ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण

बालकाण्ड प्रश्नोत्तरी — 321 प्रश्न

शास्त्रों और पुराणों पर आधारित बालकाण्ड विषय के प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर — कुल 321 प्रश्न

रामचरितमानस — बालकाण्ड

शिवजी ने सती से राम को देखकर क्या कहा?

शिवजी ने श्रीरामजी को देखकर 'सच्चिदानन्द परमधाम' कहकर प्रणाम किया और उनकी शोभा में इतने मग्न हो गये कि हृदय में प्रीति रोकने से भी नहीं रुकती। इसी पर सतीजी को संदेह हुआ।

बालकाण्डशिवजीराम दर्शन
रामचरितमानस — बालकाण्ड

रामचरितमानस में सती और शिवजी कहाँ जा रहे थे जब उन्होंने श्रीराम को देखा?

शिवजी अगस्त्य मुनि के आश्रम से रामकथा सुनकर सतीजी के साथ कैलास लौट रहे थे। मार्ग में उन्हें भगवान श्रीराम दण्डकवन में वनवासी वेष में सीताजी की खोज करते दिखे।

बालकाण्डसतीशिवजी
रामचरितमानस — बालकाण्ड

याज्ञवल्क्यजी ने भरद्वाजजी को वही कथा सुनाई जो किसने किसको सुनाई थी?

वही कथा जो भगवान शिवजी ने माता पार्वतीजी को सुनाई थी। कथा-परम्परा: शिवजी → पार्वतीजी → अगस्त्यजी → याज्ञवल्क्यजी → भरद्वाजजी। इसीलिये मानस की मूल कथाधारा शिव-पार्वती संवाद है।

बालकाण्डकथा परम्पराशिव-पार्वती
रामचरितमानस — बालकाण्ड

भरद्वाजजी ने रामकथा सुनने की इच्छा क्यों प्रकट की?

भरद्वाजजी के मन में संदेह था — राम दशरथ के पुत्र हैं या परब्रह्म जिन्हें शिवजी जपते हैं? उन्होंने कहा कि गुरु से छिपाव करने से ज्ञान नहीं होता, इसलिये अपना अज्ञान प्रकट करके कृपानिधान से सत्य जानना चाहते हैं।

बालकाण्डभरद्वाजरामकथा
रामचरितमानस — बालकाण्ड

भरद्वाजजी का आश्रम कहाँ था?

प्रयाग (प्रयागराज) में — गंगा-यमुना-सरस्वती के त्रिवेणी संगम के निकट। माघ मेले में ऋषि-मुनि उनके आश्रम में एकत्र होते थे।

बालकाण्डभरद्वाजआश्रम
रामचरितमानस — बालकाण्ड

प्रयाग तीर्थराज में माघ मेले का क्या महत्व बताया गया रामचरितमानस में?

तुलसीदासजी ने संत-समाज को चलता-फिरता तीर्थराज प्रयाग कहा। रामभक्ति = गंगा, ब्रह्मविचार = सरस्वती, कर्मकथा = यमुना। यह तीर्थराज अलौकिक है और तत्काल फल देने वाला है।

बालकाण्डप्रयागमाघ मेला
रामचरितमानस — बालकाण्ड

याज्ञवल्क्यजी और भरद्वाजजी का मिलन किस अवसर पर हुआ?

माघ मेले (मकर स्नान) के अवसर पर प्रयाग में। हर वर्ष माघ महीने में मुनिगण प्रयाग आकर स्नान करते और लौट जाते। एक बार भरद्वाजजी ने याज्ञवल्क्यजी के चरण पकड़कर उन्हें रोक लिया।

बालकाण्डमाघ मेलाप्रयाग
रामचरितमानस — बालकाण्ड

मुनि भरद्वाज ने याज्ञवल्क्यजी से क्या प्रश्न किया?

भरद्वाजजी ने पूछा — 'राम कौन हैं? वे अवधेश दशरथ के कुमार जिन्होंने सीता विरह में दुख उठाया और रावण को मारा — वही राम हैं या कोई और परब्रह्म जिनको शिवजी जपते हैं? कृपया विचारकर बताइये।'

बालकाण्डभरद्वाज प्रश्नराम कौन
रामचरितमानस — बालकाण्ड

रामचरितमानस में याज्ञवल्क्य-भरद्वाज संवाद कहाँ हुआ?

