ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
वार

गुरुवार वार — वार — व्रत, देव-पूजन, मंत्र प्रश्नोत्तर(158)

गुरुवार वार से जुड़े 158 प्रश्न — विधि, नियम, मंत्र, लाभ। शास्त्र-सम्मत व्याख्या एक स्थान पर।

व्रत नियम और संकल्प

गुरुवार का व्रत कितने दिन करना चाहिए?

सामान्य रूप से यह व्रत लगातार 16 गुरुवार तक किया जाता है और 17वें गुरुवार को इसका उद्यापन करना होता है।

#16 गुरुवार#व्रत अवधि
व्रत नियम और संकल्प

गुरुवार का व्रत कब से शुरू करें?

गुरुवार का व्रत किसी भी महीने के शुक्ल पक्ष के पहले गुरुवार से शुरू करना चाहिए। पौष महीने में इसे शुरू करना वर्जित है।

#व्रत प्रारंभ#शुक्ल पक्ष#पुष्य नक्षत्र
व्रत का महत्व

गुरुवार का व्रत किस भगवान के लिए किया जाता है?

यह व्रत मुख्य रूप से देवगुरु बृहस्पति और जगत के पालनहार भगवान श्री विष्णु को प्रसन्न करने के लिए किया जाता है।

#गुरुवार व्रत#भगवान विष्णु#बृहस्पति देव
जीवन एवं मृत्यु

गुरु का अपमान करने वाले को कौन-सा नरक मिलता है?

गुरु अपमान पर — महापातक नरक (कीड़े खाते हैं), वैतरणी। पुनर्जन्म में ब्रह्मराक्षस योनि, कुष्ठ रोग। 'गुरु का अपमान = नरक के द्वार।'

#गुरु अपमान#महापातक#ब्रह्मराक्षस
जीवन एवं मृत्यु

गुरु का अपमान करने वाले को क्या दंड मिलता है?

गुरु का अपमान — नरक का द्वार। कुतर्क करने वाला शिष्य ब्रह्मराक्षस योनि में, गुरु-धन हरण पर वैतरणी, गुरुपत्नी-गमन पर कुष्ठ-रोग और महापातक नरक में कीड़ों द्वारा भक्षण।

#गुरु अपमान#दंड#नरक
जप नियम

जप माला में सुमेरु का क्या महत्व है और इसे क्यों नहीं पार करते

सुमेरु परमात्मा और गुरु का प्रतीक है। इसे न लांघना आध्यात्मिक अनुशासन और भक्ति की मर्यादा का हिस्सा है।

#सुमेरु#माला#गुरु
देवता पूजा

दत्तात्रेय 24 गुरु कैसे बनाए

भागवत 11वां स्कंध। पृथ्वी (धैर्य), वायु (निर्लिप्तता), आकाश (विशालता), जल (निर्मलता), अग्नि (शुद्धता), सूर्य (दान), मधुमक्खी (संग्रह दोष), मकड़ी (रचना में फंसना) आदि 24। प्रकृति सबसे बड़ा गुरु।

#दत्तात्रेय#24 गुरु#शिक्षा
राशि अनुसार उपाय

मीन राशि सबसे प्रभावी मंत्र

मीन=गुरु। 'ॐ बृं बृहस्पतये नमः', विष्णु सहस्रनाम। पुखराज, पीला, गुरुवार। भक्ति/ध्यान/सेवा=सबसे उपयुक्त।

#मीन#गुरु#मंत्र
राशि अनुसार उपाय

धनु राशि गुरु कैसे मजबूत करें

धनु=गुरु। विष्णु+'ॐ बृं बृहस्पतये नमः'+गुरुवार+पीला दान+पुखराज। गीता पाठ+गुरु सम्मान+धर्म। Q895।

#धनु#गुरु#मजबूत
तंत्र शास्त्र

तंत्र शास्त्र में दीक्षा कितने प्रकार की होती है?

