शिव पूजाशिव पूजा के दौरान कौन सा मंत्र जपें?शिव पूजा मंत्र: पंचाक्षरी 'ॐ नमः शिवाय' — सर्वश्रेष्ठ, पाँच तत्त्वों के प्रतीक। महामृत्युंजय (ऋग्वेद 7.59.12) — रोग-मृत्यु-भय। श्री रुद्रम् (तैत्तिरीय संहिता 4.5) — उन्नत। शिव तांडव स्तोत्र — भक्ति। नित्य 108 जप। महामृत्युंजय 11 या 108 बार।#शिव पूजा#मंत्र#पंचाक्षरी
शिव पूजारुद्राभिषेक के दौरान कौन सा मंत्र पढ़ा जाता है?रुद्राभिषेक मंत्र: श्री रुद्रम् (नमकम्) — तैत्तिरीय संहिता 4.5 (11 अनुवाक)। चमकम् — तैत्तिरीय संहिता 4.7 (346 वर-प्रार्थना)। महामृत्युंजय (ऋग्वेद 7.59.12) — 108 बार। पंचाक्षरी — 'ॐ नमः शिवाय'। श्री रुद्रम् गुरु से सीखकर पढ़ें; गृहस्थ — पंचाक्षरी + महामृत्युंजय।
शिव पूजाजलाभिषेक के दौरान कौन सा मंत्र जपें?जलाभिषेक मंत्र: पंचाक्षरी — 'ॐ नमः शिवाय' (5 तत्त्वों के प्रतीक)। महामृत्युंजय (ऋग्वेद 7.59.12) — रोग-मृत्यु-भय निवारण। रुद्री (तैत्तिरीय संहिता 4.5) — उन्नत साधकों के लिए। गृहस्थ — 'ॐ नमो भगवते रुद्राय नमः।' भावना सर्वोपरि।#जलाभिषेक#मंत्र#ॐ नमः शिवाय
ध्यानध्यान के दौरान कौन सा मंत्र सबसे शक्तिशाली है?ध्यान मंत्र: ॐ (प्रणव) — सर्वोच्च, मांडूक्योपनिषद में 'सब कुछ'। गायत्री — बुद्धि-वृद्धि। महामृत्युंजय — स्वास्थ्य-दीर्घायु। सोऽहम् — निर्गुण ध्यान। इष्टदेव का मंत्र — व्यक्तिगत साधना के लिए सर्वश्रेष्ठ।#मंत्र#ध्यान#ॐ
गुरु दीक्षातंत्र साधना में गुरु दीक्षा क्यों जरूरी है?गुरु दीक्षा जरूरी: 'दीयते ज्ञानं क्षाल्यते पापं।' मंत्र में प्राण (बिना दीक्षा 'मृत मंत्र')। शक्तिपात (गुरु की वर्षों की शक्ति हस्तांतरण)। संस्कार शुद्धि। सुरक्षा। तंत्रालोक: 'दीक्षाहीन को न मंत्र सिद्धि, न शक्ति।'#दीक्षा#गुरु#शक्तिपात
तंत्र मंत्रतंत्र साधना के दौरान कौन सा मंत्र जपें?तंत्र मंत्र: काली — 'ॐ क्रीं काल्यै नमः'। भैरव — 'ॐ ह्रीं बटुकाय आपदुद्धारणाय।' त्रिपुर सुंदरी — 'ॐ ऐं ह्रीं श्रीं।' सर्वोच्च: श्री विद्या (पंचदशी — केवल गुरु दीक्षा से)। सर्वसुलभ: 'ॐ क्रीं काल्यै नमः।'#मंत्र#बीज मंत्र#काली
तंत्र और मंत्रतंत्र साधना में मंत्र की क्या भूमिका है?तंत्र में मंत्र: 'मंत्रो हि देवता स्वयम्।' पाँच भूमिकाएं: आवाहन, चक्र जागरण, बाधा निवारण (कवच), मंत्र सिद्धि (पुरश्चरण), ब्रह्म से एकता। 'मंत्रः सर्वस्य साधकः।'#मंत्र#भूमिका#बीज मंत्र
भैरव मंत्रभैरव मंत्र क्या है?भैरव मंत्र: मूल — 'ॐ ह्रीं बटुकाय आपदुद्धारणाय कुरुकुरु बटुकाय ह्रीं।' सरल — 'ॐ काल भैरवाय नमः।' बटुक — 'ॐ ह्रौं ह्रीं ह्रूं बटुकाय...।' नित्य 108, विशेष 1008 जप। फल: आपदाओं से रक्षा, शत्रु नाश।#भैरव मंत्र#काल भैरव#बटुक भैरव
