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बालकाण्ड प्रश्नोत्तरी — 321 प्रश्न

शास्त्रों और पुराणों पर आधारित बालकाण्ड विषय के प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर — कुल 321 प्रश्न

रामचरितमानस — बालकाण्ड

'हरि' शब्द का दोहरा अर्थ क्या है जो भगवान ने नारदजी से कहा?

'हरि' के दो अर्थ — (1) भगवान विष्णु (सुन्दर), (2) वानर/बन्दर। नारदजी ने विष्णु-रूप माँगा, भगवान ने वानर-रूप दिया। भगवान ने कहा — जैसे वैद्य रोगी को कुपथ्य नहीं देता, वैसे ही मैंने तुम्हारा हित किया।

बालकाण्डहरि शब्ददोहरा अर्थ
रामचरितमानस — बालकाण्ड

नारदजी को स्वयंवर में किसका मुख मिला?

वानर (बन्दर) का मुख मिला। शिवगणों ने मुस्कुराकर कहा — दर्पण में मुँह देखो। नारदजी ने जल में झाँककर बन्दर का मुख देखा तो क्रोध से भर गये और शिवगणों को शाप दिया — 'होहु निसाचर' (राक्षस हो जाओ)।

बालकाण्डवानर मुखनारद
रामचरितमानस — बालकाण्ड

नारदजी ने भगवान विष्णु से सुन्दर रूप का वरदान माँगा तो भगवान ने क्या किया?

नारदजी ने 'हरि रूप' माँगा — भगवान ने 'हरि' = वानर (बन्दर) का मुख दे दिया। 'हरि' शब्द का दोहरा अर्थ — विष्णु भी, वानर भी। भगवान ने मुनि के कल्याण (अभिमान तोड़ने) के लिये कुरूप बनाया पर माया से किसी को पता नहीं चला।

बालकाण्डहरि रूपवानर मुख
रामचरितमानस — बालकाण्ड

विश्वमोहिनी के स्वयंवर में नारदजी ने क्या किया?

नारदजी ने भगवान से 'हरि रूप' (सुन्दर रूप) माँगा। भगवान ने उनके हित में वानर (बन्दर) का मुख दे दिया — पर माया से नारदजी को पता नहीं चला। स्वयंवर में राजकुमारी ने नारदजी को छोड़कर भगवान विष्णु को वरा।

बालकाण्डनारद स्वयंवरसुन्दर रूप
रामचरितमानस — बालकाण्ड

विश्वमोहिनी कौन थी — भगवान की माया से किसकी रचना हुई?

विश्वमोहिनी भगवान विष्णु की माया से रची गयी एक अत्यन्त सुन्दर राजकुमारी थी। नारदजी का अभिमान तोड़ने के लिये भगवान ने मायावी नगर, राजा और स्वयंवर रचा। नारदजी उसका रूप देखकर मोहित हो गये।

बालकाण्डविश्वमोहिनीमाया
रामचरितमानस — बालकाण्ड

भगवान विष्णु ने नारदजी को मोहित करने के लिये क्या माया रची?

भगवान ने मायावी नगर रचा जिसमें एक अत्यन्त सुन्दर राजकुमारी थी (भगवान की माया)। स्वयंवर हो रहा था। नारदजी राजकुमारी का रूप देखकर वैराग्य भूल गये और मोहित हो गये — 'देखि रूप मुनि बिरति बिसारी।'

बालकाण्डविष्णु मायानारद मोह
रामचरितमानस — बालकाण्ड

शिवजी ने नारदजी को अभिमान करने से क्यों मना किया?

शिवजी जानते थे कि काम-विजय भगवान की कृपा से हुई, नारदजी की अपनी शक्ति नहीं। भगवान की माया प्रचण्ड है — किसी को भी मोहित कर सकती है। अभिमान करने पर माया का शिकार होना निश्चित था, इसलिये शिवजी ने बरज (मना) दिया।

बालकाण्डशिव चेतावनीनारद
रामचरितमानस — बालकाण्ड

नारदजी ने कामदेव को जीतने के बाद किससे अपनी विजय का वर्णन किया?

नारदजी ने पहले शिवजी को (जिन्होंने मना किया था) और फिर भगवान विष्णु को क्षीरसागर में जाकर काम-विजय का पूरा वृत्तान्त सुनाया। यद्यपि शिवजी ने पहले से बरज रखा था कि यह बात किसी से न कहना।

बालकाण्डनारदकाम विजय
रामचरितमानस — बालकाण्ड

नारदजी को किस बात का अभिमान हो गया था?

