विस्तृत उत्तर
भस्मासुर कथा में दोनों रूप मिलते हैं, लेकिन उनका स्रोत अलग है। श्रीमद्भागवत महापुराण के वृकासुर प्रसंग में भगवान विष्णु तेजस्वी ब्रह्मचारी रूप धारण करते हैं। वे तर्क और वाणी से असुर को भ्रमित कर उसके सिर पर हाथ रखवा देते हैं। दूसरी ओर लोककथा और कुछ शिव-पुराण संबंधी परंपराओं में विष्णु मोहिनी रूप लेते हैं। मोहिनी नृत्य और आकर्षण से भस्मासुर को अपनी नकल करने पर विवश करती हैं। दोनों कथाओं का मूल संदेश समान है: विष्णु की माया से असुर अपने ही वरदान से नष्ट होता है और शिव जी की रक्षा होती है।
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