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बालकाण्ड प्रश्नोत्तरी — 321 प्रश्न

शास्त्रों और पुराणों पर आधारित बालकाण्ड विषय के प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर — कुल 321 प्रश्न

रामचरितमानस — बालकाण्ड

रावण की माता का क्या नाम था?

रामचरितमानस में रावण की माता का नाम सीधे नहीं आता। पुराणों के अनुसार माता का नाम कैकसी (सुमाली राक्षस की पुत्री) था। कैकसी विश्रवा मुनि की पत्नी थीं। रावण, कुम्भकर्ण, विभीषण और शूर्पणखा कैकसी की सन्तान थे।

बालकाण्डरावण माताकैकसी
रामचरितमानस — बालकाण्ड

रावण किसका पुत्र था?

रावण पुलस्त्य ऋषि के कुल में उत्पन्न हुआ। मानस में कहा — 'उपजे जदपि पुलस्त्यकुल पावन अमल अनूप' — पवित्र कुल में जन्मा पर ब्राह्मण शाप से पापरूप हुआ। पुराणों के अनुसार पिता विश्रवा (पुलस्त्य का पौत्र) था।

बालकाण्डरावण पिताविश्रवा
रामचरितमानस — बालकाण्ड

रावण का पूर्वजन्म कौन था — रामचरितमानस के अनुसार?

रामचरितमानस के अनुसार रावण का पूर्वजन्म राजा प्रतापभानु था। कपटमुनि के छल से ब्राह्मण-भोजन में माँस मिला, क्रोधित ब्राह्मणों ने शाप दिया — 'निशाचर होहु' — परिवारसहित राक्षस बना। शिक्षा — कपट और ब्राह्मण अपमान का भयंकर परिणाम।

बालकाण्डरावण पूर्वजन्मप्रतापभानु
रामचरितमानस — बालकाण्ड

प्रतापभानु के मंत्री अरिमर्दन अगले जन्म में कौन बने?

प्रतापभानु का भाई/मन्त्री अगले जन्म में कुम्भकर्ण बना — अत्यन्त बलवान, जिसके जोड़ का योद्धा जगत में नहीं था। विभीषण भी भाई बना पर उसने भगवान की भक्ति माँगी इसलिये धर्मात्मा रहा।

बालकाण्डअरिमर्दनकुम्भकर्ण
रामचरितमानस — बालकाण्ड

प्रतापभानु अगले जन्म में कौन बने?

प्रतापभानु अगले जन्म में रावण (दशानन) बने। ब्राह्मण शाप से पूरा परिवार राक्षस कुल में जन्मा। यद्यपि पुलस्त्य ऋषि के पवित्र कुल में उत्पन्न हुए, पर शाप से सब पापरूप हुए।

बालकाण्डप्रतापभानुरावण
रामचरितमानस — बालकाण्ड

ब्राह्मणों ने प्रतापभानु को क्या शाप दिया?

'जाइ निसाचर होहु नृप मूढ़ सहित परिवार' — मूर्ख राजा, परिवारसहित जाकर राक्षस हो जा। ब्राह्मणों ने कहा — तूने हमें मारने का प्रयत्न किया, ईश्वर ने धर्म रक्षा की, अब तू परिवारसहित नष्ट होगा।

बालकाण्डब्राह्मण शापनिशाचर
रामचरितमानस — बालकाण्ड

प्रतापभानु को ब्राह्मणों का शाप कैसे लगा?

कपटमुनि ने भोजन में माँस मिलाया। आकाशवाणी ने ब्राह्मणों को चेतावनी दी। क्रोधित ब्राह्मणों ने बिना विचारे शाप दिया — 'जाइ निसाचर होहु नृप मूढ़ सहित परिवार' — मूर्ख राजा, परिवारसहित जाकर राक्षस हो जा।

बालकाण्डब्राह्मण शापप्रतापभानु
रामचरितमानस — बालकाण्ड

कपटमुनि ने प्रतापभानु से क्या छलकपट किया?

