विस्तृत उत्तर
अतल लोक पृथ्वी के आवरण के नीचे स्थित है इसलिए यहाँ सूर्य, चंद्र या अन्य ग्रहीय नक्षत्रों का प्रकाश सीधे नहीं पहुँचता। परंतु इसका अर्थ यह नहीं कि यहाँ अंधेरा रहता है। शिव पुराण, विष्णु पुराण और भागवत पुराण के अनुसार यहाँ प्रकाश का मुख्य स्रोत सूर्य की किरणें नहीं बल्कि महान नागों के फनों पर सुशोभित मणियाँ हैं। श्रीमद्भागवत महापुराण के पंचम स्कंध (5.24.12) में वर्णित है कि अतल और अन्य पातालों में रहने वाले विशाल और श्रेष्ठ सर्पों के फनों पर स्थित मणियाँ अपने तीव्र और शीतल प्रकाश से अतल लोक के संपूर्ण अंधकार को नष्ट कर देती हैं और वहाँ सर्वत्र प्रकाश फैलाती हैं। मणियों का यह प्रकाश इतना दिव्य और आकर्षक होता है कि यहाँ कभी अंधेरा या निराशा प्रतीत नहीं होती।
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