विस्तृत उत्तर
सतीजी ने पुनर्जन्म हिमवान (हिमालय/पर्वतराज) के घर माता मैना की कोख से पार्वती के रूप में लिया।
बालकाण्ड में कहा — पार्वतीजी के घर आ जानेसे पर्वत ऐसा शोभायमान हो रहा है जैसा रामभक्तिको पाकर भक्त शोभायमान होता है। उस (पर्वतराज) के घर नित्य नये-नये मंगलोत्सव होते हैं।
नारदजी ने सब समाचार सुनकर हिमाचल के घर पधारे — 'नारद समाचार सब पाए। कौतुकहीं गिरि गेह सिधाए। सैलराज बड़ आदर कीन्हा। पद पखारि बर आसनु दीन्हा॥'
अर्थ — जब नारदजीने ये सब समाचार सुने तो वे कौतुकहीसे हिमाचलके घर पधारे। पर्वतराजने उनका बड़ा आदर किया और चरण धोकर उत्तम आसन दिया।
नारदजी ने पार्वतीजी का हाथ देखकर कहा — 'सुता तुम्हारि सकल गुन खानी। सुंदर सहज सुसील सयानी। नाम उमा अंबिका भवानी॥' — तुम्हारी कन्या सब गुणोंकी खान है, स्वभावसे ही सुन्दर, सुशील और समझदार है। इसके नाम उमा, अम्बिका और भवानी हैं।
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