पूजा विधिपूजा में जल कैसे अर्पित करें?जल अर्पण: तीन रूप — पाद्य (चरण धुलाई), अर्घ्य (हाथ धुलाई), आचमन (पेय)। विधि: तांबे पात्र में जल, दाहिने हाथ से, 'इदं पाद्यं/अर्घ्यं समर्पयामि' बोलते हुए। सूर्य: प्रातः पूर्व मुख, पतली धारा, गायत्री मंत्र।#जल अर्पण#विधि#मंत्र
पूजा विधिपूजा के दौरान क्या बोलना चाहिए?पूजा में बोलें: 'ॐ' से आरंभ, संकल्प ('पूजां करिष्ये'), आवाहन ('आगच्छ आगच्छ'), प्रत्येक उपचार पर 'इदं [उपचार] समर्पयामि', मंत्र जप, प्रार्थना, क्षमा ('अपराधसहस्राणि...')। संस्कृत न आए तो हिंदी में बोलें — भाव भाषा से अधिक महत्वपूर्ण।#पूजा में बोलना#मंत्र#संकल्प
पूजा विधिपूजा में कलश कैसे स्थापित करें?कलश स्थापना: ईशान कोण में, लाल कपड़े पर। कलश में: सुपारी, सिक्का, अक्षत, जल-गंगाजल। मुख पर 5-7 आम पत्ते। ऊपर नारियल। मंत्र: 'कलशस्य मुखे विष्णुः, कण्ठे रुद्रः...' नवरात्रि में कलश में देवी का आवाहन — यह देवी का अस्थायी निवास।#कलश स्थापना#विधि#नवरात्रि
पूजा विधिपूजा में जल अर्पण कैसे करें?जल अर्पण विधि: तांबे के पात्र में जल + एक बूँद गंगाजल। दोनों हाथों से चरणों में अर्पित करते हुए 'इदं पाद्यं समर्पयामि'। सूर्य अर्घ्य: प्रातः पूर्व मुख, पतली धारा, गायत्री मंत्र। शालिग्राम पर पतली धारा — बहुत जल नहीं।#जल अर्पण#विधि#तांबा
पूजा रहस्यपूजा के दौरान मंत्र क्यों पढ़े जाते हैं?मंत्र क्यों: मंत्र देवता का स्वरूप है — बोलने से देवता आह्वान होते हैं। संस्कृत ध्वनि तरंगें मस्तिष्क सक्रिय करती हैं। मन एकाग्र होता है। वातावरण शुद्ध होता है। गीता: मंत्र जप तप का अंग। 'ॐ इत्येतदक्षरमिदं सर्वम्' (मंडूक्य उपनिषद)।#मंत्र#कारण#ध्वनि शक्ति
भैरव साधनाभैरव मंत्र क्या है?भैरव के प्रमुख मंत्र: बटुक भैरव — 'ॐ बटुकाय आपदुद्धारणाय कुरु कुरु बटुकाय ॐ' (संकट नाश); 'ॐ ह्रीं बटुकाय नमः' (नित्य जप); काल भैरव — 'ॐ काल भैरवाय नमः'; भैरव गायत्री — 'ॐ भैरवाय विद्महे महाकालाय धीमहि।' नित्य 108 बार जप।#भैरव मंत्र#बटुक भैरव#काल भैरव
मंत्र ज्ञानहनुमान मंत्र क्या है?हनुमान जी का मूल मंत्र 'ॐ हं हनुमते नमः' है। बुद्धि-बल के लिए हनुमान गायत्री 'ॐ आंजनेयाय विद्महे...' जपें। संकट में 'ॐ नमो भगवते आंजनेयाय महाबलाय स्वाहा' और भूत-प्रेत भय में पंचमुखी हनुमान मंत्र जपें।#हनुमान मंत्र#हनुमान जप#वायुपुत्र मंत्र
मंत्र ज्ञानशिव जी का महामृत्युंजय मंत्र क्या है?महामृत्युंजय मंत्र है — 'ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्॥' यह ऋग्वेद (7.59.12) का मंत्र है। अर्थ — तीन नेत्रों वाले शिव हमें मृत्यु के बंधन से मुक्त करें।#महामृत्युंजय#मंत्र#ऋग्वेद
