विस्तृत उत्तर
तंत्र साधना से मोक्ष का मार्ग तंत्रालोक और महानिर्वाण तंत्र में वर्णित है:
कुलार्णव
जीवन्मुक्तस्तु योगीन्द्रो यत्किंचित् कुरुतेऽवनौ। सर्वं शिवमयं पश्येत् तंत्रसिद्धांतमार्गतः।
— जो सर्वत्र शिव देखता है — वह जीवन्मुक्त है।
तंत्र में मोक्ष के तीन मार्ग
1शक्तिपात मार्ग
tंत्रालोक: गुरु की तीव्र शक्तिपात दीक्षा से तत्काल मोक्ष — दुर्लभ किंतु संभव।
2क्रमिक साधना मार्ग
मंत्र → पूजा → ध्यान → कुंडलिनी जागरण → सहस्रार में शिव-शक्ति मिलन = मोक्ष।
3प्रत्यभिज्ञा मार्ग (ज्ञान)
अहमेव शिवः' — मैं ही शिव हूँ — यह ज्ञान = तत्काल मोक्ष। अभिनवगुप्त के अनुसार यह उच्चतम।
जीवन्मुक्त का स्वरूप
- ▸देह में रहते हुए मुक्त
- ▸भय-राग-द्वेष से रहित
- ▸सर्वत्र शिव का दर्शन
- ▸क्रिया करते हुए अकर्ता
महानिर्वाण तंत्र
भुक्त्वा भोगान् यथाकामं मोक्षमाप्नोति तांत्रिकः।' — यथेच्छ भोगों को भोगकर भी तांत्रिक मोक्ष पाता है।





