विस्तृत उत्तर
दुर्वासा ऋषि महान तपस्वी, सिद्ध योगी और अत्रि ऋषि तथा माता अनसूया के पुत्र माने जाते हैं। पुराणों में वे भगवान शिव या रुद्र के अंशावतार के रूप में वर्णित हैं। वे अत्यंत तेजस्वी, योग-सिद्ध और त्रिकालज्ञानी थे, लेकिन अपने शीघ्र क्रोध के लिए भी प्रसिद्ध थे। कई कथाओं में उनका क्रोध देवताओं, राजाओं और साधारण लोगों के जीवन में बड़े परिणाम लाता है। अम्बरीष कथा में भी वे क्रोधवश राजा को दंड देना चाहते हैं, पर सुदर्शन चक्र के भय से उन्हें भक्त की महिमा का अनुभव होता है।
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