विस्तृत उत्तर
घटोत्कच की माया शक्ति उसे उसके राक्षस कुल से विरासत में मिली थी और माता हिडिम्बा ने उसे पूर्णरूप से विकसित किया था।
माया की प्रमुख शक्तियाँ — पहली, रूप परिवर्तन: घटोत्कच इच्छानुसार किसी भी रूप में बदल सकता था। दूसरी, विशालकाय होना: वह इतना बड़ा हो जाता था कि एक बार गिरने पर उसके शरीर ने कौरव सेना की एक पूरी अक्षौहिणी सेना को कुचल दिया। तीसरी, अदृश्य होना: माया से युद्ध करते हुए वह अचानक अदृश्य हो सकता था जिससे शत्रु को उस पर प्रहार करना असंभव हो जाता था।
रात्रि में शक्ति का बढ़ना — राक्षस कुल की सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि उनकी शक्ति दिन की तुलना में रात को कई गुना बढ़ जाती थी। यही कारण था कि 14वें दिन के रात्रि युद्ध में घटोत्कच सर्वाधिक प्रभावशाली था।
माया-जाल — घटोत्कच माया-जाल बुनकर शत्रु सेना को भ्रमित कर देता था। वह आकाश से प्रहार कर सकता था, एक साथ अनेक दिशाओं से वार कर सकता था और शत्रु को वास्तविक स्थिति से भिन्न दृश्य दिखा सकता था।
कौरव सेना का भय — उसकी माया इतनी प्रभावशाली थी कि कौरव सेना में भगदड़ मच गई और दुर्योधन को कर्ण का अमोघ अस्त्र उस पर चलवाना पड़ा।





