ब्रह्मा-विष्णु संवादब्रह्मा और विष्णु में संघर्ष क्यों हुआ?शिव की माया से मोहित होकर ब्रह्मा और विष्णु एक-दूसरे की महिमा में उलझे, और समुद्र के मध्य उनके बीच संघर्ष चल रहा था।#ब्रह्मा#विष्णु#संघर्ष
ब्रह्मा नामब्रह्मा को पद्मयोनि क्यों कहा गया?विष्णु ने ब्रह्मा से कहा कि वे कमल से उतर आएँ और आज से पद्मयोनि नाम से लोक में प्रसिद्ध होंगे।#ब्रह्मा#पद्मयोनि#नाभिकमल
नाभिकमलब्रह्मा विष्णु की नाभि से बाहर कैसे आए?सभी द्वार बंद देखकर ब्रह्मा ने अत्यन्त सूक्ष्म रूप धारण किया, नाभि में मार्ग पाया और कमलनाल से बाहर आए।#ब्रह्मा#विष्णु नाभि#कमलनाल
उदर में लोकब्रह्मा ने विष्णु के भीतर क्या देखा?ब्रह्मा ने विष्णु के उदर में वही सब लोक देखे जो विष्णु ने उनके उदर में देखे थे, पर वे भी उसका अंत नहीं पा सके।#ब्रह्मा#विष्णु#उदर
उदर में लोकविष्णु ने ब्रह्मा के भीतर क्या देखा?विष्णु ने ब्रह्मा के उदर में अठारह द्वीप, समुद्र, पर्वत, चार वर्ण, सात लोक और स्थावर-जंगम सब कुछ देखा।#विष्णु#ब्रह्मा#उदर
शिव मायाशिव की माया क्या करती है?शिव की माया ब्रह्मा और विष्णु को मोहित करती है; कल्प के आरम्भ में ब्रह्मा का ज्ञान भी उससे नष्ट हो जाता है।#शिव माया#मोह#ब्रह्मा
शिव मायाब्रह्मा और विष्णु एक-दूसरे को क्यों नहीं पहचान पाए?वे महात्मा शिव की माया से मोहित थे, इसलिए ब्रह्मा विष्णु को पहचान नहीं पाए और दोनों अपने-अपने आदिकर्ता भाव में बोलने लगे।#ब्रह्मा#विष्णु#शिव माया
ब्रह्मा-विष्णु संवादब्रह्मा ने विष्णु से क्या पूछा?ब्रह्मा ने विष्णु से पूछा कि आप कौन हैं और समुद्र के मध्य आश्रय लेकर क्यों सो रहे हैं।#ब्रह्मा#विष्णु#प्रश्न
प्रलय और विष्णुविष्णु शेषनाग पर कैसे सो रहे थे?प्रलय-सागर में विष्णु हजार फनों वाले शेषनाग की छायायुक्त फण-शय्या पर अनिर्वचनीय योग में स्थित होकर शयन कर रहे थे।#विष्णु#शेषनाग#शेषशय्या
नाभिकमलब्रह्मा का जन्म कमल से कैसे हुआ?विष्णु ने अपनी नाभि से एक विशाल कमल उत्पन्न किया; बाद में ब्रह्मा कमलनाल के सहारे नाभि से बाहर आकर उसी कमल पर शोभित हुए।#ब्रह्मा#कमल जन्म#नाभिकमल
महादेव का उपदेशमहादेव ने विष्णु को क्या आदेश दिया?महादेव ने विष्णु से चराचर जगत का पालन करने, मोह छोड़ने और पितामह ब्रह्मा का पालन करने को कहा।#महादेव#विष्णु#जगत पालन
वरदानविष्णु ने शिव से कौन सा वर मांगा?विष्णु ने वर माँगा कि ब्रह्मा और विष्णु दोनों की महादेव के प्रति सदा दृढ़ भक्ति बनी रहे।#विष्णु#शिव#वरदान
ब्रह्मा-विष्णुब्रह्मा और विष्णु का विवाद क्यों शुभ माना गया?विष्णु ने कहा कि उनका विवाद मंगलकारी हुआ, क्योंकि उसी विवाद को समाप्त करने के लिए महादेव प्रकट हुए।#ब्रह्मा विष्णु विवाद#शुभ विवाद#महादेव प्रकट
