विस्तृत उत्तर
कथा प्रचलित है कि गोस्वामी तुलसीदासजी ने पहले संस्कृत में रामकथा लिखनी शुरू की, लेकिन दिन में जितना भी लिखते, रात को वह सब लुप्त हो जाता। यह सिलसिला कई दिनों तक चला।
तब भगवान शिवजी ने स्वप्न में प्रकट होकर आदेश दिया — 'तुम अपनी मातृभाषा (अवधी) में काव्य रचना करो, संस्कृत में नहीं — ताकि जनसामान्य भी रामकथा का लाभ उठा सके।'
बालकाण्ड में तुलसीदासजी ने स्वयं कहा — 'संभु प्रसाद सुमति हियँ हुलसी। रामचरितमानस कबि तुलसी॥' अर्थ — श्रीशिवजीकी कृपासे उसके हृदयमें सुन्दर बुद्धिका विकास हुआ, जिससे यह तुलसीदास श्रीरामचरितमानसका कवि हुआ।
इसका तात्पर्य — शिवजी की प्रेरणा और आज्ञा से ही तुलसीदासजी ने जनभाषा अवधी में लिखा, जिसके कारण यह ग्रन्थ गरीब-अमीर, शिक्षित-अशिक्षित सभी के लिये सुलभ हो गया।





