विस्तृत उत्तर
कुम्भकर्ण ने ब्रह्माजी से छः महीनोंकी नींद का वरदान माँगा। पर यह उसकी अपनी इच्छा नहीं थी — ब्रह्माजी ने सरस्वतीजी से प्रेरणा करके उसकी बुद्धि फेर दी।
चौपाई — 'जौं एहिं खल नित करब अहारू। होइहि सब उजारि संसारू। सारद प्रेरि तासु मति फेरी। मागेसि नीद मास घट केरी॥'
इसका अर्थ — (ब्रह्माजी ने सोचा कि) जो यह दुष्ट नित्य आहार करेगा, तो सारा संसार ही उजड़ हो जायगा। (ऐसा विचारकर) ब्रह्माजीने सरस्वतीको प्रेरणा करके उसकी बुद्धि फेर दी। (जिससे) उसने छः महीनोंकी नींद माँगी।
कुम्भकर्ण इतना बलवान् था कि यदि वह प्रतिदिन भोजन करता तो सम्पूर्ण विश्व शीघ्र ही खाली हो जाता। इसलिये ब्रह्माजी ने चतुराई से उसे छः माह सोने का वरदान दिलवा दिया।





