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बालकाण्ड प्रश्नोत्तरी — 321 प्रश्न

शास्त्रों और पुराणों पर आधारित बालकाण्ड विषय के प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर — कुल 321 प्रश्न

रामचरितमानस — बालकाण्ड

नारदजी हिमवान के घर क्यों आये?

नारदजी ने पार्वतीजी के जन्म के समाचार सुनकर कौतुकवश हिमवान के घर आये। पर्वतराज ने बड़ा आदर किया। नारदजी ने पार्वतीजी का हाथ देखकर भविष्यवाणी की और शिवजी प्राप्ति के लिये तपस्या का उपाय बताया।

बालकाण्डनारदजीहिमवान
रामचरितमानस — बालकाण्ड

पार्वतीजी का बचपन का क्या वर्णन है बालकाण्ड में?

नारदजी ने कहा — पार्वतीजी सब गुणों की खान हैं, स्वभाव से सुन्दर, सुशील और सयानी। सब सुलक्षणों से सम्पन्न, पति को सदा प्यारी होंगी, सुहाग अचल रहेगा। सारे जगत में पूज्य होंगी। नाम — उमा, अम्बिका, भवानी।

बालकाण्डपार्वती बचपनउमा
रामचरितमानस — बालकाण्ड

हिमवान कौन हैं और उनकी पत्नी का क्या नाम है?

हिमवान (हिमालय) पर्वतों के राजा हैं — मानस में 'सैलराज', 'गिरिराज', 'हिमाचल' कहा गया। उनकी पत्नी का नाम मैना (मैनावती) है। इन्हीं के घर सतीजी ने पार्वती रूप में पुनर्जन्म लिया।

बालकाण्डहिमवानमैना
रामचरितमानस — बालकाण्ड

सतीजी ने पुनर्जन्म किसके घर लिया?

सतीजी ने हिमवान (हिमालय/पर्वतराज) के घर माता मैना की कोख से पार्वती के रूप में पुनर्जन्म लिया। नारदजी ने उनका नाम बताया — उमा, अम्बिका, भवानी — और कहा कि ये सब गुणों की खान हैं।

बालकाण्डपार्वती जन्महिमवान
रामचरितमानस — बालकाण्ड

सतीजी के देहत्याग के बाद शिवजी ने क्या किया?

शिवगण दक्ष यज्ञ को नष्ट करने लगे। 'सती मरनु सुनि संभु गन लगे करन मख खीस।' मुनि भृगु ने यज्ञ की रक्षा की। मानस में यह प्रसंग संक्षिप्त है — विस्तार शिव पुराण में है। इसके बाद सीधे पार्वती जन्म की कथा आती है।

बालकाण्डशिवगणदक्ष यज्ञ विध्वंस
रामचरितमानस — बालकाण्ड

'योगाग्नि' से शरीर त्यागने का क्या अर्थ है?

'योगाग्नि' = योगशक्ति से प्रकट आन्तरिक दिव्य अग्नि। यह बाहरी आग नहीं, बल्कि प्राणशक्ति और योगसाधना से शरीर के भीतर अग्नि तत्व जाग्रत करना है। यह इच्छामृत्यु का उच्चतम रूप है जो केवल सिद्ध योगी कर सकते हैं।

बालकाण्डयोगाग्निअर्थ
रामचरितमानस — बालकाण्ड

सतीजी ने किस प्रकार अपना शरीर त्यागा?

सतीजी ने योगाग्नि (योगशक्ति से प्रकट आन्तरिक अग्नि) से शरीर त्यागा — बाहरी अग्नि में नहीं कूदीं। शिवजी को हृदय में धारण करके अपनी योगशक्ति से शरीर भस्म कर डाला।

बालकाण्डयोगाग्निसती देहत्याग
रामचरितमानस — बालकाण्ड

सतीजी ने दक्ष यज्ञ में अपमान सहकर क्या किया?

सतीजी ने शिवजी को हृदय में धारण करके योगाग्नि से अपना शरीर भस्म कर डाला। 'अस कहि जोग अगिनि तनु जारा। भयउ सकल मख हाहाकारा॥' — सारी यज्ञशाला में हाहाकार मच गया।

बालकाण्डसती देहत्यागयोगाग्नि
रामचरितमानस — बालकाण्ड

दक्ष प्रजापति ने शिवजी की निन्दा क्या कहकर की?