नारदजी को अभिमान हुआ कि उन्होंने अपने तपोबल से कामदेव को जीत लिया। कामदेव की कोई कला उन पर नहीं चली। वास्तव में भगवान की माया से रक्षा हुई थी, पर नारदजी समझ बैठे कि यह उनकी अपनी शक्ति है।

बालकाण्डनारद अभिमानकाम विजय
रामचरितमानस — बालकाण्ड

जय-विजय कौन थे और उन्हें किसने शाप दिया?

जय-विजय भगवान विष्णु के वैकुण्ठ द्वारपाल थे। सनकादि ऋषियों (ब्रह्माजी के मानसपुत्र) ने शाप दिया — असुर योनि में जन्म लोगे। तीन जन्म — हिरण्याक्ष-हिरण्यकशिपु, रावण-कुम्भकर्ण, शिशुपाल-दन्तवक्र। रामावतार में रावण-कुम्भकर्ण जय-विजय ही थे।

बालकाण्डजय-विजयशाप
रामचरितमानस — बालकाण्ड

शिवजी ने राम अवतार के कितने कारण बताये?

शिवजी ने अनेक कारण बताये पर कहा — 'इदमित्थं कहि जाइ न सोई' — निश्चित संख्या नहीं कही जा सकती। प्रमुख कारण — धर्म हानि, जय-विजय शाप, नारद शाप, मनु-शतरूपा वरदान, प्रतापभानु कथा, भक्त प्रेम। कारण अनन्त हैं।

बालकाण्डअवतार कारण संख्याशिवजी
रामचरितमानस — बालकाण्ड

'असुर मारि थापहिं सुरन्ह राखहिं निज श्रुति सेतु' — इसका अर्थ?

अर्थ — भगवान असुरों को मारकर देवताओं को स्थापित करते हैं, अपने वेदरूपी सेतु (धर्ममार्ग) की रक्षा करते हैं और जगत में निर्मल यश फैलाते हैं — यही श्रीराम जन्म का कारण है। 'श्रुति सेतु' = वेदमार्ग/धर्ममार्ग।

बालकाण्डदोहा अर्थअवतार उद्देश्य
रामचरितमानस — बालकाण्ड

भगवान अवतार क्यों लेते हैं — रामचरितमानस के अनुसार?

अनेक कारण — (1) धर्म हानि पर रक्षा, (2) सज्जनों की पीड़ा हरना, (3) असुर वध, (4) वेदमार्ग रक्षा, (5) यश फैलाना, (6) भक्तों का प्रेम। पर शिवजी ने कहा — अवतार का कारण 'बस यही है' ऐसा निश्चित नहीं कहा जा सकता, अनेक कारण हो सकते हैं।

बालकाण्डअवतार कारणभगवान
रामचरितमानस — बालकाण्ड

'जब जब होइ धरम कै हानी। बाढ़हिं असुर अधम अभिमानी' — इसका क्या अर्थ है?

अर्थ — जब-जब धर्म का ह्रास होता है और नीच अभिमानी राक्षस बढ़ जाते हैं, तब-तब भगवान अवतार लेते हैं। चार कारण — धर्म हानि, असुरों का बढ़ना, अन्याय, और ब्राह्मण-गौ-देवता-पृथ्वी का कष्ट। यह गीता के 'यदा यदा हि धर्मस्य' के समान सिद्धान्त है।

बालकाण्डधर्म हानिअवतार
रामचरितमानस — बालकाण्ड

शिवजी ने भगवान के अवतार का मूल कारण क्या बताया?

शिवजी ने कहा — 'जब जब होइ धरम कै हानी। बाढ़हिं असुर अधम अभिमानी' — जब धर्म की हानि हो, राक्षस बढ़ें, ब्राह्मण-गौ-देवता-पृथ्वी कष्ट पायें, तब भगवान अवतार लेकर असुरों को मार, देवताओं को स्थापित कर, वेदमार्ग की रक्षा करते हैं।

बालकाण्डअवतार कारणधर्म हानि
रामचरितमानस — बालकाण्ड

'सुनु गिरिजा हरिचरित सुहाए' — शिवजी ने पार्वतीजी को क्या सुनाने का निर्णय लिया?

