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विस्तृत उत्तर
हिरण्याक्ष और हिरण्यकशिपु की पूर्व जन्म कथा जय और विजय से शुरू होती है। वे दोनों वैकुण्ठ में भगवान विष्णु के द्वारपाल थे, लेकिन सनकादिक मुनियों को रोकने के कारण उन्हें श्राप मिला। श्राप के बाद उन्होंने तीन जन्मों तक भगवान के शत्रु रूप में जन्म लेना चुना। पहले जन्म में वे दिति और कश्यप के पुत्र हिरण्याक्ष और हिरण्यकशिपु बने। भगवान विष्णु ने वराह और नृसिंह अवतार लेकर दोनों का वध किया और उन्हें श्राप से आगे मुक्त किया।
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