विस्तृत उत्तर
भस्मासुर नाम उसके विनाशकारी वरदान से जुड़ा है। श्रीमद्भागवत में वह वृकासुर कहलाता है, लेकिन लोकमानस ने उसे भस्मासुर कहा क्योंकि वह किसी के सिर पर हाथ रखकर उसे भस्म कर सकता था। यह शक्ति उसे भगवान शिव से वरदान के रूप में मिली थी। उसने इस वरदान का उपयोग लोककल्याण के लिए नहीं, बल्कि अत्याचार और शिव जी पर ही आक्रमण के लिए करना चाहा। इसलिए उसका नाम उसके कर्म और वरदान दोनों को दर्शाता है। अंत में वही भस्म करने वाली शक्ति उसके विरुद्ध चली और वह अपने ही हाथ से भस्म हो गया।
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