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विस्तृत उत्तर
समुद्र मंथन में असुर वासुकी नाग के मुख की ओर खड़े थे। मंथन के दौरान वासुकी को लगातार खींचा गया, जिससे उसके मुख से गर्म धुआं, विषैली फुफकार और ज्वाला जैसी ऊर्जा निकलने लगी। असुरों ने अहंकार में वही भाग पकड़ा था, इसलिए वे उस विषैले धुएं से झुलस गए। कथा में कहा गया है कि उनका तेज कम हो गया और वे काले पड़ गए। यह घटना भगवान विष्णु की सूक्ष्म नीति का परिणाम थी, क्योंकि उन्होंने देवताओं को पूंछ की ओर रखा और असुर अपने ही अहंकार से कष्ट में फंस गए।
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