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भागवत कथा प्रश्नोत्तरी — 68 प्रश्न

शास्त्रों और पुराणों पर आधारित भागवत कथा विषय के प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर — कुल 68 प्रश्न

नाम महिमा एवं भक्ति

अजामिल ने अंतिम क्षण नारायण नाम लेकर कैसे मुक्ति पाई

श्रीमद्भागवत के छठे स्कंध में — अजामिल ने मृत्यु के समय पुत्र-बुलाहट में 'नारायण' पुकारा। विष्णुदूतों ने यमदूतों को रोका क्योंकि नारायण नाम — अनजाने में ही — पाप नष्ट करता है। बाद में भक्ति करके वह वैकुण्ठ गया। यह कथा नाम-शक्ति का सर्वोत्कृष्ट उदाहरण है।

अजामिल कथानारायण नाममुक्ति
श्रीमद्भागवत

भागवत कथा शुकदेव से परीक्षित तक कैसे पहुँची?

शौनकजी कहते हैं कि भगवान शुकदेवजी ने पुण्यमयी भागवत कथा कही और पूछते हैं कि उनका परीक्षित से संवाद कैसे हुआ।

भागवत कथाशुकदेवपरीक्षित
श्रीमद्भागवत

परीक्षित ने भागवत कथा क्यों सुनी?

कारण का पूरा विस्तार आगे की कथा में आता है। शौनकजी पूछते हैं कि शुकदेव और परीक्षित का संवाद कैसे हुआ जिसमें भागवत कही गई।

परीक्षितभागवत कथाशुकदेव
श्रीमद्भागवत

शुकदेव जी कौन थे?

शुकदेवजी व्यासजी के पुत्र, महान योगी, समदर्शी, भेदभावरहित और परमात्मा में स्थित मुनि बताए गए हैं।

शुकदेवव्यास पुत्रयोगी
श्रीमद्भागवत

सूतजी ने भागवत कथा किससे सीखी?

सूतजी शुकदेवजी की भागवत कथा के समय वहाँ बैठे थे और उनकी कृपा से उन्होंने इसका अध्ययन किया।

सूतजीशुकदेवभागवत कथा
श्रीमद्भागवत

शुकदेव जी ने भागवत किसे सुनाई?

शुकदेवजी ने श्रीमद्भागवत राजा परीक्षित को सुनाई, जो गंगातट पर आमरण अनशन का व्रत लेकर बैठे थे।

शुकदेवराजा परीक्षितगंगा तट
श्रीमद्भागवत

आधे क्षण की भागवत कथा सुनने का फल क्या है?

असार संसार में कल्याण के लिये आधे क्षण भी शुककथा का पान करने को कहा गया है; कान में प्रवेश करते ही मुक्ति की बात कही गई है।

आधा क्षणभागवत कथामुक्ति
श्रीमद्भागवत

यमराज वैष्णवों को दंड क्यों नहीं देते?

यमराज अपने दूतों से कहते हैं कि जो भगवान की कथा में मत्त हैं, उनसे दूर रहो; मैं वैष्णवों को दंड नहीं देता।

यमराजवैष्णवभागवत कथा
श्रीमद्भागवत

भागवत कथा भवरोग की औषधि क्यों है?

कलियुग में भागवत कथा भवरोग की रामबाण औषधि, कृष्णप्रिय, पाप-नाशक, मुक्ति का कारण और भक्ति बढ़ाने वाली कही गई है।

भवरोगऔषधिमुक्ति
श्रीमद्भागवत

भागवत कथा दारिद्र्य और दुख में कैसे सहारा देती है?

दारिद्र्य-दुख से जलते, माया से दबे और संसार-सागर में डूबते लोगों के कल्याण के लिये भागवत गरजती है।

दारिद्र्यदुखमाया
श्रीमद्भागवत

भागवत कथा में भगवान कैसे प्रकट होते हैं?

शुकदेवजी के वचन के बीच सभा में प्रह्लाद, बलि, उद्धव और अर्जुन आदि पार्षदों सहित श्रीहरि प्रकट हुए।

भगवान प्रकटभागवत कथाकीर्तन
श्रीमद्भागवत

संतान सुख के लिए भागवत कथा क्यों सुनते हैं?