तीर्थराज प्रयाग (प्रयागराज) में, भरद्वाजजी के आश्रम में। माघ मेले के अवसर पर मुनि एकत्र होते थे — एक बार स्नान के बाद भरद्वाजजी ने याज्ञवल्क्यजी को रोककर रामकथा सुनने की प्रार्थना की।

बालकाण्डयाज्ञवल्क्यभरद्वाज
रामचरितमानस — बालकाण्ड

'कलपभेद हरिचरित सुहाए। भाँति अनेक मुनीसन्ह गाए' — इसका क्या मतलब है?

अर्थ — हर कल्प (ब्रह्मा के दिन) में भगवान की लीला भिन्न होती है, इसलिये मुनियों ने अनेक प्रकार से हरिचरित गाये हैं। इसमें संदेह न करें, प्रेमसे सुनें। वाल्मीकि, तुलसी आदि की रामकथाओं में अन्तर इसी कल्पभेद के कारण है।

बालकाण्डकल्पभेदहरिचरित
रामचरितमानस — बालकाण्ड

रामकथा को 'सौ करोड़ अपारा' क्यों कहा गया?

'नाना भाँति राम अवतारा। रामायन सत कोटि अपारा॥' — भगवान राम अनन्त अवतार लेते हैं, हर कल्प में भिन्न-भिन्न लीला होती है, इसलिये रामायणें सौ करोड़ और उससे भी अपार (अनगिनत) हैं। राम अनन्त, गुण अनन्त, कथा विस्तार असीम।

बालकाण्डरामकथा अनन्तसत कोटि
रामचरितमानस — बालकाण्ड

मानस सरोवर की उपमा में सात काण्डों को किन सात सीढ़ियों से तुलना की गई?

सात काण्ड = सात सोपान (सीढ़ियाँ)। चौपाई — 'सप्त प्रबंध सुभग सोपाना। ग्यान नयन निरखत मन माना॥' अर्थ — सात काण्ड इस मानस-सरोवर की सुन्दर सात सीढ़ियाँ हैं जिन्हें ज्ञानरूपी नेत्रों से देखते ही मन प्रसन्न हो जाता है।

बालकाण्डसात सोपानसात काण्ड
रामचरितमानस — बालकाण्ड

तुलसीदासजी ने मानस की तुलना किस सरोवर से की है?

रामचरितमानस की तुलना पवित्र मानसरोवर से की — चार संवाद = चार घाट, सात काण्ड = सात सीढ़ियाँ (सोपान), राम-सीता यश = अमृत जल, चौपाइयाँ = पुरइन (कमलिनी), छन्द-दोहा = कमल।

बालकाण्डमानस सरोवरउपमा
रामचरितमानस — बालकाण्ड

रामचरितमानस का नामकरण 'मानस' क्यों किया गया?

शिवजी ने इस कथा को अपने मन (मानस) में रचकर रखा था, इसीलिये प्रसन्न होकर इसका नाम 'रामचरितमानस' रखा। 'मानस' के दो अर्थ — (1) मन (शिवजी का मन), (2) पवित्र सरोवर (रामचरित का मानसरोवर)।

बालकाण्डमानस नामकरणशिवजी
रामचरितमानस — बालकाण्ड

तुलसीदासजी ने संस्कृत में क्यों नहीं लिखा — क्या कारण था?

कथा है कि संस्कृत में लिखा तो रात को सब लुप्त हो जाता। शिवजी ने स्वप्न में जनभाषा में लिखने का आदेश दिया। तुलसीदासजी ने कहा — 'संभु प्रसाद सुमति हियँ हुलसी' — शिवजी की कृपा से ही वे इस ग्रन्थ के कवि बने।

बालकाण्डअवधीशिव आदेश
रामचरितमानस — बालकाण्ड

रामचरितमानस किस भाषा में लिखी गई?

अवधी भाषा में। तुलसीदासजी ने श्लोक 7 में कहा — 'भाषानिबन्धमतिमञ्जुलमातनोति' अर्थात् रघुनाथजी की कथा को मनोहर भाषारचना में विस्तृत करता है। कथा है कि शिवजी ने स्वप्न में जनभाषा में लिखने का आदेश दिया।

बालकाण्डअवधी भाषातुलसीदास
रामचरितमानस — बालकाण्ड

रामचरितमानस की रचना किस तिथि को पूरी हुई?

संवत् 1633 (1576 ई.) मार्गशीर्ष शुक्लपक्ष में राम विवाह के दिन पूरी हुई। आरम्भ रामनवमी (जन्म) के दिन और समाप्ति राम विवाह के दिन — कुल 2 वर्ष 7 माह 26 दिन।

बालकाण्डरचना समाप्तिसंवत 1633
रामचरितमानस — बालकाण्ड

'रामचरितमानस एहि नामा। सुनत श्रवन पाइअ बिश्रामा' — इसका अर्थ क्या है?

