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विस्तृत उत्तर
जनलोक विशुद्ध ज्ञानभूमि और ब्रह्म-चिंतन की तपोभूमि है। यहाँ भौतिक भोग-विलास या इंद्रियतृप्ति का कोई स्थान नहीं है। जनलोक के निवासी पूर्ण वैराग्य से युक्त होते हैं और उन्हें किसी भी लोक के किसी भी भोग में आसक्ति नहीं होती। यहाँ का एकमात्र सुख ब्रह्मानंद है, जो पृथ्वी और स्वर्ग के सुखों से करोड़ों गुना अधिक बताया गया है।
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