विस्तृत उत्तर
राजा अम्बरीष की सुदर्शन प्रार्थना उनकी करुणा और भक्तस्वभाव का श्रेष्ठ उदाहरण है। दुर्वासा ने उनका अनिष्ट चाहा था, फिर भी जब वे सुदर्शन चक्र से पीड़ित होकर लौटे, तो अम्बरीष ने उनके लिए प्रार्थना की। उन्होंने सुदर्शन चक्र को विश्वरक्षक और भगवान का अमोघ अस्त्र कहकर नमस्कार किया। उन्होंने कहा कि यदि मैंने सच्चा धर्म, दान, यज्ञ और ब्राह्मण-सेवा की है, तो इस ब्राह्मण की पीड़ा शांत हो जाए। राजा की निष्कपट भावना से सुदर्शन चक्र शांत हुआ। यह बताता है कि सच्चा भक्त प्रतिशोध नहीं, कल्याण चाहता है।
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