्म-जन्मान्तर का प्रेम।

बालकाण्डसखीसीता
रामचरितमानस — बालकाण्ड

जनकपुर में सीताजी की किस प्रसिद्धि का वर्णन है?

सीताजी अनुपम सौन्दर्य, शील और सुलक्षणों से प्रसिद्ध थीं। नारदजी ने 'सारे जगत में पूज्य' कहा था। सखियाँ उनकी शोभा देखकर अपने-आपको भूल जातीं। जनकपुर की स्त्रियाँ रामजी से उनके विवाह की कामना करती थीं।

बालकाण्डसीता प्रसिद्धिजनकपुर
रामचरितमानस — बालकाण्ड

'कोउ कह जौं ए बर बरैं तौ सखि कहा बुझाइ' — इसका अर्थ?

जनकपुर की स्त्रियों का संवाद — यदि विधाता उचित फल देते हैं तो जानकी को यही वर मिलेगा, सन्देह नहीं। यदि ऐसा संयोग बने तो सब कृतार्थ होंगे — सखी कहती हैं 'ये ससुराल यहाँ आयें' इसकी आतुरता है।

बालकाण्डजनकपुर स्त्रियाँसखी संवाद
रामचरितमानस — बालकाण्ड

सीताजी की सखियों ने पार्वती मूर्ति का हिलना देखकर क्या कहा?

सखियों ने पार्वती मूर्ति को प्रसन्न होते (हिलते/मुस्कुराते) देखकर कहा कि देवी प्रसन्न हुईं — सीताजी का मनोरथ पूरा होगा, मनवांछित वर मिलेंगे। सीताजी को बड़ा हर्ष हुआ।

बालकाण्डसखीपार्वती मूर्ति
रामचरितमानस — बालकाण्ड

सीताजी ने पार्वती पूजन में क्या-क्या अर्पित किया?

मानस में विस्तृत सामग्री वर्णन संक्षिप्त है। सीताजी ने पार्वतीजी के मन्दिर में चरणों में वन्दना की, हाथ जोड़कर स्तुति की, और प्रेमपूर्वक पूजन किया। मुख्य भाव — हृदय से प्रार्थना और मनोरथ निवेदन।

बालकाण्डसीता पूजनपार्वती
रामचरितमानस — बालकाण्ड

सीताजी और श्रीरामजी के प्रथम दर्शन में तुलसीदासजी ने कौन सा रस वर्णित किया?

श्रृंगार रस (संयोग पक्ष) — रामजी के नेत्र सीता-मुख के चकोर बने, सीताजी में पवित्र प्रीति जागी पर मृगछौनी-सी भयभीत। दोनों ने प्रेम अनुभव किया पर लोकलाज-मर्यादा से प्रकट नहीं किया। मानस का सबसे मधुर प्रसंग।

बालकाण्डश्रृंगार रसप्रथम दर्शन
रामचरितमानस — बालकाण्ड

'श्याम गौर किमि कहौं बखानी' — यह किसका वर्णन है?

श्रीरामजी (श्याम/साँवले) और लक्ष्मणजी (गौर/गोरे) की जोड़ी का वर्णन। 'सोभा सीवँ सुभग दोउ बीरा। नील पीत जलजाभ सरीरा' — दोनों शोभा की सीमा, नील-पीत कमल समान शरीर, मोरपंख सिर पर। यह मानस में राम-लक्ष्मण की प्रसिद्ध उपाधि है।

बालकाण्डश्याम गौरराम लक्ष्मण
रामचरितमानस — बालकाण्ड

गिरिजा (पार्वती) की मूर्ति ने सीताजी को क्या वरदान दिया?

पार्वती मूर्ति ने प्रसन्न होकर मुस्कुराई और वरदान दिया — मनवांछित वर (रामजी) मिलेंगे, मनोरथ पूर्ण होगा। सखियों ने मूर्ति का हिलना देखा — 'देवी प्रसन्न हुईं।' सीताजी को बड़ा हर्ष हुआ।

बालकाण्डपार्वती वरदानसीता
रामचरितमानस — बालकाण्ड

सीताजी ने श्रीरामजी को पहली बार देखकर क्या अनुभव किया?

