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विस्तृत उत्तर
वितल लोक में अंधेरा इसलिए नहीं होता क्योंकि वहाँ महान और शक्तिशाली नागों के फनों पर स्थित दिव्य मणियाँ पूरे लोक को प्रकाशित करती हैं। वितल लोक पृथ्वी के नीचे है और सूर्य-चंद्र की रश्मियाँ वहाँ सीधे नहीं पहुँचतीं। फिर भी यह अंधकारमय नहीं है। श्रीमद्भागवत पुराण के अनुसार वितल लोक सहित सभी बिल-स्वर्गों में प्रकाश की व्यवस्था स्वयंप्रकाशित है। नागों के फनों की बहुमूल्य और दिव्य मणियों की दैवीय रश्मियों से पूरा वितल लोक निरंतर जगमगाता रहता है।
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