तंत्र उपायतंत्र में रोग मुक्ति के लिए कौन से मंत्र-यंत्र प्रभावी हैं?महामृत्युंजय मंत्र+यंत्र। धन्वंतरि मंत्र। सुदर्शन यंत्र। जप→जल→रोगी पिए। चिकित्सा विकल्प नहीं — सहायक। डॉक्टर अनिवार्य।#रोग#मुक्ति#मंत्र
ध्यान साधनाध्यान के दौरान मन को कैसे नियंत्रित करें?गीता (6/35) — 'अभ्यास और वैराग्य से मन वश में होता है।' ध्यान में मन को लड़कर नहीं — एक लंगर (ओम्/श्वास/इष्टदेव) से पकड़ें। मन भटके तो बिना खीझे वापस लाएं (गीता 6/26)। योगसूत्र (1/14) — दीर्घकाल, निरंतर और श्रद्धापूर्वक अभ्यास से मन दृढ़ होता है।#ध्यान#मन नियंत्रण#अभ्यास
ध्यान साधनाध्यान के दौरान कौन सा मंत्र जपें?ध्यान में सर्वश्रेष्ठ मंत्र ओम् है (माण्डूक्योपनिषद)। सोऽहम् — श्वास के साथ सबसे सरल। गायत्री — बुद्धि-शुद्धि के लिए। इष्टदेव-मंत्र — श्रद्धानुसार। गीता (10/25) — 'जपयज्ञोऽस्मि' — जप सर्वश्रेष्ठ यज्ञ है। गुरु-दीक्षित मंत्र का जप सर्वाधिक प्रभावशाली होता है।#मंत्र#ध्यान#ओम्
ध्यान साधनाध्यान और जप में क्या अंतर है?जप मंत्र की सक्रिय आवृत्ति है; ध्यान मन का शांत ठहराव। गीता (10/25) में जप को सर्वश्रेष्ठ यज्ञ कहा गया है। जप साधन है — जब जप गहरा होकर स्वतः रुक जाता है, तब ध्यान शुरू होता है। जप → मानसिक जप → अजपा-जप → ध्यान — यह क्रमिक यात्रा है।#ध्यान#जप#अंतर
वेद ज्ञानवेदों में मंत्रों का महत्व क्या है?वेदों में मंत्र नाद-ब्रह्म का स्वरूप हैं — शाश्वत ध्वनि-शक्ति जो देवताओं को आकर्षित करती और चित्त को शुद्ध करती है। गायत्री मंत्र (ऋग्वेद 3/62/10) 'वेद-माता' है। ॐ ब्रह्मांड की आदि-ध्वनि और ब्रह्म का प्रथम प्रकटीकरण है।#मंत्र#वेद#गायत्री
हिंदू धर्म दर्शनहिंदू धर्म में मंत्र का महत्व क्या है?हिंदू धर्म में मंत्र का अर्थ है मन को एकाग्र करने वाली दिव्य ध्वनि। ऋग्वेद में 10,552 मंत्र हैं। 'ॐ' सबसे मूल मंत्र है। गीता (10/25) में श्रीकृष्ण ने कहा — 'यज्ञानां जपयज्ञोऽस्मि' — सभी यज्ञों में जपयज्ञ मैं हूँ।#मंत्र#जप#ध्वनि
साधना विज्ञानसाधना क्या है?साधना का अर्थ है किसी आध्यात्मिक लक्ष्य की प्राप्ति के लिए नियमित अभ्यास। इसके चार मूल प्रकार हैं — मंत्र, तंत्र, यंत्र और योग साधना। साधना के लिए गुरु दीक्षा, श्रद्धा, नियमितता और सात्विक आचरण आवश्यक है।#साधना#सिद्धि#आध्यात्मिक अभ्यास
ग्रह मंत्रसूर्य मंत्र का जप कब और कैसे करें?बीज: 'ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः' 7,000। गायत्री = मूलतः सूर्य मंत्र। सूर्योदय, रविवार, सूर्य मुख, जल अर्घ्य, 108। उद्देश्य: आत्मविश्वास, पदोन्नति, नेत्र/हृदय, सूर्य शांति।#सूर्य#मंत्र#जप
