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विस्तृत उत्तर
जनलोक का मूल तत्त्व वायु और आकाश, अर्थात ईथर, का अत्यंत सूक्ष्म और पवित्र मिश्रण बताया गया है। यह तत्त्व चेतना को सदैव ऊर्ध्वमुखी और प्रफुल्लित बनाए रखता है। जनलोक का यह सूक्ष्म स्वरूप इसे पृथ्वी या स्वर्ग जैसे भौतिक लोकों से अलग करता है।
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