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साधना से जुड़े सभी प्रश्न(105)

साधना पर शास्त्रीय व्याख्या, विधि, नियम, मंत्र और लाभ — सब एक ही स्थान पर। कुल 105 प्रश्न उपलब्ध हैं।

साधना मार्ग

ध्यान में मन नहीं टिकता तो क्या करें?

ध्यान में मन का भटकना स्वाभाविक है। गीता 6.26 — 'मन जहाँ जाए वहाँ से लौटाते रहो।' उपाय: पहले प्राणायाम करें, श्वास को आधार बनाएं, नियमित समय-स्थान रखें, मन दबाएं नहीं बल्कि साक्षी भाव से देखें। धैर्य और नियमितता ही एकमात्र उपाय है।

#ध्यान#मन की चंचलता#योगसूत्र
जप नियम

चलते-फिरते मंत्र जप करने के क्या नियम हैं

चलते-फिरते केवल मानसिक जप करना चाहिए। यह निरंतर परमात्मा से जुड़े रहने का एक प्रभावी तरीका है।

#नियम#अजपा जप#मानसिक जप
भक्ति एवं आध्यात्म

भगवान का अनुभव कैसे करें

नाम-जप, सत्संग, निस्वार्थ सेवा, ध्यान और शरणागति — ये पाँच मुख्य मार्ग हैं। श्रीमद्भागवत के अनुसार कलियुग में हरि-नाम संकीर्तन सबसे सुलभ साधन है।

#भगवान अनुभव#साधना#भक्ति
गृहस्थ धर्म

वृद्धावस्था आध्यात्मिक साधना कैसे शुरू

सर्वोत्तम समय। 'राम' जप/गीता 1 श्लोक/हनुमान चालीसा/सत्संग/ध्यान 15 min। शारीरिक सीमा=लेटकर जप/audio। गीता 9.22: अनन्य भक्तों=ईश्वर वहन। देर कभी नहीं।

#वृद्धावस्था#साधना#शुरू
महिला एवं धर्म

स्त्री धर्म में तांत्रिक साधनाएं

तंत्र=स्त्री सर्वोपरि। योगिनी=स्त्री गुरु; 64 योगिनी मंदिर। दश महाविद्या। श्री विद्या=ललिता। कुमारी पूजा। सावधानी: योग्य गुरु अनिवार्य; वामाचार=अशुद्ध।

#स्त्री#तंत्र#साधना
तंत्र साधना

तंत्र साधना के लिए सबसे उत्तम ऋतु कौन सी है

तंत्र ऋतु: शरद (अक्टूबर-नवम्बर) = सर्वश्रेष्ठ (शारदीय नवरात्रि, दीपावली)। वसन्त (मार्च-अप्रैल) = चैत्र नवरात्रि। विशेष: दीपावली/होली/शिवरात्रि रात्रि, ग्रहण, पूर्णिमा/अमावस्या। ऋतु से अधिक = तैयारी + गुरु आदेश + नियमितता।

#तंत्र#ऋतु#शरद
तंत्र साधना

तंत्र में पूर्णिमा और अमावस्या की साधना में क्या भेद है

पूर्णिमा = सौम्य/सात्विक: प्रकाश, शान्ति, ज्ञान, विष्णु/लक्ष्मी/गुरु। अमावस्या = उग्र/तामसिक: अन्धकार, गोपनीय शक्ति, काली/भैरव, पितृ। दीपावली = सबसे शक्तिशाली अमावस्या। पूर्णिमा = सभी, अमावस्या = उन्नत/दीक्षित। दोनों में सात्विक जप-ध्यान शुभ।

#पूर्णिमा#अमावस्या#तंत्र
तंत्र साधना

तंत्र में दिगम्बर साधना क्या होती है

दिगम्बर साधना = निर्वस्त्र साधना। दिक् + अम्बर = दिशा ही वस्त्र। अर्थ: संसार/अहंकार त्याग, मूल प्रकृति। शक्ति (काली/तारा), अघोर, वामाचार परम्परा में। अत्यन्त उन्नत/गोपनीय — गुरु दीक्षा अनिवार्य, एकान्त, सामान्य भक्तों हेतु नहीं।

#दिगम्बर#साधना#तंत्र
मंत्र साधना

मंत्र जप के बाद शरीर में ऊर्जा का अनुभव कितने दिन तक रहता है?