मंत्र जप ज्ञानमंत्र चैतन्य क्या है और कैसे होता है?मंत्र सुप्त → नियमित जप → ऊर्जा संचय → चैतन्य (जागृत/सजीव) → फल। कारण: नियमित जप, शुद्ध उच्चारण, भक्ति, गुरु दीक्षा, सवा लाख। लक्षण: अजपा जप, शांति, दर्शन।#चैतन्य#मंत्र#जागरण
ज्योतिष उपायराहु दोष निवारण मंत्र?बीज: 'ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः' 108। मूल: 'ॐ रां राहवे नमः' 18000। दुर्गा मंत्र, गणपति अथर्वशीर्ष, महामृत्युंजय। शनि/बुधवार शाम। गोमेद(ज्योतिषी)।#राहु#मंत्र#निवारण
दशमहाविद्याबगलामुखी मंत्र का जप कैसे करें और कितनी बार?'ॐ ह्लीं बगलामुखी देव्यै ह्लीं ॐ नमः'। 108 दैनिक, सवा लाख अनुष्ठान। हल्दी माला। पीला: आसन/वस्त्र/फूल। मंगलवार/शनिवार। गुरु दीक्षा अनुशंसित। शुद्ध उच्चारण अनिवार्य।#बगलामुखी#मंत्र#जप
शिव पूजा विधिशिव पूजा में भस्म लगाने का सही तरीका और मंत्र क्या है?त्रिपुंड — तीन आड़ी रेखाएं ललाट पर (बाएं→दाएं)। तीन अंगुलियों से लगाएं। मंत्र: 'ॐ त्र्यायुषं जमदग्नेः...' (जाबालोपनिषद्) या 'ॐ नमः शिवाय'। यज्ञ/गोबर भस्म सर्वोत्तम। भस्म = वैराग्य, अनित्यता, अहंकार त्याग का प्रतीक।#भस्म#विभूति#त्रिपुंड
ज्योतिष मार्गदर्शनरत्न और मंत्र में कौन ज्यादा प्रभावी ग्रह शांति में?मंत्र > रत्न। मंत्र=आंतरिक, निःशुल्क, शुद्ध भक्ति, कोई हानि नहीं। रत्न=बाहरी, महँगा, गलत=हानि। सर्वोत्तम=मंत्र+दान+सेवा+कर्म। रत्न न खरीद सकें=मंत्र अकेला पर्याप्त।#रत्न#मंत्र#तुलना
मंत्र जप व्यावहारिकबच्चों के लिए सबसे सरल मंत्र कौन सा है?3-5 वर्ष: 'ॐ' (सरलतम), 'ॐ गणेशाय नमः', 'जय श्री राम'। 5-8: 'ॐ नमः शिवाय', 'हरे कृष्ण' (गीत)। 8+: गायत्री। खेल/गीत/कहानी। 5 मिनट/दिन। जबरदस्ती नहीं।#बच्चे#सरल#मंत्र
समस्या-स्तोत्रविवाह में देरी हो तो कौन सा पाठ?'ॐ उमामहेश्वराभ्यां नमः', सुंदरकांड(सीता खोज=जोड़ी), कात्यायनी मंत्र(नवरात्रि), शिव-पार्वती पूजा(सोमवार), मंगल शांति। सरल: सोमवार शिव+मंगल सुंदरकांड।#विवाह#देरी#पाठ
ज्योतिषग्रह शांति के लिए कौन से मंत्र जपने चाहिए?सार्वभौमिक: नवग्रह स्तोत्र, महामृत्युंजय, गायत्री। 9 ग्रह बीज: सूर्य (ह्रां), चंद्र (श्रां), मंगल (क्रां), बुध (ब्रां), गुरु (ग्रां), शुक्र (द्रां), शनि (प्रां), राहु (भ्रां), केतु (स्रां)। कुण्डली → ज्योतिषी → विशिष्ट ग्रह जप।#ग्रह शांति#नवग्रह#मंत्र
आधुनिक धर्मनास्तिक व्यक्ति मंत्र जप करे तो लाभ मिलेगा क्या?हाँ — आंशिक। ध्वनि कंपन=शरीर पर प्रभाव(आस्था-निरपेक्ष)। 'ॐ'=Vagus nerve→शांति। बिना श्रद्धा=शारीरिक/मानसिक। श्रद्धा सहित=+आध्यात्मिक। शुरू करें→लाभ देखकर आस्था आएगी।#नास्तिक#मंत्र#लाभ