नारदजी के वचन स्मरण कर मन में पवित्र प्रीति जागी — 'जनु सिसु मृगी सभीत' — डरी हुई मृगछौनी की तरह चकित होकर चारों ओर देखने लगीं। दर्शन के लिये नेत्र अकुला उठे। जन्म-जन्मान्तर का प्रेम जाग उठा।

बालकाण्डसीताप्रथम दर्शन
रामचरितमानस — बालकाण्ड

पुष्पवाटिका में श्रीरामजी ने सीताजी को पहली बार कब देखा?

जब सीताजी सखियों संग फूल चुन रहीं और कंगन-किंकिनी-नूपुर की ध्वनि सुनाई दी। रामजी ने उस ओर देखा — 'सिय मुख ससि भए नयन चकोरा' — सीताजी के मुखरूपी चन्द्रमा के लिये नेत्र चकोर बन गये। दोनों का प्रथम दर्शन पुष्पवाटिका में हुआ।

बालकाण्डप्रथम दर्शनपुष्पवाटिका
रामचरितमानस — बालकाण्ड

किस सखी ने सीताजी को श्रीराम-लक्ष्मण के बारे में बताया?

एक चतुर सयानी सखी ने — 'धरि धीरजु एक आलि सयानी। सीता सन बोली गहि पानी' — हाथ पकड़कर कहा कि गिरिजा पूजन बाद में, पहले राजकुमार को देख लो। सखी के वचन सीताजी को अत्यन्त प्रिय लगे।

बालकाण्डसखीसीता
रामचरितमानस — बालकाण्ड

सीताजी ने माता पार्वती से कैसा वर माँगा?

सीताजी ने सीधे शब्दों में नहीं कहा — 'मोर मनोरथु जानहु नीकें' — मेरा मनोरथ आप जानती हैं। नारदजी के वचन स्मरण कर मन में पवित्र प्रीति जागी — रामजी उनके वर बनें, यही हृदय भाव से प्रार्थना।

बालकाण्डसीतापार्वती
रामचरितमानस — बालकाण्ड

सीताजी ने गिरिजा (पार्वती) मन्दिर में क्या प्रार्थना की?

सीताजी ने पार्वतीजी की स्तुति की — 'जय जय गिरिबरराज किसोरी' — और कहा कि मेरा मनोरथ आप जानती हैं, आप सबके हृदय में बसती हैं, इसलिये प्रकट नहीं किया। चरण पकड़कर मनोवांछित वर (रामजी) की प्रार्थना की।

बालकाण्डसीता प्रार्थनापार्वती मन्दिर
रामचरितमानस — बालकाण्ड

सीताजी पुष्पवाटिका में किसकी पूजा करने गयी थीं?

गिरिजा (पार्वती/भवानी) की पूजा करने — माता ने भेजा था। 'तेहि अवसर सीता तहँ आई। गिरिजा पूजन जननि पठाई॥' सखियों के साथ आयीं, फूल चुने, फिर पार्वती मन्दिर में पूजा की।

बालकाण्डसीतापुष्पवाटिका
रामचरितमानस — बालकाण्ड

जनकपुर की स्त्रियों ने श्रीराम-लक्ष्मण को देखकर क्या-क्या कहा?

स्त्रियों ने कहा — (1) यह वर जानकी के योग्य है, (2) राजा देख ले तो प्रतिज्ञा छोड़कर विवाह करा दे, (3) विधाता उचित फल देते हैं तो जानकी को यही मिलेगा, (4) पर शंकर धनुष कठोर है और ये कोमल किशोर — चिन्ता भी जताई।

बालकाण्डजनकपुर स्त्रियाँराम दर्शन

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