ब्रह्मा-विष्णुब्रह्मा और विष्णु शिव से कैसे जुड़े हैं?महादेव ने कहा कि ब्रह्मा उनके दाएँ अंग से और विश्वात्मा विष्णु उनके बाएँ अंग से उत्पन्न हुए हैं।#ब्रह्मा#विष्णु#शिव
शिव तत्त्वशिव सृष्टि, पालन और संहार कैसे करते हैं?महादेव ने कहा कि वे निष्कल परमेश्वर ही ब्रह्मा, विष्णु और भव रूपों में सृजन, पालन और संहार से युक्त हैं।#सृष्टि#पालन#संहार
शिव तत्त्वशिव के तीन रूप कौन से हैं?निष्कल परमेश्वर शिव ब्रह्मा, विष्णु और भव नामों से तीन रूपों में सृजन, पालन और संहार के गुणों से युक्त हैं।#शिव के तीन रूप#ब्रह्मा#विष्णु
शिव भक्तिब्रह्मा और विष्णु को शिव भक्ति कैसे मिली?महादेव के प्रसन्न होने पर विष्णु ने दृढ़ भक्ति का वर माँगा और महादेव ने दोनों को अचल श्रद्धा-भक्ति दी।#ब्रह्मा#विष्णु#शिव भक्ति
शिवलिंग पूजाशिवलिंग पूजा की शुरुआत कैसे हुई?ब्रह्मा-विष्णु को वर देकर महादेव के अन्तर्धान होने के बाद लोकों में शिवलिंग पूजन की प्रसिद्धि फैल गई।#शिवलिंग पूजा#महादेव#ब्रह्मा
स्तोत्र फलविष्णु स्तोत्र सुनाने से क्या फल मिलता है?विष्णु स्तोत्र को वेदपारगामी ब्राह्मणों को सुनाने वाला भी पापकर्म में लिप्त होने पर ब्रह्मलोक प्राप्त करता है।#विष्णु स्तोत्र#सुनाना#ब्राह्मण
स्तोत्र फलविष्णु स्तोत्र पढ़ने से क्या फल मिलता है?विष्णु स्तोत्र का पाठ करने वाला, पापकर्म में लिप्त होने पर भी, ब्रह्मलोक को प्राप्त करता है।#विष्णु स्तोत्र#स्तोत्र पाठ#पुण्य
विष्णु स्तुतिविष्णु ने शिव की स्तुति कैसे की?विष्णु ने शिव को अनेक नामों और रूपों से नमस्कार किया, जैसे प्रणवरूप रुद्र, महादेव, ईशान, लिंग, लिंगी, ओंकार और सर्वज्ञ।#विष्णु#शिव स्तुति#महेश्वर
विष्णु स्तुतिविष्णु स्तुति क्या है?विष्णु स्तुति वह स्तोत्र है जिसमें विष्णु ने रुद्र, शिव, महेश्वर, ओंकार, मोक्षदाता और विश्वगर्भ रूपों को नमस्कार किया।#विष्णु स्तुति#महेश्वर#शिव
शिव स्तुतिविष्णु ने शिव की स्तुति क्यों की?विष्णु ने वेद-वाक्य से शिव को जानकर, उमा-महेश्वर और पाँच मंत्रों का दर्शन पाकर वरदाता ईशान परमेश्वर की स्तुति की।#विष्णु#शिव स्तुति#महादेव
उमा-महेश्वरउमा-महेश्वर कैसे प्रकट हुए?ब्रह्मा-विष्णु की वैदिक स्तुति से प्रसन्न होकर महेश्वर लिंग में शब्दमय रूप से प्रकट हुए और उमा सहित दर्शन दिए।#उमा महेश्वर#महेश्वर#लिंग
त्रिदेव और ओम्ब्रह्मा, विष्णु और शिव का संबंध ओम् से कैसे बताया गया है?ओम् से अकाररूप ब्रह्मा, उकाररूप विष्णु और मकाररूप नीललोहित शिव का प्रादुर्भाव बताया गया है।#ब्रह्मा#विष्णु#शिव
प्रणव ओम्अकार, उकार और मकार का क्या अर्थ है?अकार से ब्रह्मा, उकार से विष्णु और मकार से परमेश्वर नीललोहित शिव का प्रादुर्भाव बताया गया है।#अकार#उकार#मकार