प्रमुख: (1) क्रिया (बाह्य — होम/अभिषेक)। (2) चाक्षुषी (दृष्टि)। (3) स्पर्श (हाथ/मस्तक)। (4) शब्द/मंत्र (कान में — सर्वाधिक प्रचलित)। (5) ध्यान/मानसिक (सर्वसूक्ष्म)। (6) शक्तिपात (शक्ति प्रेषण — सर्वशक्तिमान)। (7) स्वप्न (दुर्लभ)। तंत्रसार: 'ज्ञान दे, पाप क्षीण करे = दीक्षा।'

#दीक्षा#प्रकार#तंत्र
ज्योतिष दोष एवं उपाय

गुरु ग्रह कमजोर हो तो उपाय

विष्णु पूजा, 'ॐ बृं बृहस्पतये नमः', गुरुवार व्रत, पीला दान (हल्दी/केला), पुखराज, गुरु सम्मान, दान+धर्म।

#गुरु#बृहस्पति#कमजोर
ज्योतिष दोष एवं उपाय

गुरु चांडाल दोष क्या है उपाय

गुरु+राहु एक भाव = ज्ञान में भ्रम, गुरु विश्वासघात। उपाय: विष्णु पूजा, गुरुवार व्रत, 'ॐ बृं बृहस्पतये नमः', पुखराज, सत्य + गुरु सम्मान = सबसे प्रभावी।

#गुरु चांडाल#दोष#गुरु राहु
मुहूर्त

गुरु पुष्य योग में क्या खरीदना शुभ

गुरुवार+पुष्य = सोना, पीली वस्तुएं, शिक्षा सामग्री, पुखराज, धार्मिक सामग्री, संपत्ति। शिक्षा/धर्म = गुरु पुष्य > रवि पुष्य। बृहस्पति=ज्ञान/धन/धर्म।

#गुरु पुष्य#योग#खरीदारी
दैनिक आचार

गुरुवार को बाल धोना चाहिए या नहीं

लोक मान्यता: गुरुवार बाल धोना अशुभ (बृहस्पति कमजोर)। शास्त्रीय आधार नहीं — पूर्णतः लोक/ज्योतिष। स्वच्छता > परंपरा। आस्था अनुसार; आवश्यकता हो तो धो सकते हैं।

#गुरुवार#बाल धोना#बृहस्पति
दैनिक आचार

गुरुवार को पीला पहनने से क्या होता है

गुरुवार-पीला = बृहस्पति कृपा — ज्ञान, शिक्षा, धन, विवाह सुख, सम्मान। विष्णु पूजा, केला दान। बृहस्पति = गुरु/ज्ञान/धर्म। ज्योतिष परंपरा।

#गुरुवार#पीला#बृहस्पति
पर्व

गुरु पूर्णिमा पर गुरु दक्षिणा में क्या देनी चाहिए

गुरु दक्षिणा: यथाशक्ति धन (₹101/501/1001), वस्त्र, फल-मिठाई, पुस्तकें, गौदान, स्वर्ण। सर्वोत्तम = गुरु सेवा + आज्ञा पालन + शिक्षा अभ्यास। 'विना दक्षिणा विद्या निष्फल'। राशि गौण, कृतज्ञता प्रधान।

#गुरु पूर्णिमा#दक्षिणा#गुरु
त्योहार पूजा

गुरु पूर्णिमा पर चप्पल क्यों नहीं पहनते?

चप्पल नहीं: गुरु सम्मान (विनम्रता), पृथ्वी=गुरु चरण (अपमान न हो), तप (कष्ट=गुरु सेवा), Earthing, अहंकार त्याग। कठोर नियम नहीं — भावना महत्वपूर्ण। 'गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः...'

#गुरु पूर्णिमा#चप्पल#नंगे पैर
मंत्र साधना

मंत्र जप में गुरु मंत्र और मूल मंत्र में क्या अंतर है?

गुरु मंत्र: गुरु दीक्षित, व्यक्तिगत, गोपनीय, शक्तिपात सहित, सर्वाधिक प्रभावी। मूल मंत्र: शास्त्र प्रसिद्ध (ॐ नमः शिवाय आदि), सार्वजनिक, बिना दीक्षा जप सकते हैं। गुरु मंत्र > मूल मंत्र (प्रभाव)। गुरु न हो = मूल मंत्र श्रद्धापूर्वक जपें।

#गुरु मंत्र#मूल मंत्र#दीक्षा
पर्व

गुरु पूर्णिमा पर व्यास पूजा का क्या विधान है

व्यास पूजा: आषाढ़ पूर्णिमा। व्यास पीठ → चित्र/पादुका स्थापित → गणपति पूजन → व्यास पूजन → गुरु परम्परा (ब्रह्मा से गुरु तक) → 'गुरुर्ब्रह्मा...' मंत्र → गुरु गीता पाठ → दक्षिणा। व्यास = वेद विभाजक, आदि गुरु। चातुर्मास साधना आरम्भ।