अंतिम संस्कारमरते समय कौन सा मंत्र सुनाना चाहिए?गीता (8.5): अंतिम स्मरण = अगला जन्म। 'राम राम', 'ॐ नमो नारायणाय', 'ॐ नमः शिवाय', महामृत्युंजय, गीता 8/15 पाठ। गरुड़ पुराण: गंगाजल+तुलसी+तिल+गीता पास हों। कान में शांत स्वर में राम नाम।#मरते समय#मंत्र#गीता
मंत्र विधिसिद्ध मंत्र और असिद्ध मंत्र में क्या भेद है?सिद्ध = चैतन्य/जागृत (पुरश्चरण पूर्ण या गुरु दीक्षा) → शीघ्र फल। असिद्ध = निद्रित (बिना पुरश्चरण/दीक्षा) → विलंबित फल। सिद्ध कैसे: पुरश्चरण, गुरु दीक्षा, दीर्घकालीन नियमित जप। नाम जप (राम/कृष्ण) = सदा सिद्ध — दीक्षा अनिवार्य नहीं।#सिद्ध#असिद्ध#मंत्र
मंत्र विधिगर्भावस्था में कौन से मंत्र का जप करना शुभ है?शुभ: गायत्री (सर्वश्रेष्ठ), ॐ, विष्णु सहस्रनाम, 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' (अभिमन्यु गर्भ कथा), गीता पाठ, सुंदरकांड। नियम: सात्विक-शांत मंत्र, उग्र/तांत्रिक वर्जित। गर्भ उपनिषद: माता का जप = शिशु पर प्रभाव। चिकित्सा परामर्श + मंत्र = दोनों।#गर्भावस्था#गर्भ संस्कार#मंत्र
मंत्र प्रभावमंत्र जप से नींद अच्छी आती है क्या?हां। Melatonin ↑ (नींद हार्मोन), Cortisol ↓, Alpha waves ↑, Overthinking कम। सोने से पूर्व: ॐ 21 बार, सोहम (श्वास), 'ॐ नमः शिवाय' 108, राम नाम। लेटकर, आंखें बंद, धीमे। आयुर्वेद: मंत्र = वात शांति → नींद।#नींद#अनिद्रा#शांति
दैनिक कर्मसूर्य को जल देने की विधि — मंत्र?सूर्योदय, तांबा लोटा(जल+रोली+फूल), पूर्व मुख, खड़े, 'ॐ सूर्याय नमः' 11 बार, धीरे जल गिराएँ(इंद्रधनुष)। लाभ: स्वास्थ्य, आत्मविश्वास, विटामिन D।#सूर्य अर्घ्य#जल#विधि
हनुमानपंचमुखी हनुमान मंत्र का जप कैसे करें?5 मुख: वानर(शक्ति), नरसिंह(अभय), गरुड़(विष नाश), वराह(समृद्धि), हयग्रीव(ज्ञान)। 'ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ऐं हनुमते पंचवक्त्राय नमः'। मंगलवार/शनिवार, 108, सिंदूर+चमेली। 5 दिशा रक्षा।#पंचमुखी#हनुमान#मंत्र
कृष्ण भक्तिकृष्ण गायत्री मंत्र का जप कब करना चाहिए?'ॐ देवकीनन्दनाय विद्महे वासुदेवाय धीमहि तन्नो कृष्णः प्रचोदयात्'। कब: प्रातः, जन्माष्टमी, एकादशी, कार्तिक। तुलसी माला, पीले वस्त्र, 108। गोपाल तापनी: 'कृष्ण = परब्रह्म'।#कृष्ण गायत्री#मंत्र#भक्ति
आधुनिक धर्म प्रश्नमोबाइल पर मंत्र सुनने से जप फल मिलता है क्या?सुनना=श्रवण भक्ति(लाभकारी), पर स्वयं जप का विकल्प नहीं। स्वयं जप > सुनना। कंपन/वातावरण शुद्धि का लाभ। कुछ न करने से सुनना बेहतर। सुनना+जप=सर्वश्रेष्ठ।#मोबाइल#मंत्र#जप फल
