विस्तृत उत्तर
सीताजी पुष्पवाटिका में गिरिजा (पार्वती/भवानी) की पूजा करने गयी थीं। उनकी माता ने उन्हें गिरिजा पूजन के लिये भेजा था।
चौपाई — 'तेहि अवसर सीता तहँ आई। गिरिजा पूजन जननि पठाई॥'
इसका अर्थ — उसी समय सीताजी वहाँ आयीं। माताने उन्हें गिरिजा (पार्वती) जीकी पूजा करनेके लिये भेजा था।
सीताजी सखियोंके साथ पुष्पवाटिका में आयीं, फूल चुनने लगीं, और फिर गिरिजा (पार्वती) के मन्दिर में गयीं जहाँ उन्होंने पार्वतीजी के चरणों में हाथ जोड़कर वन्दना की और अपने मनोवांछित वर (श्रीरामजी) की प्रार्थना की।





