विस्तृत उत्तर
नैमित्तिक प्रलय (जो ब्रह्मा के एक दिन अर्थात एक कल्प की समाप्ति पर होती है) में ब्रह्माण्ड के निचले लोक भूर्लोक, भुवर्लोक और स्वर्लोक पूर्णतया नष्ट हो जाते हैं और जलमग्न हो जाते हैं। उस भीषण ताप और जल-प्लावन के कारण महर्लोक के निवासी जनलोक की ओर पलायन कर जाते हैं। किन्तु जनलोक, तपोलोक और सत्यलोक इस नैमित्तिक प्रलय के भीषण प्रभाव से पूर्णतः अछूते रहते हैं। इन उच्च लोकों के निवासी जो भगवान की अहैतुकी भक्ति में लीन होते हैं वे शान्तिपूर्वक अपना निवास बनाये रखते हैं। जब प्रलय की अग्नि संकर्षण के मुख से निकलकर ब्रह्माण्ड को भस्म करती है तो कई योगी अपने योग बल से सत्यलोक की ओर सुरक्षित पलायन कर जाते हैं।
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