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विस्तृत उत्तर
समुद्र मंथन की शुरुआत इंद्र की एक बड़ी गलती से जुड़ी है। महर्षि दुर्वासा ने उन्हें दिव्य माला दी थी, लेकिन इंद्र ने उसे सम्मान से धारण नहीं किया। उन्होंने अहंकार में माला को अपने वाहन ऐरावत पर रख दिया। ऐरावत ने माला को फेंककर रौंद दिया, जिससे ऋषि का अपमान हुआ। दुर्वासा ने इंद्र को श्राप दिया कि उनका ऐश्वर्य और श्री नष्ट हो जाएगा। इस गलती से देवताओं की शक्ति चली गई और असुरों ने स्वर्ग जीत लिया। इसलिए इंद्र का अहंकार ही समुद्र मंथन की प्रमुख पृष्ठभूमि बना।
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