विस्तृत उत्तर
राजा दशरथ की तीन रानियाँ थीं — कौशल्या (पटरानी, रामजी की माता), सुमित्रा (लक्ष्मण-शत्रुघ्न की माता) और कैकेयी (भरतजी की माता)।
दोहा — 'कौसल्यादि नारि प्रिय सब आचरन पुनीत। पति अनुकूल प्रेम दृढ़ हरि पद कमल बिनीत॥'
अर्थ — कौसल्या आदि प्रिय रानियाँ सभी पवित्र आचरणवाली, विनीत और पतिके अनुकूल थीं और श्रीहरिके चरणकमलोंमें उनका दृढ़ प्रेम था।