#गुरु पूर्णिमा#व्यास पूजा#वेदव्यास
मुहूर्त एवं योग

गुरु पुष्य योग में खरीदारी और पूजा का क्या महत्व है

गुरु पुष्य = गुरुवार + पुष्य नक्षत्र। धन-समृद्धि का सर्वोत्तम मुहूर्त। स्वर्ण/रत्न/सम्पत्ति/वाहन खरीद = अक्षय। बृहस्पति + विष्णु/लक्ष्मी पूजा। पीले वस्त्र-फूल। विवाह वर्जित (पुष्य में), अन्य सभी शुभ। रवि पुष्य से अधिक बार आता है।

#गुरु पुष्य#नक्षत्र#खरीदारी
पर्व

गुरु पूर्णिमा पर गुरु पूजा कैसे करें

गुरु पूर्णिमा: आषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा = व्यास जन्मदिन। गुरु/व्यास पादुका पूजा → 'गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः...' जप → गुरु गीता पाठ → चरण स्पर्श → दक्षिणा → विद्वान भोजन। गुरु = ब्रह्मा-विष्णु-शिव स्वरूप।

#गुरु पूर्णिमा#व्यास पूजा#गुरु
ग्रह दोष शांति

गुरु ग्रह शांति पूजा कैसे करें?

गुरु शांति: गुरुवार → 'ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमः' 19000 जप → पीपल समिधा + पीले तिल-चना हवन → विष्णु सहस्रनाम → दान (पीला वस्त्र, चना, हल्दी, केसर, पुखराज) → गुरुवार व्रत → पीपल पूजा।

#गुरु ग्रह#बृहस्पति#गुरु शांति
ग्रह मंत्र

गुरु बृहस्पति गायत्री मंत्र का जप कैसे करें?

'ॐ वृषभध्वजाय विद्महे...तन्नो गुरुः प्रचोदयात्'। बीज: 'ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमः' 19,000। गुरुवार, पीले वस्त्र, पुखराज/तुलसी। गुरु = ज्ञान/धर्म/विवाह/भाग्य। + विष्णु पूजा।

#गुरु#बृहस्पति#गायत्री
आध्यात्मिक साधना

आध्यात्मिक अनुभवों को दूसरों से साझा करना चाहिए या नहीं?

सामान्य: गोपनीय रखें। कारण: अहंकार↑, शक्ति क्षय (बीज खोलें=सूखे), उपहास/ईर्ष्या। किसे बताएँ: गुरु=अवश्य, सहसाधक=सीमित, परिवार=सावधानी। अपवाद: गुरु कहें, दूसरों को मार्गदर्शन (विनम्रता से)। कबीर: 'बोलना कहाँ बुद्धिमानी, बोले वहाँ हानि।'

#अनुभव गोपनीयता#साझा करना#गुरु
कुंडलिनी योग

कुंडलिनी जागरण में गुरु का मार्गदर्शन क्यों आवश्यक है?

अनिवार्य: सुरक्षा (शक्तिशाली ऊर्जा), शक्तिपात=सबसे सुरक्षित, भ्रम vs दिव्य=गुरु बताए, साधना समायोजन, अहंकार नियंत्रण। शिव संहिता: 'गुरु कृपा से कुंडलिनी।' बिना=सिंड्रोम/अस्थिरता/पतन।

#गुरु#शक्तिपात#मार्गदर्शन
मंत्र सिद्धि

गुरु मंत्र सिद्धि कैसे प्राप्त करें?

गुरु मंत्र = दीक्षा-समय गुरु द्वारा दिया मंत्र। कुलार्णव: गुरु-दत्त मंत्र सर्वश्रेष्ठ — इसमें गुरु-शक्ति पहले से। सिद्धि का मूल: गुरु में श्रद्धा और भक्ति। गुरुपूर्णिमा पर विशेष जप। संख्या से अधिक महत्वपूर्ण: गुरु-आज्ञा पालन। गुरु-दत्त = जीवित मंत्र।

#गुरु मंत्र#दीक्षा मंत्र#गुरु कृपा
मंत्र सिद्धि

मंत्र सिद्धि में गुरु की क्या भूमिका होती है?

कुलार्णव: बिना दीक्षा मंत्र = मृत शिशु। गुरु की पाँच भूमिकाएं: मंत्र-चयन, दीक्षा (शक्तिपात), सही उच्चारण, साधना-मार्गदर्शन, शक्ति-संचरण। तीन प्रकार: शिक्षा, दीक्षा, और निष्पत्ति गुरु। जब साधक तैयार होता है — गुरु स्वयं प्रकट होते हैं।

#गुरु#दीक्षा#गुरु-शिष्य
बीज मंत्र

बीज मंत्र सिद्धि कैसे प्राप्त करें?