मंत्र ऊर्जा अवधि: 1 माला = कुछ घण्टे। नित्य जप = स्थायी संचय। अनुष्ठान (सवालक्ष) = सप्ताह-माह। सिद्धि = स्थायी। पतंजलि: दीर्घकाल + निरंतरता + श्रद्धा = दृढ़ अभ्यास। व्यक्ति-सापेक्ष — धैर्य रखें।

#मंत्र ऊर्जा#जप प्रभाव#अनुभव
मंत्र साधना

मंत्र जप करते समय पसीना आने का क्या कारण है

जप में पसीना: (1) ऊर्जा जागृति — प्राणशक्ति ताप = शुभ संकेत। (2) तप = ताप, पाप जलना। (3) शरीर शुद्धि — अशुद्धि बाहर। व्यावहारिक: एकाग्रता → तापमान वृद्धि, प्राणायाम। सामान्य और शुभ — जप जारी रखें। अत्यधिक हो तो विश्राम + जल।

#मंत्र जप#पसीना#ऊर्जा
शिव पूजा

शिव मंत्र जप के दौरान पानी पी सकते हैं या नहीं?

जप बीच में पानी: एक माला (108) बीच में न पिएँ। माला पूर्ण करके आचमन (3 घूँट) कर सकते हैं। दीर्घ अनुष्ठान में माला पूर्ण → 'ॐ' → आचमन → पुनः जप। बात न करें, न उठें। एकाग्रता सर्वोपरि।

#मंत्र जप#जल#नियम
आध्यात्मिक साधना

आध्यात्मिक साधना में अहंकार कैसे बाधक बनता है?

अहंकार बाधक: (1) 'मैं'=ईश्वर से दीवार (2) आध्यात्मिक अहंकार=सबसे खतरनाक (सूक्ष्म) (3) गुरु अस्वीकार (4) सिद्धियों में उलझना (5) तुलना। गीता: अहंकार=आसुरी। कबीर: 'जब मैं था तब हरि नहीं।' उपाय: निःस्वार्थ सेवा, गुरु-शरणागति, कृतज्ञता, सत्संग, साक्षी भाव।

#अहंकार#बाधा#साधना
मंत्र सिद्धि

गुरु मंत्र सिद्धि कैसे प्राप्त करें?

गुरु मंत्र = दीक्षा-समय गुरु द्वारा दिया मंत्र। कुलार्णव: गुरु-दत्त मंत्र सर्वश्रेष्ठ — इसमें गुरु-शक्ति पहले से। सिद्धि का मूल: गुरु में श्रद्धा और भक्ति। गुरुपूर्णिमा पर विशेष जप। संख्या से अधिक महत्वपूर्ण: गुरु-आज्ञा पालन। गुरु-दत्त = जीवित मंत्र।

#गुरु मंत्र#दीक्षा मंत्र#गुरु कृपा
ध्यान

ध्यान करने के लिए कौन सा वातावरण सबसे अच्छा है?

ध्यान वातावरण: गीता (6.11-12) — शुद्ध, एकांत, मध्यम ऊँचाई का आसन। हठयोग प्रदीपिका — शांत, न अत्यधिक ठंडा/गर्म, स्वच्छ। शिव संहिता — नदी-संगम, पर्वत, वन, देवालय। घर में — पूजा कक्ष, पूर्व/उत्तर मुख, तुलसी के निकट। मन शुद्ध हो तो स्थान गौण।

#ध्यान#वातावरण#स्थान
ध्यान

ध्यान के दौरान कितनी देर बैठना चाहिए?

ध्यान अवधि: नवीन — 10-15 मिनट। 6 माह बाद — 20-30 मिनट। 1 वर्ष+ — 45-60 मिनट। शिव संहिता: 12 धारणा = 1 ध्यान (48 मिनट)। ब्रह्म मुहूर्त सर्वोत्तम। गुणवत्ता > अवधि। अभ्यास क्रमशः बढ़ाएँ।

#ध्यान#समय#अवधि
ध्यान

ध्यान के दौरान कौन सा रंग पहनना चाहिए?

ध्यान हेतु वस्त्र: श्वेत — सात्विकता, शुद्धता (सर्वाधिक अनुशंसित)। पीत — वैष्णव परंपरा। भगवा — शैव/तांत्रिक परंपरा। काला — सामान्यतः वर्जित (तमोगुण)। सूती/ऊनी श्रेष्ठ। शुद्धता और भावना सर्वोपरि।

#ध्यान#वस्त्र#रंग
काली तंत्र

काली तंत्र साधना क्या है?