अर्थ — इसका नाम 'रामचरितमानस' है, जिसके कानों से सुनते ही शान्ति (विश्राम) मिलती है। विषय-तापसे जलता मनरूपी हाथी इस मानसरूपी सरोवर में आकर सुखी हो जाता है।

बालकाण्डमानस नामकरणचौपाई
रामचरितमानस — बालकाण्ड

रामचरितमानस को पूरा होने में कितना समय लगा?

2 वर्ष 7 महीने 26 दिन। आरम्भ — संवत् 1631 चैत्र शुक्ल नवमी (रामनवमी) अयोध्या में। समाप्ति — संवत् 1633 मार्गशीर्ष शुक्लपक्ष, राम विवाह के दिन। अन्त में काशी में भगवान विश्वनाथ के समक्ष समर्पित किया गया।

बालकाण्डरचना कालतुलसीदास
रामचरितमानस — बालकाण्ड

रामचरितमानस की रचना किस स्थान पर शुरू हुई?

रामचरितमानस की रचना अयोध्या (अवधपुरी) में शुरू हुई — 'अवधपुरीं यह चरित प्रकासा।' तुलसीदासजी ने श्रीराम की जन्मभूमि को ही रचना का आरम्भ स्थान चुना। कुछ भाग काशी में भी लिखा गया।

बालकाण्डअयोध्यारचना स्थान
रामचरितमानस — बालकाण्ड

'नौमी भौम बार मधुमासा। अवधपुरीं यह चरित प्रकासा' — इसका अर्थ क्या है?

अर्थ — चैत्र मास (मधुमास) की नवमी तिथि, मंगलवार (भौम बार) को अयोध्यापुरी (अवधपुरी) में यह चरित्र (रामचरितमानस) प्रकाशित हुआ। यही रामनवमी का दिन है जब भगवान राम का जन्म हुआ था।

बालकाण्डरचना तिथिअयोध्या
रामचरितमानस — बालकाण्ड

रामचरितमानस की रचना किस तिथि को शुरू हुई?

चैत्र शुक्ल नवमी (रामनवमी), मंगलवार को। तुलसीदासजी ने लिखा — 'नौमी भौम बार मधुमासा। अवधपुरीं यह चरित प्रकासा।' यह वही तिथि है जिस दिन भगवान राम का जन्म हुआ था।

बालकाण्डरचना तिथिरामनवमी
रामचरितमानस — बालकाण्ड

'संबत सोरह सै एकतीसा। करउँ कथा हरि पद धरि सीसा' — इसमें कौन सा संवत है?

संवत् 1631 (1574 ईस्वी)। 'सोरह सै' = 1600, 'एकतीसा' = 31, कुल = 1631। अर्थ — संवत् 1631 में श्रीहरि के चरणों पर सिर रखकर कथा आरम्भ करता हूँ।

बालकाण्डसंवत 1631चौपाई
रामचरितमानस — बालकाण्ड

तुलसीदासजी ने रामचरितमानस की रचना कब शुरू की — कौन सा संवत?

संवत् 1631 (1574 ईस्वी) में। तुलसीदासजी ने लिखा — 'संबत सोरह सै एकतीसा। करउँ कथा हरि पद धरि सीसा।' अर्थात् संवत् 1631 में श्रीहरि के चरणों पर सिर रखकर कथा आरम्भ करता हूँ।

बालकाण्डरचना तिथिसंवत 1631

विषय-वार प्रश्नोत्तर

🙏पूजा विधि📿मंत्र जाप विधि🔱शिव पूजा🔮तंत्र साधना🏠वास्तु शास्त्र💭सपनों का मतलब🪐ज्योतिष उपाय🙏व्रत उपवास🔥देवी पूजा🧘ध्यान साधना🛕तीर्थ यात्रा🔥हवन यज्ञ📜स्तोत्र पाठ🐘गणेश पूजा🙏विष्णु भक्ति📖सनातन दर्शन🕯️श्राद्ध पितृ कर्म🎗️संस्कार विधि❤️भक्ति साधनाधार्मिक उपाय

सनातन धर्म प्रश्नोत्तरी — शास्त्रीय ज्ञान

पौराणिक प्रश्नोत्तरी पर आपको हिंदू धर्म, वेद, पुराण, भगवद गीता, रामायण, महाभारत, पूजा विधि, व्रत-त्योहार, मंत्र, देवी-देवताओं और सनातन संस्कृति से जुड़े सैकड़ों प्रश्नों के प्रामाणिक उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर शास्त्रों और प्राचीन ग्रंथों पर आधारित है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत, प्रमाणित उत्तर पढ़ें।