कुलार्णव: बिना दीक्षा सिद्धि नहीं। पाँच शर्तें: गुरु-दीक्षा, पुरश्चरण (अक्षर × 1000 जप), तर्पण-हवन-अभिषेक-ब्राह्मण भोजन, नियम-पालन (ब्रह्मचर्य, सात्विक आहार), निष्काम भाव। सिद्धि के लक्षण: विशेष गंध/प्रकाश, स्वप्न-दर्शन, स्वतः-स्फुरण।

#बीज मंत्र सिद्धि#मंत्र साधना#अनुष्ठान
गुरु आशीर्वाद

तंत्र साधना में गुरु का आशीर्वाद क्यों जरूरी है?

गुरु आशीर्वाद जरूरी: साधना को शक्ति/ईंधन। अदृश्य कवच (बाधाओं से रक्षा)। मंत्र-वीर्य परिपक्व। नकारात्मक संस्कार क्षय। साधक दृढ़-निर्भय। कुलार्णव: 'गुरु कृपा से ब्रह्मज्ञान।'

#गुरु आशीर्वाद#कृपा#शक्ति
सही मार्ग

तंत्र साधना का सही मार्ग क्या है?

सही तंत्र मार्ग: योग्य गुरु + दक्षिण मार्ग + नित्य साधना + शुद्ध उद्देश्य + गोपनीयता। कलियुग में दक्षिण मार्ग। गलत: बिना गुरु वाम मार्ग, षट्कर्म दुरुपयोग, अहंकार। तंत्रालोक: 'सर्वत्र शिव का दर्शन।'

#सही मार्ग#दक्षिण मार्ग#गुरु
गुरु दीक्षा

तंत्र साधना में गुरु दीक्षा क्यों जरूरी है?

गुरु दीक्षा जरूरी: 'दीयते ज्ञानं क्षाल्यते पापं।' मंत्र में प्राण (बिना दीक्षा 'मृत मंत्र')। शक्तिपात (गुरु की वर्षों की शक्ति हस्तांतरण)। संस्कार शुद्धि। सुरक्षा। तंत्रालोक: 'दीक्षाहीन को न मंत्र सिद्धि, न शक्ति।'

#दीक्षा#गुरु#शक्तिपात
गुरु महत्व

तंत्र साधना के लिए गुरु क्यों जरूरी है?

तंत्र में गुरु अनिवार्य: शक्तिपात (गुरु शक्ति हस्तांतरित)। 'बिना दीक्षा मंत्र सिद्धि नहीं।' अनुभवों में मार्गदर्शन। नकारात्मक शक्तियों से रक्षा। कुलार्णव: 'तंत्रे विना गुरुं बद्धो न मुच्यते।' — गुरु बिना तंत्र में मुक्ति नहीं।

#गुरु#दीक्षा#जरूरी
गुरु महत्व

मंत्र जप में गुरु की क्या भूमिका होती है?

गुरु की भूमिका: मंत्र चयन (स्वभाव अनुसार), शक्तिपात (साधना ऊर्जा हस्तांतरण), सही विधि, बाधाओं में मार्गदर्शन। कुलार्णव: 'गुरु कृपा बिना ज्ञान नहीं।' गुरु न मिलें तो: शास्त्र को गुरु मानें या 'भगवान ही मेरे गुरु' — यह भाव।

#गुरु#दीक्षा#शक्तिपात
गुरु और मंत्र

क्या बिना गुरु के मंत्र जप किया जा सकता है?

बिना गुरु: नाम जप (राम, हरे कृष्ण, ॐ नमः शिवाय) — बिना दीक्षा भी पूर्ण। तंत्र बीज मंत्र — गुरु दीक्षा से अधिक प्रभावशाली। कुलार्णव: 'बिना दीक्षा मंत्र सिद्धि नहीं।' भागवत: भगवान के नाम के लिए कोई अनुमति नहीं। श्रद्धा से जपें — भगवान सुनते हैं।

#गुरु#दीक्षा#स्वयं
गुरु महत्व

काली साधना में गुरु क्यों जरूरी है?

तांत्रिक काली साधना में गुरु इसलिए जरूरी है क्योंकि: गुरु के मुख से मंत्र 'चैतन्य' होता है; शक्तिपात से गुरु-परंपरा की ऊर्जा मिलती है; साधना में कोई कठिनाई हो तो संरक्षण मिलता है। भक्ति मार्ग (नित्य पूजा-जप) में गुरु अनिवार्य नहीं।

#गुरु#दीक्षा#काली साधना
गुरु महत्व

काली साधना में गुरु क्यों जरूरी है?