काली तंत्र: काली = दस महाविद्याओं में प्रथम। उद्देश्य: महाशक्ति से एकता, मृत्यु-भय निवारण, शत्रु रक्षा, मोक्ष। विशेषता: निर्भयता अनिवार्य। मंत्र: 'ॐ क्रीं काल्यै नमः।' नवार्ण: 'ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे।' अमावस्या रात्रि — सर्वश्रेष्ठ।

#काली#तंत्र#महाविद्या
भैरव साधना

भैरव साधना कैसे करें?

भैरव साधना: शनिवार रात्रि/अमावस्या। काले तिल, उड़द, सरसों तेल दीपक (5 बाती)। काल भैरव अष्टकम् पाठ। मंत्र: 'ॐ ह्रीं बटुकाय आपदुद्धारणाय कुरुकुरु बटुकाय ह्रीं।' 108 जप। नैवेद्य: उड़द + काले तिल। फल: बाधा-शत्रु से रक्षा।

#भैरव#विधि#पूजा
तंत्र सिद्धि

तंत्र साधना से सिद्धि कैसे मिलती है?

तंत्र सिद्धि के पाँच अंग: गुरु कृपा, देव कृपा, पुरश्चरण, श्रद्धा और नित्यता। सिद्धि का क्रम: मंत्र स्थापना → जागृति (अजपा जप) → सिद्धि। संकेत: गहरी शांति, स्वप्न दर्शन, स्वतः जप। महानिर्वाण तंत्र: 'श्रद्धा से जपने पर सिद्धि में विलंब नहीं।'

#तंत्र सिद्धि#मंत्र सिद्धि#साधना
तंत्र परिचय

तंत्र और मंत्र में क्या अंतर है?

मंत्र = पवित्र ध्वनि (तंत्र का एक अंग)। तंत्र = सम्पूर्ण साधना प्रणाली जिसमें मंत्र + यंत्र + क्रिया तीनों शामिल हैं। केवल 'ॐ नमः शिवाय' जपना = मंत्र साधना; शिव यंत्र + मंत्र + हवन + अभिषेक = तंत्र साधना।

#तंत्र मंत्र अंतर#परिभाषा#यंत्र
तंत्र परिचय

तंत्र साधना क्या होती है?

तंत्र एक प्राचीन साधना परंपरा है जिसमें शरीर, मन और ब्रह्मांडीय शक्ति के संयोग से मोक्ष का मार्ग बताया गया है। इसके दो मार्ग हैं — दक्षिणाचार (सात्विक, सभी के लिए) और वामाचार (उच्च दीक्षित के लिए)। तंत्र का अंतिम लक्ष्य मोक्ष है।

#तंत्र#साधना#परिचय
मंत्र सिद्धि

मंत्र सिद्धि कैसे प्राप्त करें?

मंत्र सिद्धि के लिए: गुरु से दीक्षा लें, पुरश्चरण (सवा लाख जप + दशांश हवन + तर्पण + मार्जन + ब्राह्मण भोजन) पूरा करें। पुरश्चरण काल में ब्रह्मचर्य, गोपनीयता और नित्य एक समय जप आवश्यक है। सिद्धि के संकेत: अलौकिक सुगंध, दिव्य प्रकाश और गहरी शांति।

#मंत्र सिद्धि#पुरश्चरण#साधना
जप विधि

मंत्र जप की सही विधि क्या है?

मंत्र जप से पूर्व स्नान, शांत स्थान, कुश आसन, पूर्व मुख, संकल्प और गुरु स्मरण करें। माला को अनामिका और अंगूठे से पकड़ें, तर्जनी न लगाएं। मानसिक जप सर्वोत्तम है। जप के बाद माला सिर से लगाकर देवता को अर्पित करें।

#मंत्र जप#विधि#साधना
साधना विधि

गणपति मंत्र जप कैसे करें?

लाल आसन पर पूर्व/उत्तर मुख करके, रुद्राक्ष माला से, गणेश ध्यान करते हुए 'ॐ गं गणपतये नमः' जपें। अनामिका और अंगूठे से माला पकड़ें। ब्रह्ममुहूर्त या बुधवार को जप विशेष फलदायी है। जप से पूर्व गणपति अथर्वशीर्ष का पाठ करें।

#गणपति जप#मंत्र जप विधि#साधना
साधना विधि

दुर्गा मंत्र जप कैसे करें?

