विस्तृत उत्तर
अम्बरीष महाराज और दुर्वासा मुनि का प्रसंग भक्ति और तप के अंतर को प्रकट करता है। दुर्वासा मुनि महान योगी थे, पर क्रोध में उन्होंने अम्बरीष का अनिष्ट चाहा। अम्बरीष महाराज महान राजा थे, पर अत्यंत विनम्र भक्त थे। उन्होंने कोई प्रतिकार नहीं किया। सुदर्शन चक्र ने भक्त की रक्षा की और दुर्वासा का पीछा किया। तीनों लोकों में भटकने के बाद दुर्वासा को समझ आया कि भगवान के भक्त का अपमान साधारण बात नहीं है। अम्बरीष ने उन्हें क्षमा करके बचाया। यह प्रसंग बताता है कि भक्ति में विनम्रता तप के अहंकार से श्रेष्ठ है।
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