लिंग तत्त्वशिवलिंग का आदि और अंत क्यों नहीं मिला?लिंग क्षय-वृद्धि से रहित, अव्यक्त और आदि-मध्य-अन्त से हीन था, इसलिए उसका मूल या अंत नहीं मिला।#आदि अंत#अनन्त लिंग#ज्योतिर्लिंग
लिंग अन्वेषणविष्णु ने वाराह रूप क्यों लिया?विष्णु ने अग्नि-स्तंभ रूप लिंग का मूल खोजने के लिए वाराह रूप धारण किया और नीचे की ओर गए।#विष्णु#वाराह रूप#लिंग मूल
लिंग अन्वेषणब्रह्मा और विष्णु शिवलिंग का अंत क्यों नहीं पा सके?वह लिंग आदि-मध्य-अन्त से हीन और अवर्णनीय था, इसलिए ब्रह्मा ऊपर जाकर भी अंत और विष्णु नीचे जाकर भी मूल नहीं पा सके।#ब्रह्मा#विष्णु#अनादि अनन्त
ज्योतिर्लिंगज्योतिर्मय अग्नि-स्तंभ क्या था?ज्योतिर्मय अग्नि-स्तंभ वही लिंग था जो ब्रह्मा-विष्णु के कलह को दूर करने और ज्ञान देने के लिए प्रकट हुआ।#ज्योतिर्मय अग्नि स्तंभ#लिंग#ब्रह्मा
प्रलय वर्णनप्रलय जल में विष्णु कैसे थे?प्रलय जल में विष्णु योगात्मा, विश्वात्मा, सर्वात्मा, नारायण और शेषनाग की शय्या पर शयन करते हुए बताए गए हैं।#विष्णु#प्रलय जल#नारायण
ब्रह्मा-विष्णु विवादब्रह्मा और विष्णु में विवाद क्यों हुआ?विष्णु की माया से मोहित होकर ब्रह्मा और विष्णु दोनों ने स्वयं को सृष्टि, पालन और संहार का कर्ता कहा, इसलिए विवाद हुआ।#ब्रह्मा#विष्णु#विवाद
लिंगोद्भवशिवलिंग की उत्पत्ति कैसे हुई?ब्रह्मा और विष्णु के विवाद को दूर करने तथा ज्ञान देने के लिए समुद्र में ज्योतिर्मय, आदि-अन्तहीन लिंग प्रकट हुआ।#शिवलिंग#लिंगोद्भव#ब्रह्मा
श्रीमद्भागवतभीष्म के अनुसार कृष्ण नारायण कैसे हैं?भीष्म के अनुसार कृष्ण साक्षात आदिपुरुष नारायण हैं, जो यदुवंश में छिपकर लीला करते हैं और सबके आत्मा हैं।#कृष्ण नारायण#भीष्म#परमात्मा
श्रीमद्भागवतभीष्म पितामह ने कृष्ण को भगवान क्यों माना?भीष्म ने कृष्ण को भगवान इसलिए माना क्योंकि वे साक्षात नारायण, सबके आदिकारण, सर्वात्मा और अनन्य भक्तों पर कृपा करने वाले परमात्मा हैं।#भीष्म#कृष्ण भगवान#नारायण
श्रीमद्भागवतभीष्म पितामह और कृष्ण की कथा क्या है?भीष्म ने कृष्ण को साक्षात भगवान नारायण माना, युद्ध में उनका पार्थसारथी रूप याद किया और मृत्यु के समय उन्हीं में मन लगाया।#भीष्म और कृष्ण#कृष्ण#पार्थसारथी
श्रद्धा और शिवदर्शनशिवलिंग में ध्यान क्यों बताया गया है?क्योंकि शिव ने स्वयं कहा कि ब्रह्मा और विष्णु द्वारा देखे गए लिंग में ही सबको उनका ध्यान करना चाहिए।#शिवलिंग#ध्यान#श्रद्धा
श्रद्धा और शिवदर्शनशिव का ध्यान कहाँ करना चाहिए?शिव ने कहा कि ब्रह्मा और विष्णु ने समुद्र में जिस लिंग का दर्शन किया था, उसी में उनका ध्यान करना चाहिए।#शिव ध्यान#लिंग#श्रद्धा