लाल आसन पर पूर्व/उत्तर मुख करके बैठें, रुद्राक्ष माला से नवार्ण मंत्र (ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुंडायै विच्चे) या 'ॐ दुं दुर्गायै नमः' का 108 बार जप करें। तर्जनी माला को न छुए। नवरात्रि में 1008 बार जप विशेष फलदायी है।

#मंत्र जप#दुर्गा मंत्र#विधि
साधना विधि

महामृत्युंजय मंत्र जप की विधि क्या है?

कुश आसन पर पूर्व/उत्तर दिशा में बैठकर, रुद्राक्ष माला से, शिव का ध्यान करते हुए महामृत्युंजय मंत्र का जप करें। तर्जनी से माला न स्पर्श करें। जप के बाद दशांश हवन करें।

#महामृत्युंजय जप#विधि#साधना
साधना विधि

शिव पंचाक्षरी मंत्र की सिद्धि कैसे करें?

गुरु दीक्षा लेकर ब्रह्ममुहूर्त में रुद्राक्ष माला से 'ॐ नमः शिवाय' का सवा लाख जप (पुरश्चरण) करें। ब्रह्मचर्य, सात्विक आहार और दशांश हवन के साथ यह साधना पूर्ण होती है।

#मंत्र सिद्धि#पंचाक्षरी#साधना
ध्यान साधना

ध्यान और जप में क्या अंतर है?

जप मंत्र की सक्रिय आवृत्ति है; ध्यान मन का शांत ठहराव। गीता (10/25) में जप को सर्वश्रेष्ठ यज्ञ कहा गया है। जप साधन है — जब जप गहरा होकर स्वतः रुक जाता है, तब ध्यान शुरू होता है। जप → मानसिक जप → अजपा-जप → ध्यान — यह क्रमिक यात्रा है।

#ध्यान#जप#अंतर
ध्यान साधना

ध्यान क्या होता है और इसे कैसे करें?

ध्यान वह अवस्था है जिसमें चित्त बिना भटके एक विषय पर टिका रहे (योगसूत्र 3/2)। विधि — शांत स्थान, सीधा आसन, श्वास-साधना, फिर ओम्/इष्टदेव/श्वास पर एकाग्रता। गीता (6/15) के अनुसार नियमित ध्यान से परम शांति और निर्वाण मिलता है।

#ध्यान#परिभाषा#विधि
शास्त्र ज्ञान

उपनिषद में साधना का महत्व क्या है?

उपनिषदों में साधना का मूल मार्ग है — श्रवण → मनन → निदिध्यासन (बृहदारण्यक 4/4/22)। साधन-चतुष्टय — विवेक, वैराग्य, षट्सम्पत्ति और मुमुक्षुत्व — वेदांत साधना के चार अनिवार्य अंग हैं। छान्दोग्य (7/26) — आहार-शुद्धि से मन-शुद्धि और मन-शुद्धि से ब्रह्म-साक्षात्कार।

#साधना#उपनिषद#श्रवण
वेद ज्ञान

वेदों में साधना का महत्व क्या है?

वेदों में साधना के रूप हैं — स्वाध्याय, उपासना, यज्ञ, ब्रह्मचर्य और मंत्र-जप। तैत्तिरीय उपनिषद (1/9) में स्वाध्याय-प्रवचन को अनिवार्य साधना बताया गया है। वैदिक साधना का लक्ष्य बाह्य अनुष्ठान नहीं — ब्रह्म-साक्षात्कार है।

#साधना#वेद#उपासना
वेद ज्ञान

वेदों में मंत्रों का महत्व क्या है?

वेदों में मंत्र नाद-ब्रह्म का स्वरूप हैं — शाश्वत ध्वनि-शक्ति जो देवताओं को आकर्षित करती और चित्त को शुद्ध करती है। गायत्री मंत्र (ऋग्वेद 3/62/10) 'वेद-माता' है। ॐ ब्रह्मांड की आदि-ध्वनि और ब्रह्म का प्रथम प्रकटीकरण है।

#मंत्र#वेद#गायत्री
योग दर्शन

हिंदू धर्म में ध्यान कैसे किया जाता है?

गीता (6/11-15) और योगसूत्र के अनुसार ध्यान के लिए — एकांत स्थान, उचित आसन, प्राणायाम, इष्ट विषय पर धारणा और नियमित अभ्यास आवश्यक है। ध्यान का उद्देश्य चित्त की एकाग्रता और अंततः समाधि एवं मोक्ष की प्राप्ति है।

#ध्यान#मेडिटेशन#साधना
साधना विज्ञान

हिंदू धर्म में तपस्या क्यों की जाती है?

