विस्तृत उत्तर
श्राद्ध के बीच क्रोध, विवाद, लोभ या अश्रद्धा होने पर पितृ देवता लौट जाते हैं और श्राद्ध अपूर्ण रह जाता है। दूषित भाव से किए गए श्राद्ध का फल असुर हर लेते हैं।
श्राद्ध में क्रोध क्यों नहीं करना चाहिए को संदर्भ सहित समझें
श्राद्ध में क्रोध क्यों नहीं करना चाहिए का सबसे सीधा सार यह है: क्रोध और विवाद से श्राद्ध अपूर्ण हो जाता है।
लोक जैसे विषयों में यह देखना जरूरी होता है कि बात किस परिस्थिति में लागू होती है, किन नियमों के साथ मान्य होती है और व्यवहार में इसका सही अर्थ क्या निकलता है.
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इसी विषय के 5 प्रश्न
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नवग्रह यंत्र कैसे स्थापित करें?
शुक्ल पक्ष रविवार/नवरात्रि। पूर्व/ईशान दिशा, लाल कपड़ा, पंचामृत+गंगाजल शुद्धि, 'ब्रह्मा मुरारि त्रिपुरांतकारी...' 108 बार। प्रतिदिन धूप-दीप। 9 ग्रह एक साथ शांत। प्रामाणिक यंत्र+नित्य पूजा अनिवार्य।
लिंगाष्टकम का पाठ करने की विधि और नियम क्या हैं?
शंकराचार्य रचित 8 श्लोक — शिवलिंग महिमा। शिवलिंग समक्ष, दीपक जलाकर, शुद्ध उच्चारण से पाठ। सोमवार/शिवरात्रि/सावन में विशेष। 1-3-11 बार। अज्ञान नाश, मोक्ष प्राप्ति, शिव कृपा।
शिव अर्चना में षोडशोपचार पूजा कैसे करें?
16 उपचार: आवाहन→आसन→पाद्य→अर्घ्य→आचमन→स्नान→वस्त्र→गंध→पुष्प→धूप→दीप→नैवेद्य→ताम्बूल→दक्षिणा→आरती→प्रदक्षिणा+विसर्जन। मंत्र: 'ॐ नमः शिवाय [उपचार]म् समर्पयामि।' संक्षिप्त: पंचोपचार (5)।
दक्षिण भारत के मंदिरों में कुंभाभिषेक की विधि उत्तर भारत से कैसे भिन्न है?
दक्षिण: अनिवार्य, 45-48 दिन, 1008 कलश, आगम, 12 वर्ष, भव्य। उत्तर: कम, 1-7 दिन, 108 कलश, पुराण, 'प्राण प्रतिष्ठा' शब्द। दक्षिण = शिखर, उत्तर = मूर्ति।
ललिता सहस्रनाम का पाठ कब और कैसे करें?
ब्रह्माण्ड पुराण — 1000 नाम। शुक्रवार/नवरात्रि/प्रतिदिन। लाल वस्त्र, श्री चक्र समक्ष, कुमकुम, कमल। 'ॐ [नाम] नमः'। ~45-60 मिनट। महिलाओं हेतु विशेष शुभ।
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