विस्तृत उत्तर
राजा अम्बरीष नाभाग के पुत्र और भगवान विष्णु के महान भक्त थे। वे चक्रवर्ती राजा होते हुए भी वैराग्यवान थे और अपनी हर इंद्रिय को भगवान की सेवा में लगाते थे। उन्होंने एक वर्ष तक एकादशी-द्वादशी व्रत किया। अंतिम पारण के समय दुर्वासा ऋषि अतिथि बने और स्नान को गए। देर होने पर अम्बरीष ने केवल जल पिया। दुर्वासा क्रोधित हुए और कृत्या उत्पन्न की, जिसे सुदर्शन चक्र ने भस्म कर दिया। चक्र दुर्वासा के पीछे लगा। ब्रह्मा, शिव और विष्णु ने भी उन्हें अम्बरीष से क्षमा माँगने को कहा। अम्बरीष ने दुर्वासा को बचाया और भोजन कराया।
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