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विस्तृत उत्तर
महर्लोक से जनलोक की दूरी दो करोड़ योजन बताई गई है। पुराणों में यह दूरी जनलोक की उच्च ब्रह्मांडीय स्थिति को स्पष्ट करती है। महर्लोक से जनलोक के बीच का यह विशाल शून्य केवल योगबल और तपोबल से ही पार किया जा सकता है। स्कंद पुराण में शिव शर्मा की कथा में भी पृथ्वी से महर्लोक और वहाँ से जनलोक की दूरी का उल्लेख मिलता है।
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