विस्तृत उत्तर
दुर्वासा ऋषि और सुदर्शन चक्र का प्रसंग भक्त-अपराध की गंभीरता बताता है। दुर्वासा ने अम्बरीष को दंडित करने के लिए कृत्या राक्षसी उत्पन्न की। सुदर्शन चक्र ने अम्बरीष की रक्षा करते हुए कृत्या को भस्म कर दिया और फिर दुर्वासा के पीछे दौड़ा। दुर्वासा तीनों लोकों में भागे। ब्रह्मा और शिव ने भी उनकी रक्षा करने में असमर्थता बताई। अंत में विष्णु ने कहा कि वे अपने भक्त के अधीन हैं और दुर्वासा को अम्बरीष से क्षमा माँगनी होगी। अम्बरीष की प्रार्थना पर ही सुदर्शन चक्र शांत हुआ।
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