विस्तृत उत्तर
विष्णु ने दुर्वासा से कहा कि वे अपने भक्तों के अधीन हैं। उन्होंने प्रसिद्ध वचन अहं भक्तपराधीनो कहा, जिसका अर्थ है कि भगवान अपने प्रेमी भक्तों के प्रेम से बंध जाते हैं। भगवान ने समझाया कि उनके भक्त अपना घर, धन, परिवार और जीवन तक भगवान को समर्पित कर देते हैं, इसलिए भगवान उन्हें कभी नहीं छोड़ते। दुर्वासा ने अम्बरीष जैसे निष्कपट भक्त का अनिष्ट चाहा था, इसलिए यह वैष्णव अपराध था। भगवान ने स्पष्ट कहा कि वे स्वयं दुर्वासा को नहीं बचा सकते; उन्हें अम्बरीष के पास जाकर क्षमा माँगनी होगी।
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