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विस्तृत उत्तर
सपिण्डीकरण बारहवें या तेरहवें दिन किया जाने वाला सबसे महत्वपूर्ण शास्त्रीय कृत्य है। दसवें दिन पिण्डज शरीर पूर्ण हो जाता है। ग्यारहवें और बारहवें दिन प्रेत को अन्न, जल और दीपदान से तृप्त किया जाता है। इसके बाद बारहवें या तेरहवें दिन सपिण्डीकरण किया जाता है, जिसमें प्रेत के पिण्ड को उसके पूर्वजों के पिण्डों के साथ मिलाया जाता है। इस कृत्य के संपन्न होते ही प्रेतत्व का अंत हो जाता है।
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