शिवजी ने पार्वतीजी को श्रीहरि (राम) के सम्पूर्ण अवतार चरित सुनाने का निर्णय लिया। कहा — 'सुनु गिरिजा हरिचरित सुहाए' — वेद-शास्त्रों में गाये गये राम के सुन्दर चरित्र सुनो। राम अतर्क्य हैं — बुद्धि, मन, वाणी से नहीं समझे जा सकते।

बालकाण्डशिव पार्वती संवादहरिचरित
रामचरितमानस — बालकाण्ड

विवाह के बाद पार्वतीजी ने शिवजी से क्या प्रश्न किया?

पार्वतीजी ने कैलास पर शिवजी से रामकथा सुनने की जिज्ञासा प्रकट की। शिवजी ने पहले शम्भु चरित्र (विवाह कथा) संक्षेप में कहा, फिर रामावतार की कथा सुनानी शुरू की। भरद्वाजजी (याज्ञवल्क्यजी के माध्यम से) यह सुनकर अति प्रसन्न हुए।

बालकाण्डशिव पार्वती संवादरामकथा प्रश्न
रामचरितमानस — बालकाण्ड

शिव-पार्वती विवाह कहाँ सम्पन्न हुआ?

हिमवान (पर्वतराज) की नगरी में। हिमाचल ने अत्यन्त विचित्र मण्डप बनवाया। नगर की शोभा इतनी सुन्दर थी कि ब्रह्माजी की रचना-चतुरी भी तुच्छ लगती। घर-घर तोरण-पताकाएँ शोभित थीं।

बालकाण्डशिव विवाह स्थानहिमवान नगरी
रामचरितमानस — बालकाण्ड

शिव-पार्वती विवाह के बाद विदाई का वर्णन कैसा है?

हिमाचल ने भव्य दहेज दिया — दासी, दास, घोड़े, रथ, हाथी, गायें, मणि, सोने के बर्तन। शिवजी पार्वतीजी को लेकर कैलास गये। 'सकल भुवन भरि रहा उछाहू' — सारे ब्रह्माण्ड में आनन्द भर गया। बाद में कार्तिकेय का जन्म हुआ।

बालकाण्डशिव पार्वती विदाईदहेज
रामचरितमानस — बालकाण्ड

शिव-पार्वती विवाह में वेद मंत्रों से किसने विवाह करवाया?

महामुनियों (श्रेष्ठ मुनिगणों) ने वेद मंत्रों की रीति से विवाह करवाया। हिमाचल ने हाथ में कुश लेकर कन्या का हाथ पकड़कर उन्हें भवानी जानकर शिवजी को समर्पित किया। पहले गणेशजी का पूजन किया गया।

बालकाण्डशिव पार्वती विवाहवेद मंत्र
रामचरितमानस — बालकाण्ड

शिवजी ने विवाह के समय कौन सा रूप धारण किया?

शिवजी ने विवाह मण्डप में अत्यन्त सुन्दर और दिव्य रूप धारण किया। पहले बारात में विचित्र भयानक रूप था, पर विवाह के समय मनोहर रूप देखकर सब प्रसन्न और मोहित हो गये।

बालकाण्डशिव सुन्दर रूपविवाह
रामचरितमानस — बालकाण्ड

नारदजी ने माता मैना को कैसे समझाया?

पहले पार्वतीजी ने माता को समझाया — 'जो विधाता रच दे वह नहीं टलता, दोष किसी को मत दो।' फिर नारदजी ने आकर सबको समझाया कि शिवजी स्वयं भगवान हैं। शिवजी ने सुन्दर रूप धारण किया तो सब प्रसन्न हुए।

बालकाण्डनारदमैना
रामचरितमानस — बालकाण्ड

माता मैना ने शिवजी की बारात देखकर क्या कहा?

मैना ने नारदजी को दोषी ठहराया — 'मैंने नारद का क्या बिगाड़ा, जिन्होंने मेरा घर उजाड़ दिया।' शिवजी की निन्दा की — 'न मोह, न माया, न घर, न लाज — बावले वर के लिये मेरी बेटी ने तप किया।' सारी स्त्रियाँ व्याकुल हुईं।

बालकाण्डमैनाशिव बारात
रामचरितमानस — बालकाण्ड

शिवजी की बारात देखकर जनकपुर (हिमवान की नगरी) की स्त्रियों ने क्या प्रतिक्रिया दी?

नगर के लोग पहले डर गये, फिर समझदार माता-पिता ने बच्चों को समझाया — 'डरो मत, यह शिवजी का समाज है।' पर माता मैना ने बारात देखकर बड़ा दुख प्रकट किया और विलाप किया।

बालकाण्डशिव बारातस्त्रियाँ

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