शिवभक्तिब्रह्मा, विष्णु और देवताओं को उत्तम पद कैसे मिला?ब्रह्मा, विष्णु, इन्द्र और अन्य देवता शिवभक्ति से ही उत्तम पद को प्राप्त हुए।#ब्रह्मा#विष्णु#इन्द्र
शैव पद और वैराग्यशैव पद वैष्णव पद से परे क्यों कहा गया है?शैव पद वैष्णव पद से परे बताया गया है; उसे विष्णु भी नहीं जानते और शुद्ध शिवात्मक तत्त्व असंख्य गुणों वाला कहा गया है।#शैव पद#वैष्णव पद#शिवात्मक तत्त्व
नरक और महादेवमहादेव गुणों के अनुसार कौन-कौन से रूप धारण करते हैं?तमोगुण प्रधान होने पर वे कालरुद्र, रजोगुण प्रधान होने पर ब्रह्मा, सत्त्वगुण प्रधान होने पर विष्णु और गुणरहित होने पर महेश्वर रूप बताए गए हैं।#महादेव#तमोगुण#रजोगुण
श्रीमद्भागवतक्या भगवान के अवतार अनगिनत हैं?हाँ, भगवान हरि के अवतार असंख्य बताए गए हैं, जैसे विशाल सरोवर से हजारों धाराएँ निकलती हैं।#असंख्य अवतार#हरि#भगवान
श्रीमद्भागवतविराट पुरुष रूप कैसा है?विराट पुरुष रूप में समस्त लोकों की कल्पना है; योगी उसे हजारों पैर, भुजा, मुख, सिर, कान, आँख और आभूषणों से युक्त देखते हैं।#विराट पुरुष#पुरुष रूप#नारायण
श्रीमद्भागवतपुरुष अवतार क्या है?सृष्टि के आरंभ में भगवान ने महत्तत्त्व आदि से पुरुष रूप ग्रहण किया, जिसमें दस इंद्रियाँ, मन और पाँच भूत सोलह कलाएँ थीं।#पुरुष अवतार#नारायण#विराट रूप
श्रीमद्भागवतभगवान विष्णु के अवतारों की सूची क्या है?पुरुष, कुमार, वराह, नारद, नर-नारायण, कपिल, दत्तात्रेय, यज्ञ, ऋषभ, पृथु, मत्स्य, कूर्म, धन्वंतरि, मोहिनी, नरसिंह, वामन, परशुराम, व्यास, राम, बलराम-कृष्ण, बुद्ध और कल्कि का वर्णन है।#विष्णु अवतार#अवतार सूची#भागवत पुराण
श्रीमद्भागवतमोक्ष चाहने वालों को किसकी पूजा करनी चाहिए?मोक्ष चाहने वाले शांत और दोष-दृष्टि से रहित होकर सत्त्वगुणी विष्णु भगवान और उनके अंशों का भजन करते हैं।#मोक्ष#विष्णु पूजा#नारायण
श्रीमद्भागवतसत्त्वगुण क्यों जरूरी है?सत्त्वगुण चित्त को निर्मल करता है, भगवान का दर्शन कराने वाला है और मनुष्य का परम कल्याण श्रीहरि से होता है।#सत्त्वगुण#विष्णु#मन शुद्धि
श्रीमद्भागवतभागवत पढ़ने से पहले क्या करना चाहिए?भागवत पाठ से पहले नर-नारायण ऋषि, देवी सरस्वती और श्री व्यासदेव को प्रणाम करना बताया गया है।#भागवत पाठ#नारायण#सरस्वती
श्रीमद्भागवतकलियुग से पार पाने में हरि कथा कैसे मदद करती है?ऋषि कहते हैं कि कलियुग अंतःकरण की पवित्रता और शक्ति को नष्ट करता है; उससे पार जाने वालों के लिये सूतजी कर्णधार जैसे मिले हैं।#कलियुग#हरि कथा#सूतजी
ब्रह्मा कालब्रह्मा को नारायण क्यों कहा गया है?प्रलय की रात में ब्रह्माजी जलराशि में शयन करते हैं, इसलिए उन्हें नारायण कहा गया है।#ब्रह्मा#नारायण#प्रलय