तीर्थ दर्शनतीर्थ स्थल पर मंत्र जप का विशेष प्रभाव क्यों?संचित ऋषि ऊर्जा (हजारों वर्ष), शांत प्रकृति (एकाग्रता), सामूहिक कंपन, देवता सान्निध्य, शुद्ध भाव। तीर्थ 1 मंत्र = घर 1000 मंत्र।#तीर्थ#मंत्र#प्रभाव
स्त्री धर्मस्त्रियों का सबसे शक्तिशाली मंत्र?नवार्ण('ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुंडायै विच्चे')=सर्वश्रेष्ठ। गायत्री(बुद्धि), महालक्ष्मी(धन), कात्यायनी(विवाह), 'ॐ दुं दुर्गायै'(रक्षा)। सरलतम='ॐ'। जो मन स्पर्श=वही सबसे।#स्त्री#शक्तिशाली#मंत्र
मंत्र जप ज्ञानजन्म नक्षत्र के अनुसार मंत्र का चयन कैसे करें?27 नक्षत्र = 27 देवता। जन्म नक्षत्र → नक्षत्र देवता → मंत्र। आर्द्रा=रुद्र='ॐ नमः शिवाय', स्वाति=वायु=हनुमान। ज्योतिषी/गुरु से कुंडली→इष्ट→मंत्र। ज्योतिष आधारित।#नक्षत्र#जन्म#मंत्र
मंत्र जप ज्ञानराजसिक मंत्र क्या होते हैं और किस उद्देश्य से जपे जाते हैं?सात्विक (मोक्ष/ज्ञान): गायत्री, 'ॐ'। राजसिक (धन/शक्ति/सफलता): लक्ष्मी, बगलामुखी। तामसिक (मारण/नाश): वर्जित। सात्विक > राजसिक > तामसिक। राजसिक = मान्य किन्तु बंधनकारी।#राजसिक#मंत्र#उद्देश्य
ग्रह मंत्रसूर्य गायत्री मंत्र का जप कैसे करें?गायत्री मंत्र = मूलतः सूर्य (सवितृ) मंत्र ही। विशिष्ट: 'ॐ आदित्याय विद्महे...' सूर्योदय, सूर्य मुख, अर्घ्य सहित, 108 बार, रविवार। उद्देश्य: सूर्य शांति, नेत्र/हृदय, आत्मविश्वास, पदोन्नति।#सूर्य गायत्री#सूर्य#ग्रह
मंत्र जप विधिमंत्र जप में करन्यास और अंगन्यास कैसे करें?करन्यास: 6 अंगुली/करतल (अंगूठा→कनिष्ठिका+करतल) + 'नमः/स्वाहा/वषट्/हुं/वौषट्/फट्'। अंगन्यास: 6 शरीर (हृदय/मस्तक/शिखा/कवच/नेत्र/अस्त्र)। प्रत्येक पर बीज + स्पर्श।#करन्यास#अंगन्यास#विधि
आधुनिक धर्म प्रश्नमंत्र जप से बिना मेहनत सफलता मिलती है क्या?नहीं। मंत्र=शांति+एकाग्रता+बुद्धि+कृपा, पर मेहनत का विकल्प नहीं। गीता: 'अपना उद्धार स्वयं करो।' मंत्र=ईंधन, मेहनत=इंजन। कृष्ण ने गीता सुनाकर कहा=अब लड़ो!#मंत्र#बिना मेहनत#सफलता
लक्ष्मी मंत्रलक्ष्मी गायत्री मंत्र का जप धन प्राप्ति के लिए कैसे करें?'ॐ महादेव्यै च विद्महे विष्णुपत्न्यै च धीमहि। तन्नो लक्ष्मीः प्रचोदयात्।' 108 बार, स्फटिक माला। शुक्रवार/पूर्णिमा। 40 दिन अनुष्ठान। धन+व्यापार+ऋण मुक्ति।#लक्ष्मी गायत्री#धन#जप
नवदुर्गाशैलपुत्री की पूजा विधि और मंत्र क्या है?नवरात्रि दिन 1। हिमालय पुत्री, वृषभ वाहन, त्रिशूल+कमल। मंत्र: 'ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः'। भोग: शुद्ध घी। रंग: पीला। मूलाधार चक्र। कथा: सती → पुनर्जन्म → हिमालय पुत्री → शिव विवाह।#शैलपुत्री#प्रथम#नवरात्रि