दक्ष ब्रह्मसभा से शिवजी पर नाराज़ थे और यज्ञ में उनकी निन्दा की। सतीजी ने सभा को चेतावनी दी — जिन्होंने शिवनिन्दा की या सुनी, उन सबको तुरन्त फल मिलेगा और पिता दक्ष भी पछतायेंगे।

बालकाण्डदक्षशिव निन्दा
रामचरितमानस — बालकाण्ड

दक्ष यज्ञ में सतीजी का क्या अपमान हुआ?

दक्ष ने सतीजी का कोई आदर नहीं किया और सभा में शिवजी की खुलकर निन्दा की। यज्ञ में शिवजी का कोई भाग नहीं रखा गया। सतीजी से यह अपमान सहा नहीं गया और उन्होंने क्रोध में सभा को डाँटा।

बालकाण्डसती अपमानदक्ष यज्ञ
रामचरितमानस — बालकाण्ड

शिवजी ने सतीजी को दक्ष यज्ञ में जाने से क्यों रोका?

तीन कारण — (1) न्योता नहीं आया — बिना बुलाये जाना अशोभनीय, (2) दक्ष का पुराना वैर — ब्रह्मसभा से शिवजी पर नाराज़, (3) 'रहइ न सीलु सनेहु न कानी' — बिना बुलाये जाने पर शील, स्नेह और मर्यादा सब नष्ट होगी।

बालकाण्डशिवजी चेतावनीदक्ष वैर
रामचरितमानस — बालकाण्ड

सतीजी दक्ष यज्ञ में जाने की जिद क्यों कर रही थीं?

सतीजी ने आकाश में विमान जाते देखे और शिवजी से पूछा। पता चला कि पिता दक्ष के यज्ञ में सब जा रहे हैं। शिवजी द्वारा त्यागे जाने का भारी दुख था, पिता के घर जाने का बहाना मिला। उन्होंने कहा — 'पिता भवन उत्सव परम जौं प्रभु आयसु होइ।'

बालकाण्डसतीदक्ष यज्ञ
रामचरितमानस — बालकाण्ड

दक्ष प्रजापति ने यज्ञ में किसको नहीं बुलाया?

दक्ष प्रजापति ने शिवजी और सतीजी को नहीं बुलाया। दक्ष ने सब पुत्रियों को बुलाया पर शिवजी से वैर के कारण सतीजी को भुला दिया। शिवजी ने सतीजी को बिना बुलाये जाने से मना किया।

बालकाण्डदक्ष यज्ञशिव अपमान
रामचरितमानस — बालकाण्ड

सतीजी ने शिवजी की समाधि के दौरान क्या किया?

सतीजी कैलास पर रहती थीं, मन में बड़ा दुख था। 'जुग सम दिवस सिराहिं' — एक-एक दिन युग समान बीतता था। वे सोचती थीं कि मैंने रघुपति का अपमान किया और पति के वचन झूठ माने — उसका फल मिल रहा है। इस रहस्य को कोई नहीं जानता था।

बालकाण्डसतीकैलास
रामचरितमानस — बालकाण्ड

शिवजी ने सतीजी का त्याग करने के बाद कितने वर्ष तक समाधि लगाई?

शिवजी ने कैलास पर बड़ के पेड़ के नीचे पद्मासन लगाकर 'अखण्ड अपार' समाधि लगाई। सटीक वर्ष संख्या मानस में नहीं है, पर 'अखण्ड अपार' से बहुत लम्बी अवधि ध्वनित होती है। सतीजी के लिये एक-एक दिन युग समान बीतता था।

बालकाण्डशिवजी समाधिअखण्ड
रामचरितमानस — बालकाण्ड

सतीजी के सीता रूप धारण करने पर लक्ष्मणजी ने क्या किया?

लक्ष्मणजी सतीजी का बनावटी सीता वेष देखकर चकित हो गये, हृदय में भ्रम हुआ। वे बहुत गम्भीर हो गये, कुछ कह नहीं सके — क्योंकि धीरबुद्धि लक्ष्मणजी प्रभु रघुनाथजी के प्रभाव को जानते थे।

बालकाण्डलक्ष्मणसती सीता रूप
रामचरितमानस — बालकाण्ड

'जलु पय सरिस बिकाइ देखहु प्रीति कि रीति भलि' — इस सोरठा का क्या अर्थ है?

