विस्तृत उत्तर
विश्वमोहिनी भगवान विष्णु की माया से रची गयी एक अत्यन्त सुन्दर राजकुमारी थी जो नारदजी का अभिमान तोड़ने के लिये प्रकट हुई।
बालकाण्ड में कहा — वह सब गुणोंकी खान भगवान्की माया ही थी। उसकी शोभाका वर्णन कैसे किया जा सकता है। वह राजकुमारी स्वयंवर करना चाहती थी।
राजकुमारी के लक्षण इतने अद्भुत थे कि नारदजी ने मन में सोचा — जो इसे ब्याहेगा, वह अमर हो जायगा और रणभूमिमें कोई उसे जीत न सकेगा। यह शीलनिधिकी कन्या जिसको वरेगी, सब चर-अचर जीव उसकी सेवा करेंगे।
इसीलिये नारदजी को वह कन्या पाने की तीव्र इच्छा हुई और वे भगवान विष्णु के पास सुन्दर रूप माँगने गये।