तांत्रिक काली साधना में गुरु इसलिए जरूरी है क्योंकि: गुरु के मुख से मंत्र 'चैतन्य' होता है; शक्तिपात से गुरु-परंपरा की ऊर्जा मिलती है; साधना में कोई कठिनाई हो तो संरक्षण मिलता है। भक्ति मार्ग (नित्य पूजा-जप) में गुरु अनिवार्य नहीं।

#गुरु#दीक्षा#काली साधना
गुरु महत्व

तंत्र साधना में गुरु क्यों जरूरी है?

तंत्र में गुरु इसलिए जरूरी: मंत्र पुस्तक से नहीं, गुरु मुख से जीवंत होता है; शक्तिपात से परंपरा की ऊर्जा मिलती है; व्यक्तिगत साधना क्रम का मार्गदर्शन; साधना की कठिनाइयों में संरक्षण। भक्ति मार्ग में गुरु अनिवार्य नहीं — देवी स्वयं गुरु हैं।

#गुरु#दीक्षा#तंत्र
गुरु महत्व

तंत्र साधना में गुरु क्यों जरूरी है?

तंत्र में गुरु इसलिए जरूरी हैं क्योंकि: वे शक्तिपात से मंत्र को सक्रिय करते हैं, परंपरा की ऊर्जा-श्रृंखला देते हैं, व्यक्तिगत मार्गदर्शन करते हैं और साधना की कठिनाइयों में रक्षा करते हैं। बिना गुरु के गायत्री मंत्र और भक्ति मार्ग अपनाएं।

#गुरु#दीक्षा#शक्तिपात
तंत्र सावधानी

क्या तंत्र साधना खतरनाक है?

भक्ति मार्ग से तंत्र पूजन और गुरु दीक्षा के साथ साधना सुरक्षित है। खतरा तब है जब: बिना गुरु उच्च साधना, नकारात्मक उद्देश्य (वशीकरण, मारण) या मानसिक अस्थिरता में साधना की जाए। तंत्र स्वयं अग्नि की तरह है — उद्देश्य और पद्धति ही इसे सुरक्षित या खतरनाक बनाते हैं।

#तंत्र खतरा#सावधानी#भय
मंत्र ज्ञान

गुरु मंत्र क्या होता है?

गुरु मंत्र वह मंत्र है जो सिद्ध गुरु दीक्षा के समय शिष्य को देते हैं। इसमें गुरु की साधना की शक्ति होती है — यह शीघ्र सिद्ध होता है। दीक्षित मंत्र को गोपनीय रखें। बिना गुरु के गायत्री मंत्र, ॐ और राम नाम का जप करें।

#गुरु मंत्र#दीक्षा#इष्ट मंत्र
शास्त्र ज्ञान

उपनिषद में गुरु-शिष्य परंपरा क्या है?

उपनिषद स्वयं गुरु-शिष्य संवाद हैं — यमराज-नचिकेता, उद्दालक-श्वेतकेतु, याज्ञवल्क्य-मैत्रेयी। गुरु — श्रोत्रिय और ब्रह्मनिष्ठ होना चाहिए (मुण्डकोपनिषद 1/2/12)। शिष्य — श्रद्धा, जिज्ञासा और ब्रह्मचर्य से युक्त। ज्ञान श्रवण-मनन-निदिध्यासन से मिलता है।

#गुरु-शिष्य#उपनिषद#परंपरा
शास्त्र ज्ञान

उपनिषद में आत्मज्ञान कैसे प्राप्त करें?

उपनिषदों में आत्मज्ञान की विधि है — मुमुक्षुत्व → सद्गुरु → श्रवण → मनन → निदिध्यासन → 'नेति नेति' विचार → अपरोक्षानुभूति। बृहदारण्यक (4/4/22) — 'आत्मा श्रोतव्यो मन्तव्यो निदिध्यासितव्यः।' कठोपनिषद (2/24) — आत्मा बलहीन को नहीं मिलती।

#आत्मज्ञान#उपनिषद#आत्म-साक्षात्कार
शास्त्र ज्ञान

उपनिषद में गुरु का महत्व क्या है?