कपटमुनि ने कहा — मैं रसोई बनाऊँ, तुम परोसो, जो खायगा वह तुम्हारा दास बनेगा। राजा ने एक लाख ब्राह्मणों को बुलवाया। कपटमुनि ने भोजन में माँस मिला दिया। परोसते समय आकाशवाणी हुई — 'यह अन्न मत खाओ, इसमें माँस है!' ब्राह्मण क्रोधित हुए।

बालकाण्डकपटमुनिछल
रामचरितमानस — बालकाण्ड

कपटमुनि (कालकेतु) ने प्रतापभानु को क्या लालच दिया?

कपटमुनि ने तप की महिमा बताकर लालच दिया — 'तप से कुछ भी दुर्लभ नहीं, मुझे सब सिद्ध है।' अमरत्व और अजेयता का लालच देकर राजा को विश्वास में लिया ताकि अपनी छल-योजना पूरी कर सके।

बालकाण्डकपटमुनिलालच
रामचरितमानस — बालकाण्ड

प्रतापभानु को जंगल में कौन मिला?

एक कपटमुनि (कालकेतु/एकतनु) — जो वास्तव में एक पराजित राजा था जिसका देश प्रतापभानु ने छीना था। वह तपस्वी वेष में बदला लेने की ताक में था। उसने राजा का विश्वास जीतकर छलकपट किया।

बालकाण्डकपटमुनिकालकेतु
रामचरितमानस — बालकाण्ड

प्रतापभानु एक बार शिकार करते हुए कहाँ भटक गये?

शिकार में सूअर का पीछा करते-करते गहरे वन में भटक गये। भूख-प्यास से व्याकुल, पानी बिना बेहाल। वहाँ एक कपटमुनि (कालकेतु — पराजित राजा) का आश्रम मिला — यहीं से प्रतापभानु के पतन की कथा शुरू होती है।

बालकाण्डप्रतापभानुशिकार
रामचरितमानस — बालकाण्ड

प्रतापभानु का मंत्री कौन था?

धर्मरुचि — जो शुक्राचार्य के समान बुद्धिमान् और राजा का हित करने वाला सयाना मन्त्री था। प्रतापभानु का भाई भी बड़ा बलवीर था।

बालकाण्डधर्मरुचिप्रतापभानु
रामचरितमानस — बालकाण्ड

राजा प्रतापभानु कौन थे और कहाँ राज्य करते थे?

प्रतापभानु एक प्रतापी चक्रवर्ती राजा थे जिन्होंने सातों द्वीप जीत लिये। मन्त्री धर्मरुचि शुक्राचार्य समान बुद्धिमान् था। प्रजा सुखी थी। ब्राह्मणों के शाप से वे अगले जन्म में रावण बने।

बालकाण्डप्रतापभानुराजा
रामचरितमानस — बालकाण्ड

मनु-शतरूपा अगले जन्म में कौन बने?

मनु = राजा दशरथ, शतरूपा = माता कौशल्या। भगवान ने 'तुम सम पुत्र' वरदान पूरा करते हुए स्वयं श्रीराम रूप में उनके ज्येष्ठ पुत्र बनकर अयोध्या में जन्म लिया।

बालकाण्डमनु शतरूपादशरथ कौशल्या
रामचरितमानस — बालकाण्ड

भगवान ने मनु-शतरूपा को क्या वरदान दिया?

भगवान ने कहा — 'जो कछु रुचि तुम्हरे मन माहीं। मैं सो दीन्ह सब संसय नाहीं' — तुम्हारी सब इच्छा पूरी की। स्वयं उनके पुत्ररूप में जन्म लेंगे। मनु-शतरूपा = अगले जन्म में दशरथ-कौशल्या, भगवान = श्रीराम।

बालकाण्डभगवान वरदानमनु शतरूपा
रामचरितमानस — बालकाण्ड

'तुम्ह सम पुत्र' — मनु-शतरूपा ने भगवान से कैसा पुत्र माँगा?

'तुम्ह सम पुत्र' = आपके (भगवान के) समान पुत्र। भगवान के समान तो केवल भगवान ही हो सकते हैं — इसलिये भगवान ने स्वयं उनके पुत्ररूप में अवतार लिया। मनु-शतरूपा = अगले जन्म में राजा दशरथ और माता कौशल्या।

बालकाण्डतुम सम पुत्रमनु
रामचरितमानस — बालकाण्ड

मनु-शतरूपा ने भगवान से क्या वरदान माँगा?

