विस्तृत उत्तर
अम्बरीष ने एक साल भोजन इसलिए नहीं किया क्योंकि वे दुर्वासा ऋषि को भोजन कराए बिना स्वयं भोजन करना उचित नहीं मानते थे। दुर्वासा सुदर्शन चक्र से बचने के लिए तीनों लोकों में भागते रहे और पृथ्वी पर लौटने में एक वर्ष बीत गया। इस पूरे समय अम्बरीष ने अतिथि की प्रतीक्षा की। उन्होंने केवल जल पर रहकर संयम रखा। यह उनके अतिथि-धर्म, धैर्य और विनम्रता का अद्भुत उदाहरण है। दुर्वासा लौटे, तब अम्बरीष ने पहले उन्हें भोजन कराया और उनकी आज्ञा के बाद स्वयं पारण पूर्ण किया।
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