विस्तृत उत्तर
बालकाण्ड के अनुसार भगवान शिवजी ने स्वयं इस ग्रन्थ का नाम 'रामचरितमानस' रखा।
चौपाई — 'रचि महेस निज मानस राखा। पाइ सुसमउ सिवा सन भाषा। ताते रामचरितमानस बर। धरेउ नाम हियँ हेरि हरषि हर॥'
इसका अर्थ — श्रीमहादेवजीने इसको रचकर अपने मन (मानस) में रखा था और सुअवसर पाकर पार्वतीजीसे कहा। इसीसे शिवजीने इसको अपने हृदयमें देखकर और प्रसन्न होकर इसका सुन्दर 'रामचरितमानस' नाम रखा।
'मानस' शब्द के दो अर्थ हैं:
- 1मन — शिवजी ने इसे अपने मन में रचा, इसलिये 'मानस' (मन का)
- 2सरोवर — यह रामचरित का पवित्र मानसरोवर है जिसमें डुबकी लगाने से सब पाप धुल जाते हैं
इस प्रकार 'रामचरितमानस' = राम के चरित्र का मानस (मन/सरोवर)।





