विस्तृत उत्तर
मनु-शतरूपा अगले जन्म में राजा दशरथ और माता कौशल्या बने। भगवान ने उनके 'तुम सम पुत्र' (आपके समान पुत्र) के वरदान को पूरा करते हुए स्वयं श्रीरामचन्द्र के रूप में उनके ज्येष्ठ पुत्र बनकर अयोध्या में जन्म लिया।
बालकाण्ड में शिवजी ने पार्वतीजी को बताया कि मनु-शतरूपा की तपस्या और वरदान रामावतार का एक प्रमुख कारण है। भगवान ने स्वयं कहा था — 'जो कछु रुचि तुम्हरे मन माहीं। मैं सो दीन्ह सब संसय नाहीं' — तुम्हारी सब इच्छा पूरी की।
इस प्रकार:
- ▸मनु = राजा दशरथ (अयोध्या के राजा)
- ▸शतरूपा = माता कौशल्या (दशरथ की पटरानी)
- ▸'तुम सम पुत्र' = भगवान श्रीराम (ज्येष्ठ पुत्र)
यह रामावतार के कारणों में से एक महत्वपूर्ण कारण है।