अर्थ — प्रेम की सुन्दर रीति देखो कि जल भी दूध के साथ मिलकर दूध के भाव बिकता है। लेकिन कपटरूपी खटाई पड़ते ही दूध फट जाता है और पानी अलग हो जाता है। तात्पर्य — सतीजी के कपट (सीता रूप) ने शिवजी के प्रेम-बन्धन को तोड़ दिया।

बालकाण्डसोरठाप्रीति रीति
रामचरितमानस — बालकाण्ड

शिवजी ने सतीजी का मानसिक त्याग क्यों किया?

दो कारण — (1) सीताजी जगन्माता हैं, उनका रूप धारण करने वाली से पति-भाव रखना भक्तिमार्ग के विरुद्ध है, (2) शिवजी ने कहा 'मिटइ भगति पथु होइ अनीती' — भक्तिमार्ग नष्ट हो जायेगा। सतीजी पवित्र थीं इसलिये प्रकट में कुछ नहीं कहा, बस मन में त्याग किया।

बालकाण्डशिव त्याग कारणसीता रूप
रामचरितमानस — बालकाण्ड

सतीजी द्वारा सीता रूप धारण करने के बाद शिवजी ने क्या निर्णय लिया?

शिवजी ने मन-ही-मन सतीजी का पत्नी रूप में त्याग करने का संकल्प किया — 'एहिं तन सतिहि भेट मोहि नाहीं।' कारण — सतीजी ने सीता रूप धारा, अतः शिवजी की दृष्टि में वे माता समान हो गयीं। प्रकट में कुछ नहीं कहा पर हृदय में बड़ा सन्ताप था।

बालकाण्डशिव त्यागसती
रामचरितमानस — बालकाण्ड

श्रीरामजी ने सतीजी को सीता रूप में पहचान लिया तो क्या कहा?

सर्वज्ञ भगवान ने सतीजी का कपट तुरन्त जान लिया। हाथ जोड़कर प्रणाम किया, पितासहित अपना नाम बताया और पूछा — 'वृषकेतु (शिवजी) कहाँ हैं? आप वन में अकेली क्यों फिर रही हैं?' — यह सुनकर सतीजी को अत्यन्त लज्जा और संकोच हुआ।

बालकाण्डराम सर्वज्ञसती परीक्षा
रामचरितमानस — बालकाण्ड

सतीजी ने श्रीराम की परीक्षा लेने के लिये किसका रूप धारण किया?

सतीजी ने माता सीताजी का रूप धारण किया। दोहा — 'पुनि पुनि हृदयँ बिचारु करि धरि सीता कर रूप।' सतीजी ने सोचा कि यदि ये सचमुच परब्रह्म हैं तो सीता रूप पहचान लेंगे।

बालकाण्डसतीसीता रूप
रामचरितमानस — बालकाण्ड

शिवजी ने सतीजी को राम की परीक्षा लेने से क्यों मना किया?

शिवजी ने कहा — ये मेरे इष्टदेव श्रीरघुवीर हैं, तर्क मत करो। 'होइहि सोइ जो राम रचि राखा' — जो राम ने रचा है वही होगा। शिवजी जानते थे कि परब्रह्म की परीक्षा लेना अनुचित है और इसका परिणाम बुरा होगा, इसलिये मना किया।

बालकाण्डशिव चेतावनीसती
रामचरितमानस — बालकाण्ड

सतीजी को शिवजी के प्रणाम करने पर क्या संदेह हुआ?

सतीजी को दो संदेह हुए — (1) सर्वव्यापक, मायारहित परब्रह्म मनुष्य कैसे बन सकता है? (2) सर्वज्ञ भगवान अज्ञानी की तरह पत्नी को क्यों खोजेंगे? उन्हें लगा कि शिवजी ने साधारण राजपुत्र को व्यर्थ प्रणाम किया।

बालकाण्डसती संदेहराम परीक्षा
रामचरितमानस — बालकाण्ड

शिवजी ने श्रीरामजी को देखकर कैसे प्रणाम किया?

शिवजी ने 'सच्चिदानन्द परमधाम' कहकर हृदय से प्रणाम किया। सतीजी से कहा — 'सोइ मम इष्टदेव रघुबीरा' — ये वही मेरे इष्टदेव श्रीरघुवीर हैं जिनकी कथा अगस्त्य ऋषि ने गाई और जिनकी सेवा ज्ञानी मुनि सदा करते हैं।

बालकाण्डशिवजी प्रणामसीय राममय

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