विस्तृत उत्तर
वितल लोक में ईश्वर की सत्ता भगवान शिव के हाटकेश्वर रूप से दिखती है। यह लोक असुरों, दानवों और मायावी शक्तियों का निवास है, फिर भी वहाँ देवाधिदेव महादेव हाटकेश्वर रूप में माता भवानी के साथ विराजमान हैं। उनकी दिव्य शक्ति से हाटकी नदी और हाटक स्वर्ण की उत्पत्ति होती है। असुरों के इस लोक में शिव की उपस्थिति प्रमाणित करती है कि ब्रह्मांड का कोई भी कोना, चाहे वह भौतिकता और तमोगुण से भरा क्यों न हो, ईश्वर की सत्ता और नियंत्रण शक्ति से मुक्त नहीं है। वितल लोक यह बताता है कि गहनतम भौतिकता और भोग के क्षेत्र में भी ईश्वर की शक्ति का संचार होता है।
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