विस्तृत उत्तर
जप के दौरान मन में क्या रखें — यह भागवत पुराण और भगवद् गीता में वर्णित है:
भगवद् गीता (9.34)
मन्मना भव मद्भक्तो मद्याजी मां नमस्कुरु।' — मुझमें मन लगाओ, मेरे भक्त बनो।
जप के दौरान सोचें
1मंत्र का अर्थ
प्रत्येक जप के साथ मंत्र का अर्थ मन में:
- ▸'नमः शिवाय' = 'मैं शिव को नमस्कार करता हूँ'
- ▸'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' = 'वासुदेव को प्रणाम'
2देवता का रूप
इष्ट देव का सुंदर स्वरूप — चरण से मुकुट तक। विस्तार से, धीरे-धीरे।
3कृतज्ञता
हे भगवान, आपने मुझे यह जीवन, यह श्वास, यह जप का अवसर दिया — धन्यवाद।
4प्रेम और विरह
नारद भक्ति सूत्र — जब जप में प्रेम और विरह आए — 'आप बिना मैं अधूरा हूँ' — तब जप की ऊंचाई।
5समर्पण
मेरा यह जप, यह संकल्प, यह मन — सब आपको अर्पित।
क्या न सोचें
- ▸कामना और माँगना — बार-बार
- ▸व्यापार, धन, सांसारिक समस्याएं
- ▸जप की संख्या और समय की चिंता
सरलतम भाव
मैं भगवान के सामने हूँ — वे मुझे देख रहे हैं और सुन रहे हैं।