मनु-शतरूपा ने 'तुम सम पुत्र' (आपके समान पुत्र) माँगा। शतरूपा ने सुख, गति, भक्ति, चरण-प्रेम, ज्ञान माँगा। मनु ने कहा — पुत्ररूप से आपके चरणों में प्रीति हो। भगवान ने कहा — तुम्हारी सब इच्छा पूरी की, सन्देह मत करो।

बालकाण्डमनु वरदानतुम सम पुत्र
रामचरितमानस — बालकाण्ड

मनु-शतरूपा ने किस स्थान पर तपस्या की?

नैमिषारण्य तीर्थ में, फिर गोमती नदी के किनारे। वहाँ मुनियों ने सब तीर्थ करा दिये। वल्कल वस्त्र धारण करके संत-समाज में नित्य पुराण सुनते और द्वादशाक्षर मन्त्र (ॐ नमो भगवते वासुदेवाय) का जप करते थे।

बालकाण्डमनु शतरूपानैमिषारण्य
रामचरितमानस — बालकाण्ड

मनु और शतरूपा कौन थे?

मनु और शतरूपा ब्रह्माजी की सृष्टि के प्रथम मानव दम्पति (राजा-रानी) थे। बुढ़ापे में विषय-वैराग्य न होने पर दुखी होकर पुत्र को राज्य देकर वनवास गये। नैमिषारण्य तीर्थ में भगवान की तपस्या की।

बालकाण्डमनुशतरूपा
रामचरितमानस — बालकाण्ड

शिवगणों ने नारदजी को कौन सा शाप दिया?

नारदजी ने शिवगणों को शाप दिया (उल्टा नहीं)। शिवगणों ने वानर-मुख पर हँसी की, तो नारदजी ने शाप दिया — 'होहु निसाचर जाइ तुम्ह कपटी पापी दोउ' — तुम दोनों जाकर राक्षस हो जाओ।

बालकाण्डशिवगणनारद शाप
रामचरितमानस — बालकाण्ड

नारदजी के शाप से राम अवतार का क्या सम्बन्ध है?

नारदजी के शाप से भगवान को मनुष्य रूप में जन्म लेना पड़ा और स्त्री-विरह सहना पड़ा — रामावतार में ठीक यही हुआ। पर भगवान ने कहा — यह सब मेरी इच्छा से हुआ, शाप तो बहाना मात्र था।

बालकाण्डनारद शापरामावतार कारण
रामचरितमानस — बालकाण्ड

भगवान ने नारदजी के शाप को कैसे स्वीकार किया?

भगवान ने शाप प्रसन्नतापूर्वक सिर पर चढ़ाया — यह उनकी लीला-योजना का अंश था। नारदजी के पश्चाताप पर कहा — सब मेरी इच्छा से हुआ, चिन्ता मत करो। शंकर शतनाम जपो, शान्ति मिलेगी। 'कोउ नहीं सिव समान प्रिय मोरें' — शिवजी के समान मुझे कोई प्रिय नहीं।

बालकाण्डभगवानशाप स्वीकार
रामचरितमानस — बालकाण्ड

नारदजी ने भगवान को दो शाप दिये — वे क्या थे?

दो शाप — (1) मनुष्य शरीर धारण करना होगा, (2) स्त्री-विरह (पत्नी वियोग) का दुख सहना होगा। भगवान ने प्रसन्नतापूर्वक स्वीकार किया — यही रामावतार की पृष्ठभूमि बनी। भगवान ने कहा — शंकर शतनाम जपो, शान्ति मिलेगी।

बालकाण्डनारद दो शापमनुष्य जन्म
रामचरितमानस — बालकाण्ड

नारदजी ने भगवान विष्णु को क्या शाप दिया?

नारदजी ने भगवान विष्णु को शाप दिया — आपने मेरा उपहास कराया, अतः आपको मनुष्य योनि में जन्म लेना पड़ेगा और स्त्री-विरह सहना पड़ेगा। भगवान ने शाप प्रसन्नतापूर्वक स्वीकार किया और माया हटा ली।

बालकाण्डनारद शापविष्णु

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