हिंदू धर्म में तपस्या शरीर, वाणी और मन की शुद्धि, इंद्रिय-निग्रह तथा आध्यात्मिक शक्ति प्राप्ति के लिए की जाती है। गीता (17/14-16) में शारीरिक, वाचिक और मानसिक — तीन प्रकार के तप का वर्णन है।

#तपस्या#तप#साधना
हिंदू धर्म दर्शन

हिंदू धर्म में साधना क्यों की जाती है?

हिंदू धर्म में साधना इसलिए की जाती है ताकि आत्मज्ञान, कर्मक्षय और अंततः मोक्ष (जन्म-मरण से मुक्ति) प्राप्त हो सके। यह ईश्वर से संबंध जोड़ने और जीवन के परम लक्ष्य को साधने का मार्ग है।

#साधना#हिंदू धर्म#सिद्धि
हिंदू धर्म दर्शन

हिंदू धर्म में मंत्र का महत्व क्या है?

हिंदू धर्म में मंत्र का अर्थ है मन को एकाग्र करने वाली दिव्य ध्वनि। ऋग्वेद में 10,552 मंत्र हैं। 'ॐ' सबसे मूल मंत्र है। गीता (10/25) में श्रीकृष्ण ने कहा — 'यज्ञानां जपयज्ञोऽस्मि' — सभी यज्ञों में जपयज्ञ मैं हूँ।

#मंत्र#जप#ध्वनि
साधना विज्ञान

साधना क्या है?

साधना का अर्थ है किसी आध्यात्मिक लक्ष्य की प्राप्ति के लिए नियमित अभ्यास। इसके चार मूल प्रकार हैं — मंत्र, तंत्र, यंत्र और योग साधना। साधना के लिए गुरु दीक्षा, श्रद्धा, नियमितता और सात्विक आचरण आवश्यक है।

#साधना#सिद्धि#आध्यात्मिक अभ्यास
कुंडलिनी

तंत्र में स्वाधिष्ठान चक्र की साधना कैसे करें?

दूसरा चक्र — 6 दल, नारंगी, जल, बीज 'वं'। 'ॐ वं वं स्वाधिष्ठान जाग्रय...'। लक्षण: इन्द्रिय नियंत्रण, रचनात्मकता। सावधानी: अहंकार। गुरु।

#स्वाधिष्ठान#चक्र#साधना
देवी भक्ति

देवी मां के दर्शन की तीव्र इच्छा हो तो कौन सा उपाय करें?

नवरात्रि 9 दिन + सप्तशती + नवार्ण 1008। सवा लाख जप 40 दिन। ललिता सहस्रनाम। शक्तिपीठ दर्शन। सबसे सरल: समर्पण — 'मां, मैं तेरी शरण' — निश्छल प्रार्थना।

#दर्शन#इच्छा#उपाय
नवरात्रि

गुप्त नवरात्रि में किस देवी की साधना सबसे प्रभावी होती है?

दशमहाविद्या (विशेषतः काली/बगलामुखी/तारा)। तांत्रिक साधना — गुरु दीक्षा अनिवार्य। सामान्य भक्त: दुर्गा सप्तशती + नवार्ण मंत्र + नवदुर्गा पूजा। बिना गुरु = हानिकारक।

#गुप्त नवरात्रि#साधना#तांत्रिक
तंत्र शास्त्र

तंत्र साधना करते समय भय लगने पर क्या करें?

तत्काल: हनुमान चालीसा, 'ॐ नमः शिवाय', 'हूं फट्' 3 बार, गुरु स्मरण, तेज प्रकाश। दीर्घ: गुरु से पूछें, कवच पाठ, सरल साधना से आरंभ। अत्यधिक भय = तैयार नहीं/मानसिक स्वास्थ्य जांचें। गीता: ईश्वर शरणागति = भय मुक्ति।

#भय#साधना#उपाय
तंत्र उपाय

तंत्र में संतान प्राप्ति के लिए कौन सी साधना बताई गई है?

संतान गोपाल मंत्र ('ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ग्लौं देवकीसुत...')। पुत्रदा एकादशी। स्कंदमाता (दिन 5)। गर्भ गौरी व्रत। शिव-पार्वती। चिकित्सा समानांतर — सहायक, विकल्प नहीं।

#संतान#प्राप्ति#साधना
मंत्र विधि

मंत्र शक्ति को बढ़ाने के लिए क्या उपाय करें?