उपनिषदों में गुरु अनिवार्य है। मुण्डकोपनिषद (1/2/12) में श्रोत्रिय और ब्रह्मनिष्ठ गुरु के पास जाने का आदेश है। छान्दोग्य (6/14/2) में गुरु 'अंधे को मार्ग दिखाने वाला' है। श्वेताश्वतर (6/23) — ईश्वर और गुरु में समान भक्ति से ही उपनिषद-ज्ञान प्रकट होता है।

#गुरु#उपनिषद#आचार्य
वेद ज्ञान

वेदों में गुरु का महत्व क्या है?

वेदों में गुरु अनिवार्य है। मुण्डकोपनिषद (1/2/12) — श्रोत्रिय और ब्रह्मनिष्ठ गुरु के बिना ब्रह्मज्ञान संभव नहीं। तैत्तिरीय उपनिषद (1/11) — 'आचार्यो ब्रह्म भवति' — गुरु स्वयं ब्रह्म है।

#गुरु#वेद#गुरु-शिष्य
शास्त्र ज्ञान

उपनिषद का अध्ययन कैसे करें?

उपनिषद अध्ययन के लिए पहले ईशावास्योपनिषद, फिर कठोपनिषद से आरंभ करें। गुरु के मार्गदर्शन में शंकराचार्य भाष्य सहित पढ़ें। श्रवण → मनन → निदिध्यासन — यही वेदांत-विद्या का राजमार्ग है।

#उपनिषद#अध्ययन#वेदांत
वेद ज्ञान

वेदों का ज्ञान कैसे प्राप्त करें?

वेद-ज्ञान के लिए श्रोत्रिय और ब्रह्मनिष्ठ गुरु का आश्रय लें (मुण्डकोपनिषद 1/2/12)। श्रवण → मनन → निदिध्यासन — यही वेदाध्ययन की त्रिवेणी है। आधुनिक काल में वेद-भाष्यों, उपनिषदों और गीता से वेद-ज्ञान का मार्ग प्रशस्त होता है।

#वेद#अध्ययन#गुरु
गुरु-शिष्य परंपरा

हिंदू धर्म में गुरु का महत्व क्या है?

हिंदू धर्म में गुरु का स्थान सर्वोच्च है। मुण्डकोपनिषद के अनुसार ब्रह्मज्ञान के लिए ब्रह्मनिष्ठ गुरु के पास जाना अनिवार्य है। गुरु को ब्रह्मा-विष्णु-महेश से भी श्रेष्ठ माना गया है — 'गुरुः साक्षात् परब्रह्म।'

#गुरु#हिंदू धर्म#गुरु-शिष्य
गुरु-शिष्य परंपरा

गुरु दीक्षा क्या है?

गुरु दीक्षा वह संस्कार है जिसमें गुरु अपनी शक्ति, ज्ञान या मंत्र को शिष्य में प्रवाहित करते हैं। इससे शिष्य की साधना सक्रिय होती है। शास्त्रों में कहा गया है — 'मोक्ष मूलं गुरु कृपा' — मोक्ष का आधार गुरु की कृपा है।

#दीक्षा#गुरु दीक्षा#मंत्र दीक्षा
गुरु-शिष्य परंपरा

शिष्य क्या होता है?

शिष्य वह है जो गुरु के मार्गदर्शन में आध्यात्मिक उन्नति के लिए समर्पित साधना करता है। आदर्श शिष्य में श्रद्धा, समर्पण, जिज्ञासा, विनम्रता और सेवाभाव होना चाहिए। शास्त्रों में मुमुक्षा, विवेक और वैराग्य को शिष्य की पात्रता के लिए आवश्यक माना गया है।

#शिष्य#गुरु-शिष्य#साधक
गुरु-शिष्य परंपरा

गुरु क्या होता है?

गुरु वह है जो अज्ञान के अंधकार को हटाकर ज्ञान का प्रकाश देता है। शास्त्रों में गुरु को ब्रह्मा, विष्णु और महेश के तुल्य माना गया है। मुण्डकोपनिषद के अनुसार ब्रह्मज्ञान के लिए वेदज्ञाता और ब्रह्मनिष्ठ गुरु के पास जाना अनिवार्य है।

#गुरु#आध्यात्मिक मार्गदर्शक#गुरु-शिष्य
आज का पंचांग
आज की तिथि, नक्षत्र, मुहूर्त

पंचांग सहित दैनिक मुहूर्त, राहु काल और चौघड़िया।

पर्व-पञ्चांग
सभी पर्व देखें

होली, दिवाली, नवरात्रि, एकादशी — पर्व-केन्द्रित प्रश्नोत्तर।