विस्तृत उत्तर
महातल लोक नरक नहीं है। पुराणों में अधोलोकों, अर्थात पातालों, को नरक से सर्वथा भिन्न बताया गया है। श्रीमद्भागवत पुराण और विष्णु पुराण के अनुसार नरक लोक पाताल से भी नीचे, गर्भोदक सागर के ठीक ऊपर और दक्षिण दिशा में पितृलोक के समीप स्थित हैं, जहाँ घोर पापी जीवात्माएं यमराज के कठोर दंड का विधान भुगतती हैं। श्रीमद्भागवत पुराण में तामिस्र, अन्धतामिस्र, रौरव, कुम्भीपाक, असिपत्रवन आदि अट्ठाईस नरकों का वर्णन विशुद्ध यातना-स्थानों के रूप में है। इसके विपरीत, महातल सहित सभी सात पाताल बिल-स्वर्ग हैं, जहाँ स्वर्ग से भी अधिक भौतिक सुख, संपदा, विलासिता और ऐश्वर्य उपलब्ध है।
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