जिन स्त्रियों को संतान-संबंधी दुख हो, उन्हें प्रयत्नपूर्वक कथा सुनने को कहा गया है; विधिपूर्वक श्रवण से उत्तम फल मिलता है।

संतान सुखभागवत कथास्त्री
श्रीमद्भागवत

रोगी लोग भागवत कथा क्यों सुनें?

धनहीन, क्षयरोगी, अन्य रोगों से पीड़ित, भाग्यहीन, पापी, पुत्रहीन और मोक्ष इच्छुक लोगों को कथा सुनने को कहा गया है।

रोगीभागवत कथाश्रवण
श्रीमद्भागवत

भागवत कथा सुनते समय किनसे बात नहीं करनी चाहिए?

नियम से कथा सुनने वाले को रजस्वला, अंत्यज, म्लेच्छ, पतित, गायत्रीहीन, ब्राह्मणद्वेषी और वेदबाह्य लोगों से बातचीत न करने को कहा गया है।

बातचीतश्रवण नियमभागवत कथा
श्रीमद्भागवत

भागवत कथा में निंदा से क्यों बचना चाहिए?

कथा सुनने वाले को वेद, वैष्णव, ब्राह्मण, गुरु, गौसेवक, स्त्री, राजा और महापुरुषों की निंदा से बचना चाहिए।

निंदाभागवत कथावाणी संयम
श्रीमद्भागवत

भागवत कथा में क्रोध और लोभ क्यों छोड़ें?

कथा सुनने वाले को काम, क्रोध, मद, मान, मत्सर, लोभ, दंभ, मोह और द्वेष को पास नहीं आने देना चाहिए।

क्रोधलोभमन शुद्धि
श्रीमद्भागवत

भागवत कथा में दोपहर का विराम क्यों होता है?

दोपहर में दो घड़ी कथा विराम रखकर उसी प्रसंग के अनुसार वैष्णवों को भगवान के गुणों का कीर्तन करना बताया गया है।

दोपहर विरामकीर्तनभागवत कथा
श्रीमद्भागवत

भागवत कथा किस समय शुरू करनी चाहिए?

कथा सूर्योदय से आरंभ करने और मध्यम स्वर में साढ़े तीन पहर तक सुनाने की बात कही गई है।

कथा समयसूर्योदयभागवत कथा
श्रीमद्भागवत

भागवत कथा रोज कितनी देर सुननी चाहिए?

वक्ता को सूर्योदय से कथा आरंभ कर साढ़े तीन पहर तक मध्यम स्वर में कथा पढ़नी चाहिए, बीच में दो घड़ी विराम है।

कथा समयश्रवणभागवत कथा
श्रीमद्भागवत

भागवत कथा सुनते समय क्या छोड़ना चाहिए?

कथा सुनते समय लोक, धन, घर-पुत्र की चिंता, काम, क्रोध, लोभ, निंदा, अनुचित संग और अशुद्ध आहार छोड़ना चाहिए।

श्रवण नियमत्यागभागवत कथा
श्रीमद्भागवत

भागवत कथा के वक्ता की पूजा क्यों करें?

वक्ता को शुकस्वरूप मानकर पूजते हैं और उससे कथा के प्रकाश से अज्ञान नष्ट करने की प्रार्थना करते हैं।

वक्ता पूजाभागवत कथाशुक स्वरूप
श्रीमद्भागवत

भागवत कथा में भगवान कृष्ण की पूजा कैसे करें?

मंडल में श्रीहरि की स्थापना कर श्रीकृष्ण को लक्ष्य बनाकर मंत्रोच्चार सहित षोडशोपचार पूजा, दक्षिणा और नमस्कार करना बताया गया है।

कृष्ण पूजाषोडशोपचारभागवत कथा
श्रीमद्भागवत

भागवत कथा से पहले पितृ तर्पण क्यों करें?

गणेश पूजा के बाद पितरों का तर्पण और पूर्व पापों की शुद्धि के लिये प्रायश्चित्त करने का निर्देश है।

पितृ तर्पणभागवत कथाप्रायश्चित्त
श्रीमद्भागवत

भागवत कथा में श्रोता किस दिशा में बैठें?

श्रोता वक्ता की दिशा के अनुसार पूर्वमुख या उत्तरमुख बैठें; एक मत से वक्ता और श्रोता दोनों पूर्वमुख भी बैठ सकते हैं।

श्रोतादिशाभागवत कथा

विषय-वार प्रश्नोत्तर

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सनातन धर्म प्रश्नोत्तरी — शास्त्रीय ज्ञान

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