विस्तृत उत्तर
घटोत्कच भीमसेन और राक्षसी हिडिम्बा का पुत्र था। वह आधा मानव और आधा राक्षस होने के कारण दोनों जातियों की शक्तियों का संयोग था।
मायावी अस्त्र — माता हिडिम्बा से घटोत्कच ने राक्षसी मायाविद्या सीखी थी। इसी से वह दिव्य-मानवीय और राक्षसी अस्त्रों का प्रयोग करता था। उसके मायावी अस्त्रों में विभिन्न प्रकार के बाण, शक्तियाँ, माया-जाल और दिव्य अस्त्र सम्मिलित थे।
राक्षस कुल की शक्तियाँ — घटोत्कच आकार बदल सकता था, अदृश्य हो सकता था, विशालकाय रूप धारण कर सकता था और आकाश से प्रहार कर सकता था। रात्रि में उसकी शक्तियाँ कई गुना बढ़ जाती थीं।
महाभारत में युद्ध — कुरुक्षेत्र के 14वें दिन के रात्रि युद्ध में घटोत्कच ने कौरव सेना पर अपनी मायावी शक्ति से प्रलय मचा दी। उसने अलम्बुष और अलायुध जैसे राक्षस योद्धाओं को भी मारा। महाभारत के द्रोणपर्व में वर्णित है कि घटोत्कच के शरीर में पहले से ही दिव्य नाग, मनुष्य और राक्षस संबंधी नाना प्रकार के अस्त्र-समूहों से प्रहार हो चुके थे फिर भी वह लड़ता रहा।
कृष्ण की प्रसन्नता — जब घटोत्कच का वध हुआ, कृष्ण प्रसन्न हुए क्योंकि कर्ण ने अर्जुन के लिए बचाई गई अमोघशक्ति घटोत्कच पर नष्ट कर दी थी।





