विस्तृत उत्तर
अम्बरीष सुदर्शन स्तोत्र वह प्रार्थना है जो राजा अम्बरीष ने दुर्वासा ऋषि को बचाने के लिए सुदर्शन चक्र से की। श्रीमद्भागवत नवम स्कंध के पंचम अध्याय में इसका वर्णन मिलता है। राजा ने सुदर्शन को भगवान का तेज, धर्मरक्षक और दुष्टनाशक मानकर नमस्कार किया। उन्होंने अपने पुण्य, दान, यज्ञ, ब्राह्मण-सेवा और भगवान के प्रति सत्य भक्ति को प्रमाण बनाकर प्रार्थना की कि दुर्वासा की पीड़ा शांत हो जाए। यह स्तोत्र केवल रक्षा की प्रार्थना नहीं, बल्कि वैष्णव करुणा का प्रमाण है, क्योंकि राजा अपने अपराधी को बचाने की प्रार्थना कर रहे थे।
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