विस्तृत उत्तर
दुर्वासा ऋषि का क्रोध पुराणों में अत्यंत प्रसिद्ध है। वे महान तपस्वी और सिद्ध योगी थे, लेकिन थोड़े से अपमान या नियम-भंग पर अत्यंत शीघ्र क्रोधित हो जाते थे। उनके शाप से देवता, राजा और सामान्य लोग भी भयभीत रहते थे। अम्बरीष कथा में उनका क्रोध इस रूप में दिखाई देता है कि राजा ने केवल जल पिया, फिर भी उन्होंने इसे अतिथि-असम्मान मान लिया। क्रोध में उन्होंने कृत्या राक्षसी उत्पन्न कर दी। पर इस कथा का मोड़ यह है कि उनका क्रोध अम्बरीष की भक्ति और सुदर्शन चक्र के सामने टिक नहीं पाया। अंततः उन्हें क्षमा माँगनी पड़ी।
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