विस्तृत उत्तर
दुर्वासा ने अम्बरीष की प्रशंसा इसलिए की क्योंकि उन्होंने भक्त की वास्तविक महिमा प्रत्यक्ष देखी। दुर्वासा ने राजा का अनिष्ट चाहा, कृत्या उत्पन्न की और उन्हें मारना चाहा, फिर भी अम्बरीष ने उनके प्रति क्रोध नहीं रखा। जब दुर्वासा सुदर्शन चक्र से पीड़ित होकर लौटे, तब राजा ने बदला लेने के बजाय उनकी रक्षा की प्रार्थना की। यह देखकर दुर्वासा समझ गए कि भगवान के भक्तों का हृदय अत्यंत विशाल और क्षमाशील होता है। उन्होंने कहा कि आज उन्होंने हरि-भक्तों का महान प्रभाव देखा है। अम्बरीष की करुणा ने दुर्वासा का अहंकार तोड़ दिया।
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