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विस्तृत उत्तर
समुद्र मंथन में देवता और असुर साथ इसलिए आए क्योंकि क्षीरसागर को मथना अकेले किसी एक पक्ष के लिए संभव नहीं था। देवता दुर्वासा ऋषि के श्राप से कमजोर हो गए थे, जबकि असुर बलवान थे। भगवान विष्णु ने देवताओं को समझाया कि बड़े उद्देश्य के लिए शत्रु से भी अस्थायी संधि करनी पड़ती है। असुर अमृत के लोभ में संधि के लिए तैयार हो गए। दोनों ने मिलकर मंदराचल पर्वत और वासुकी नाग की सहायता से मंथन किया। हालांकि अंतिम व्यवस्था विष्णु ने ऐसी बनाई कि अमृत देवताओं को ही प्राप्त हुआ।
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