उपाय: (1) नियमितता = सबसे महत्वपूर्ण। (2) संख्या क्रमशः बढ़ाएं। (3) पुरश्चरण। (4) विशेष तिथि (नवरात्रि/ग्रहण)। (5) ब्रह्मचर्य+सात्विक। (6) गुरु कृपा। (7) श्रद्धा भाव। (8) मौन व्रत। (9) एकाग्रता (जप+ध्यान)। (10) गोपनीयता।

#शक्ति#बढ़ाना#उपाय
आध्यात्मिक साधना

आध्यात्मिक साधना में अहंकार कैसे बाधक बनता है?

अहंकार बाधक: (1) 'मैं'=ईश्वर से दीवार (2) आध्यात्मिक अहंकार=सबसे खतरनाक (सूक्ष्म) (3) गुरु अस्वीकार (4) सिद्धियों में उलझना (5) तुलना। गीता: अहंकार=आसुरी। कबीर: 'जब मैं था तब हरि नहीं।' उपाय: निःस्वार्थ सेवा, गुरु-शरणागति, कृतज्ञता, सत्संग, साक्षी भाव।

#अहंकार#बाधा#साधना
देवी साधना

देवी मंत्र सिद्ध होने के क्या लक्षण होते हैं?

लक्षण: जप में अलौकिक आनंद, अजपा जप (स्वतः गूंजना), स्वप्न में देवी दर्शन, शरीर में रोमांच/कंपन, जीवन में सकारात्मक बदलाव, मानसिक शांति-निर्भयता, अंतर्ज्ञान वृद्धि, दिव्य सुगंध/प्रकाश। सावधानी: गोपनीय रखें, अहंकार न करें, गुरु से पुष्टि करें, भ्रम से बचें।

#मंत्र सिद्धि#लक्षण#साधना
दशमहाविद्या

दस महाविद्याओं के नाम और उनकी साधना का क्रम क्या है?

10 नाम: काली→तारा→षोडशी→भुवनेश्वरी→छिन्नमस्ता→भैरवी→धूमावती→बगलामुखी→मातंगी→कमला। काली कुल: काली/तारा/भुवनेश्वरी/छिन्नमस्ता। श्री कुल: शेष 6। उग्र/सौम्य/सौम्य-उग्र 3 श्रेणी।

#दस महाविद्या#नाम#क्रम
तंत्र उपाय

तंत्र साधना में बुरे सपने आने पर क्या उपाय करें?

ऊर्जा transition = सामान्य। शयन पूर्व: महामृत्युंजय/चालीसा, कवच, रुद्राक्ष/यंत्र शिर पास, गंगाजल, दिग्बंधन। लगातार = गुरु (विधि त्रुटि?)।

#बुरे सपने#उपाय#तंत्र
मंत्र विधि

मंत्र जप की डायरी रखनी चाहिए या नहीं?

हां, उपयोगी। लिखें: तिथि, मंत्र, संख्या, समय, अनुभव। लाभ: प्रगति ट्रैकिंग (अनुष्ठान), प्रेरणा, अनुशासन, गुरु रिपोर्ट। गोपनीय रखें। अहंकार नहीं। जप > डायरी। Pauranik ऐप: जप ट्रैकर = good feature।

#डायरी#रिकॉर्ड#गिनती
तंत्र शास्त्र

तंत्र में दैनिक साधना क्या होनी चाहिए?

दीक्षित: स्नान→संध्या→गुरु पूजन→इष्ट पूजा→न्यास→मंत्र जप (1-11 माला)→ध्यान→क्षमा। सायं: जप+दीपक+स्तोत्र। सामान्य: स्नान→दीपक→108 जप→10 मिनट ध्यान→क्षमा। नियमितता = सबसे महत्वपूर्ण।

#दैनिक#नित्य#साधना
दशमहाविद्या

तारा महाविद्या की साधना कैसे करें और इसके क्या लाभ हैं?

दूसरी महाविद्या — 'तारने वाली'। नीलवर्णा, वशिष्ठ प्रथम उपासक। बीज: 'ॐ ह्रीं स्त्रीं हुं फट'। रात्रि साधना, नीला आसन/वस्त्र। लाभ: वाक् सिद्धि, आर्थिक+मोक्ष, ज्ञान। गुरु आवश्यक।

#तारा#साधना#विधि
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